भोरमदेव में जंगल सफारी शुरू, इको-टूरिज्म को नई उड़ान, जंगल और रोजगार दोनों होंगे समृद्ध

Chhattisgarh Eco-Tourism Development

Chhattisgarh Eco-Tourism Development : छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश के पर्यटन मानचित्र पर एक और अहम उपलब्धि जोड़ते हुए भोरमदेव वन्यजीव अभयारण्य में जंगल सफारी की शुरुआत कर दी है। शनिवार को शुरू हुई यह पहल न सिर्फ पर्यटकों को प्राकृतिक सौंदर्य और वन्यजीवन का रोमांचक अनुभव देगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित करेगी। सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य इको-टूरिज्म को बढ़ावा देना और अभयारण्य की समृद्ध जैव विविधता को वैश्विक पहचान दिलाना है।

34 किलोमीटर लंबा सफारी रूट

करीब 34 किलोमीटर लंबा यह सफारी रूट पर्यटकों को घने जंगलों, पहाड़ियों और जल स्रोतों के बीच से होकर ले जाता है। इस दौरान दुर्दुरी जलप्रपात की मनमोहक छटा, बावापारा का 360 डिग्री हिल व्यू पॉइंट और सकरी नदी के कई रोमांचक क्रॉसिंग सफर को यादगार बनाते हैं। प्राकृतिक खूबसूरती और वन्यजीवों की मौजूदगी इस सफारी को खास बनाती है।

प्रारंभिक चरण में पर्यटकों के लिए छह-सीटर की तीन आधुनिक सफारी गाड़ियां उपलब्ध कराई गई हैं। साथ ही, ऑनलाइन टिकट बुकिंग की सुविधा शुरू होने से पर्यटकों को अब लंबी कतारों से राहत मिलेगी और यात्रा अधिक सुविधाजनक बनेगी।

कई नई सुविधाओं की होंगी

वन विभाग के अनुसार, भोरमदेव अभयारण्य एक महत्वपूर्ण वन्यजीव कॉरिडोर है, जो छत्तीसगढ़ के अचानकमार टाइगर रिजर्व को मध्यप्रदेश के कान्हा नेशनल पार्क से जोड़ता है।

यह कॉरिडोर वन्यजीवों की आवाजाही, उनकी प्रजातिगत विविधता और पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है, जिससे इस क्षेत्र का पर्यावरणीय महत्व और भी बढ़ जाता है।

इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए यहां भविष्य में ईको-कॉटेज, नेचर ट्रेल्स और गाइडेड सफारी जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

स्थानीय सहभागिता को प्राथमिकता देते हुए महिला स्व-सहायता समूहों को “वनांचल रसोई” के संचालन की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी, जहां पर्यटकों को पारंपरिक छत्तीसगढ़ी व्यंजनों का स्वाद मिलेगा। इसके साथ ही स्थानीय हस्तशिल्प को भी मंच मिलेगा, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

स्थानीय लोगों को मिलेगा रोजगार

अधिकारियों का मानना है कि इस परियोजना से सीधे तौर पर करीब 30 स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा, जबकि होटल, परिवहन और छोटे व्यवसायों के जरिए बड़ी संख्या में अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। इससे क्षेत्र के आर्थिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।

वर्ष 2001 में स्थापित भोरमदेव वन्यजीव अभयारण्य 352 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है और इसमें भोरमदेव व चिल्फी वन परिक्षेत्र शामिल हैं। यह क्षेत्र बायसन, बाघ, तेंदुआ, भालू, सांभर, हिरण और नीलगाय जैसे वन्यजीवों का सुरक्षित आवास है। साथ ही, यहां 134 प्रजातियों की तितलियां और 126 प्रजातियों के पक्षी पाए जाते हैं, जो इसे जैव विविधता का समृद्ध केंद्र बनाते हैं।

नई जंगल सफारी की शुरुआत से भोरमदेव अब प्रकृति प्रेमियों और एडवेंचर के शौकीनों के लिए एक प्रमुख आकर्षण के रूप में उभरने जा रहा है, जिससे छत्तीसगढ़ का पर्यटन क्षेत्र नई ऊंचाइयों को छुएगा।

यह भी पढ़ेंछत्तीसगढ़ IED ब्लास्ट, डी-माइनिंग के दौरान हादसा, तीन जवान शहीद

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *


Make Punjab Kesari Your Trusted News Source

पंजाब केसरी एक हिंदी भाषा का समाचार पत्र है जो भारत में पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली के कई केंद्रों से प्रकाशित होता है।