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Delhi High Court ने Uniform Civil Code वाली याचिका योग्य नहीं होने के कारण खारिज

Summary :

Uniform Civil Code: दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को उन याचिकाओं के एक समूह पर सभी कार्यवाही बंद कर दी, जिसमें समान नागरिक संहिता का मसौदा तैयार करने और उसे समय पर लागू करने के लिए केंद्र और विधि आयोग से निर्देश देने की मांग की गई थी। देश और देखा कि विधि आयोग पहले से ही इस विषय पर काम कर रहा है और मामले को जब्त कर लिया है। HIGHLIGHTS POINTS: दिल्ली हाई कोर्ट ने याचिकाओं के एक समूह पर सभी कार्यवाही बंद की UCC का मसौदा तैयार करने और उसे समय पर लागू करने की मांग की…

Uniform Civil Code: दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को उन याचिकाओं के एक समूह पर सभी कार्यवाही बंद कर दी, जिसमें समान नागरिक संहिता का मसौदा तैयार करने और उसे समय पर लागू करने के लिए केंद्र और विधि आयोग से निर्देश देने की मांग की गई थी। देश और देखा कि विधि आयोग पहले से ही इस विषय पर काम कर रहा है और मामले को जब्त कर लिया है।

HIGHLIGHTS POINTS:

  • दिल्ली हाई कोर्ट ने याचिकाओं के एक समूह पर सभी कार्यवाही बंद की
  • UCC का मसौदा तैयार करने और उसे समय पर लागू करने की मांग की थी
  • कोर्ट ने कहा, भारत का विधि आयोग पहले से ही इस मुद्दे से निपट रहा है

 

विधि आयोग Uniform Civil Code पर कर रहा है कार्य

Uniform Civil Code: न्यायमूर्ति मनमोहन और न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा की पीठ ने दलीलें नोट करने के बाद मामले को निपटाने का फैसला किया और कहा कि भारत का विधि आयोग पहले से ही इस मुद्दे से निपट रहा है और हम विधायिका को एक विशेष कानून बनाने का निर्देश नहीं दे सकते। इससे पहले केंद्र सरकार ने अपने जवाब में कहा था कि किसी कानून को बनाना या न बनाना विधायिका का काम है, यह जनता के निर्वाचित प्रतिनिधियों को तय करने का नीतिगत मामला है और इस संबंध में न्यायालय द्वारा कोई निर्देश जारी नहीं किया जा सकता है।

याचिका योग्य नहीं होने के कारण खारिज

Uniform Civil Code: दिल्ली उच्च न्यायालय में केंद्र सरकार ने कानून और न्याय मंत्रालय के माध्यम से एक हलफनामा दायर किया है और महिलाओं के लिए लैंगिक न्याय, समानता और सम्मान को सुरक्षित करने के लिए यूसीसी का मसौदा तैयार करने की मांग करने वाली जनहित याचिका और अन्य याचिकाओं का विरोध किया है। केंद्र के जवाब में आगे कहा गया कि याचिकाकर्ताओं द्वारा याचिकाओं में मांगी गई राहत न तो कानून में और न ही तथ्यों पर टिकने योग्य है और इसलिए इसे कायम रखने योग्य नहीं होने के कारण खारिज कर दिया जा सकता है।

 

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Desk Team

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