कैट ने सरकार से छोटे व्यापारियों के हितों को सुरक्षित रखने के लिए मजबूत राष्ट्रीय ई-कॉमर्स नीति बनाने का आग्रह किया

नई दिल्ली, 26 अप्रैल (आईएएनएस)। अखिल भारतीय व्यापारी परिसंघ (कैट) ने रविवार को कहा कि अगर भारत के तेजी से बढ़ते डिजिटल मार्केट को अविनियमित छोड़ा गया तो यह भारत के पारंपरिक खुदरा बाजार के ढांचे को नुकसान पहुंचा सकता है, जो कि बड़े स्तर पर देश में स्वरोजगार और नौकरियों के अवसर पैदा करते हैं।

इसके साथ ही, कैट ने सरकार से आग्रह किया कि वह छोटे व्यापारियों के हितों को सुरक्षित रखने के लिए मजबूत राष्ट्रीय ई-कॉमर्स नीति बनाए।

केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल को भेजे गए एक पत्र में, कैट के महासचिव और सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने डेलॉयट और गूगल की ताजा संयुक्त रिपोर्ट “द 250 बिलियन डॉलर कॉमर्स फ्रंटियर” का हवाला देते हुए कहा कि रिपोर्ट भारत के डिजिटल वाणिज्य बाजार के भविष्य में होने वाले व्यापक विस्तार को स्पष्ट रूप से दर्शाती है, लेकिन साथ ही निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा और संतुलित विकास सुनिश्चित करने के लिए नीतिगत सुरक्षा उपायों की तत्काल आवश्यकता पर भी जोर देती है।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत का ई-कॉमर्स बाजार 2019 से 2025 के बीच बढ़कर लगभग 90 अरब डॉलर हो गया है और 2030 तक इसके 250 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।

इसमें आगे कहा गया है कि 2030 तक 22 करोड़ नए जनरेशन जेड के ग्राहक ऑनलाइन खरीदारी से जुड़ेंगे, जनरेशन जेड के ग्राहक कुल ऑनलाइन खर्च का 45 प्रतिशत हिस्सा होंगे, 15 करोड़ नए ग्राहक ऑनलाइन आएंगे और प्रति व्यक्ति ई-कॉमर्स खर्च दोगुना होने की उम्मीद है।

टियर-2 शहरों और छोटे कस्बों में पहले से ही 60 प्रतिशत से अधिक ग्राहक सामान खरीद रहे हैं, कुल खर्च का लगभग आधा हिस्सा और कुल ऑर्डर का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा यहीं से आता है।

खंडेलवाल ने कहा कि ये आंकड़े भारत के डिजिटल बाजार की अपार क्षमता और संभावनाओं को दर्शाते हैं।

कैट ने सरकार से आग्रह किया कि वह तत्काल एक व्यापक राष्ट्रीय ई-कॉमर्स नीति लागू करे, जिसमें प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नियमों का कड़ाई से पालन, अनुचित मूल्य निर्धारण पर प्रतिबंध, अवैध दुकानों का विनियमन, एल्गोरिदम और विक्रेता रैंकिंग में पारदर्शिता, अवैध व्यापार से सुरक्षा, नकली और घटिया वस्तुओं के लिए जवाबदेही, लघु एवं मध्यम उद्यमों और छोटे खुदरा विक्रेताओं के लिए समान अवसर, डेटा सुरक्षा और व्यापारियों एवं उपभोक्ताओं के लिए एक समर्पित शिकायत निवारण प्रणाली के प्रावधान हों।

भारत के छोटे खुदरा विक्रेता, किराना स्टोर, थोक विक्रेता, वितरक, परिवहनकर्ता और संबद्ध क्षेत्र शहरी और ग्रामीण भारत में करोड़ों परिवारों का भरण-पोषण करते हैं। उन्होंने कहा कि इस पारिस्थितिकी तंत्र के कमजोर होने से गंभीर आर्थिक और सामाजिक परिणाम होंगे।

कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष, बीसी भरतिया ने आरोप लगाया कि प्रमुख ई-कॉमर्स कंपनियां अप्रत्यक्ष इन्वेंट्री स्वामित्व, पसंदीदा विक्रेता व्यवस्था, निजी लेबल और जोड़-तोड़ वाली व्यावसायिक संरचनाओं के माध्यम से भारत की एफडीआई नीति की भावना का लगातार उल्लंघन कर रही हैं।

जिसे बाजार मॉडल के रूप में अनुमति दी गई थी, वह तेजी से इन्वेंट्री-नियंत्रित मॉडल में बदल गया है।

उन्होंने आगे कहा कि अनुचित मूल्य निर्धारण, कैश बर्न के माध्यम से भारी छूट, अवैध भंडार, डार्क पैटर्न, तरजीही सूचीकरण और घटिया माल की आपूर्ति जैसी प्रथाएं आम हो गई हैं। ये तरीके न केवल प्रतिस्पर्धा-विरोधी हैं, बल्कि धीरे-धीरे उन लाखों ईमानदार व्यापारियों को खत्म कर रहे हैं जिन्होंने विश्वास और सेवा के माध्यम से भारत के घरेलू बाजार का निर्माण किया है।

–आईएएनएस

एबीएस/

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