चेन्नई, 3 मई (आईएएनएस)। पीएमके अध्यक्ष अंबुमणि रामदास ने रविवार को तमिलनाडु के छह जिलों में नए सरकारी मेडिकल कॉलेज तुरंत खोलने की मांग की। यह मांग राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) द्वारा उन प्रतिबंधात्मक नियमों को वापस लेने के बाद की गई है, जो राज्य में मेडिकल शिक्षा के विस्तार में बाधा बन रहे थे।
एक बयान में अंबुमणि रामदास ने कहा कि पहले के नियम को हटाए जाने से कांचीपुरम, रानीपेट, तिरुपत्तूर, मयिलादुथुरई, पेरंबलूर और तेनकासी जिलों में सरकारी मेडिकल कॉलेज स्थापित करने का अवसर पैदा हुआ है।
उन्होंने राज्य सरकार से अपील की कि मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य ढांचे तक पहुंच बेढ़ाने के लिए बिना देरी के कदम उठाए जाएं।
पीएमके नेता ने बताया कि 16 अगस्त 2023 को एनएमसी द्वारा जारी किए गए अब हटाए जा चुके नियम के तहत प्रति 10 लाख आबादी पर 100 एमबीबीएस सीटों की सीमा तय की गई थी। इसका मतलब यह था कि निर्धारित अनुपात से अधिक सीटें होने पर राज्यों को नए मेडिकल कॉलेज खोलने या सीटें बढ़ाने की अनुमति नहीं मिलती। तमिलनाडु की आबादी के आधार पर राज्य को केवल 7,731 एमबीबीएस सीटों की अनुमति मिलती, जबकि सरकारी और निजी कॉलेजों में पहले से 12,650 सीटें मौजूद थीं। इस कारण विस्तार पूरी तरह रुक गया था।
रामदास ने कहा कि पीएमके ने शुरू से ही इस नियम का विरोध किया था और उन्होंने इसे वापस लेने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भी लिखा था।
इसके बाद एनएमसी ने इस नियम के लागू होने को एक साल के लिए टाल दिया था और केवल उन संस्थानों को मंजूरी दी थी जिन्होंने 2025 से पहले आवेदन किया था। 27 अप्रैल 2026 को जारी नए नोटिफिकेशन का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि इससे तमिलनाडु और अन्य दक्षिणी राज्यों में मेडिकल शिक्षा के विस्तार की रुकी हुई योजनाओं को फिर से गति मिलेगी।
उन्होंने पीएमके के लंबे समय से चले आ रहे लक्ष्य को दोहराया कि हर जिले में कम से कम एक सरकारी मेडिकल कॉलेज होना चाहिए। रामदास ने बताया कि एडप्पादी के. पलानीस्वामी के नेतृत्व वाली AIADMK सरकार के दौरान 50 महीनों में 13 नए सरकारी मेडिकल कॉलेज खोले गए थे, जो राज्य के इतिहास में सबसे अधिक हैं।
हालांकि, उन्होंने मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के नेतृत्व वाली डीएमके सरकार की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि उसके कार्यकाल में एक भी नया सरकारी मेडिकल कॉलेज नहीं खोला गया।
उन्होंने कहा कि सरकार के पास पिछले चार वर्षों में, यहां तक कि 2025 में प्रतिबंध लागू होने से पहले भी, नए कॉलेज स्थापित करने का पर्याप्त समय था, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। रामदास ने जोड़ा कि अब जब नियामकीय बाधाएं हट गई हैं, तो राज्य को मेडिकल ढांचे के विस्तार को प्राथमिकता देनी चाहिए।
उन्होंने आश्वासन दिया कि यदि जनहितकारी सरकार सत्ता में आती है, तो पीएमके इस दिशा में तेजी से कदम उठाने के लिए दबाव बनाएगी।
–आईएएनएस
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