नई दिल्ली, 3 मई (आईएएनएस)। दिल्ली के मुखर्जी नगर इलाके में करीब 26 साल पुराने एक सनसनीखेज मर्डर-कम-लूट केस का आखिरकार खुलासा हो गया है। यह मामला इतना पुराना था कि कई लोग मान चुके थे कि अब शायद इसका कोई सुराग नहीं मिलेगा, लेकिन पुलिस की लगातार कोशिशों और तकनीकी जांच के चलते मुख्य आरोपी को बिहार से गिरफ्तार कर लिया गया।
यह मामला साल 2000 में दर्ज हुआ था, जब एक महिला की बेरहमी से हत्या और लाखों रुपये की लूट की वारदात सामने आई थी। इस केस में आरोपी नरेश मुखिया उर्फ नागेश्वर मुखिया लंबे समय से फरार था और अदालत ने उसे पहले ही ‘घोषित अपराधी’ घोषित कर दिया था।
घटना उस समय की है जब नरेश मुखिया दिल्ली में एक मकान में काम करता था। उसी बिल्डिंग में दूसरी मंजिल पर एक परिवार रहता था, जहां महिला आशा छाबड़ा रहती थीं। बताया जाता है कि आरोपी को यह जानकारी मिली थी कि महिला ने घर बेचकर करीब 35-40 लाख रुपये कैश अपने घर में रखा हुआ है।
इसके बाद उसने अपने साथियों के साथ मिलकर लूट की योजना बनाई। एक दिन जनवरी के महीने में वे सभी मौके पर पहुंचे। उस वक्त घर का दरवाजा खुला हुआ था। आरोपी चुपचाप अंदर घुस गया और अलमारी खोलने लगा। तभी महिला अचानक वहां आ गईं और शोर मचा दिया। इसी दौरान आरोपियों ने मिलकर महिला को पकड़ लिया और फोन के तार से गला घोंटकर उनकी हत्या कर दी। हत्या के बाद आरोपी और उसके साथी अलमारी से करीब 8 लाख रुपये और अन्य कीमती सामान लेकर फरार हो गए।
इसके बाद यह मामला सालों तक अनसुलझा रहा। पुलिस ने कई बार जांच की कोशिश की, लेकिन आरोपी लगातार अपनी लोकेशन बदलता रहा। कभी वह सिलिगुड़ी में रहा, फिर कोलकाता में कुछ साल गुजारे, उसके बाद अहमदाबाद में लंबे समय तक रहा और बाद में बिहार के समस्तीपुर जिले में वापस आ गया।
हाल ही में पुलिस की एक विशेष टीम, जिसका नेतृत्व इंस्पेक्टर पुखराज सिंह कर रहे थे, ने इस पुराने केस को फिर से खंगालना शुरू किया। एएसआई प्रदीप और हेड कांस्टेबल नरेंद्र की सूचना के आधार पर टीम ने तकनीकी सर्विलांस और लोकल इंटेलिजेंस की मदद से आरोपी की लोकेशन ट्रेस की।
इसके बाद 2 मई 2026 को एक संयुक्त टीम बनाई गई, जिसमें एसआई निरंजन, एएसआई पवन, हेड कांस्टेबल सचिन, मुकेश, विक्रांत और कांस्टेबल मनोज शामिल थे। टीम ने बिहार के समस्तीपुर जिले के सिंघिया थाना क्षेत्र के ममूरपुर गांव में छापा मारा और आरोपी को सफलतापूर्वक गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तारी के समय आरोपी एक साधारण जीवन जी रहा था। वह पहले मजदूरी करता था और पिछले कुछ समय से अपने गांव में छोटी सी किराना दुकान चला रहा था। जांच में यह भी सामने आया कि वह शराब का आदी था और पिछले कई सालों में उसने अपनी पहचान बदलने की पूरी कोशिश की ताकि पुलिस उसे पकड़ न सके।
–आईएएनएस
पीआईएम/पीएम
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