‘आप’ ने बागी 7 सदस्यों की सदस्यता रद्द करने के लिए सभापति को भेजा पत्र, क्या लागू होगा एंटी डिफेक्शन ला?

AAP to Seek Disqualification of MP
AAP to Seek Disqualification of MP : आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा के सभापति और उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन से अपने 7 सांसदों की सदस्यता समाप्त करने की मांग की है। पार्टी ने इस संबंध में औपचारिक शिकायत दर्ज कराते हुए जल्द कार्रवाई और न्यायपूर्ण निर्णय की अपील की है। ये सभी सात सांसद हाल ही में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए हैं।

बागी सांसदों के खिलाफ कार्रवाई तेज

24 अप्रैल को आप से अलग होकर भाजपा में शामिल हुए इन सात राज्यसभा सांसदों के खिलाफ पार्टी ने कार्रवाई शुरू कर दी है। आप के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा कि पार्टी ने इस मुद्दे पर संवैधानिक विशेषज्ञों से सलाह ली है। इनमें वरिष्ठ वकील कपिल और लोकसभा के पूर्व महासचिव पी. डी. टी. अर्चरी शामिल हैं। इन विशेषज्ञों का मानना है कि संबंधित सांसदों को कानून के तहत अयोग्य ठहराया जा सकता है।

संजय सिंह ने कहा कि सभापति को भेजी गई शिकायत में संविधान की दसवीं अनुसूची (एंटी-डिफेक्शन कानून) का हवाला देते हुए इन सांसदों की सदस्यता समाप्त करने का अनुरोध किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि एजेंसियों के दुरुपयोग और दबाव के जरिए चुने गए प्रतिनिधियों को तोड़ा गया, जो पंजाब और देश के संवैधानिक मूल्यों के साथ विश्वासघात है।

दलबदल कानून पर मतभेद

संजय सिंह के अनुसार, दसवीं अनुसूची के तहत इस तरह का दलबदल मान्य नहीं है और इन सांसदों को अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए। पार्टी सूत्रों का कहना है कि नेतृत्व को दलबदल की आशंका थी और अंतिम समय तक कुछ सांसदों को रोकने की कोशिश भी की गई, लेकिन प्रयास सफल नहीं हो सके।

इस बीच, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू से समय मांगा था ताकि सांसदों को वापस बुलाने की संभावना पर चर्चा हो सके, लेकिन संविधान में सांसदों या विधायकों को ‘रिकॉल’ करने का कोई प्रावधान नहीं है।

इस पूरे मामले में कानूनी राय विभाजित है। आप इसे असंवैधानिक दलबदल बता रही है, जबकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी विधायी दल के दो-तिहाई सदस्य साथ हों तो एंटी-डिफेक्शन कानून के तहत विलय (मर्जर) की अनुमति मिल सकती है।

ऐसे में अयोग्यता लागू होगी या नहीं, यह सवाल बना हुआ है। हालांकि कपिल सिबल और पी. डी, टी अर्चरी ने स्पष्ट किया है कि इन सांसदों को अयोग्य ठहराया जा सकता है।

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