कोलकाता स्ट्रॉन्गरूम विवाद पर प्रमोद तिवारी बोले- खतरे में है लोकतंत्र

Summary :

नई दिल्ली, 1 मई (आईएएनएस)। कांग्रेस से राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी ने शुक्रवार को कोलकाता स्ट्रॉन्गरूम विवाद पर चिंता जताते हुए चुनाव आयोग के कामकाज पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार होने वाली ऐसी घटनाएं देश में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर कर सकती हैं। तिवारी ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में बताया, “जहां भाजपा सत्ता में नहीं है, वहां लोग अपनी चिंताएं उठा पा रहे हैं। लेकिन जहाँ भाजपा-शासित सरकारें हैं, वहां सवाल उठाए जा रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा कि वह किसी पर सीधे आरोप नहीं लगा रहे हैं, बल्कि एक ऐसे पैटर्न की ओर इशारा…

नई दिल्ली, 1 मई (आईएएनएस)। कांग्रेस से राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी ने शुक्रवार को कोलकाता स्ट्रॉन्गरूम विवाद पर चिंता जताते हुए चुनाव आयोग के कामकाज पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार होने वाली ऐसी घटनाएं देश में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर कर सकती हैं।

तिवारी ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में बताया, “जहां भाजपा सत्ता में नहीं है, वहां लोग अपनी चिंताएं उठा पा रहे हैं। लेकिन जहाँ भाजपा-शासित सरकारें हैं, वहां सवाल उठाए जा रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा कि वह किसी पर सीधे आरोप नहीं लगा रहे हैं, बल्कि एक ऐसे पैटर्न की ओर इशारा कर रहे हैं, जिसकी उनके अनुसार जांच होनी चाहिए।

उन्होंने कहा, “जब भारत निर्वाचन आयोग पर आरोप लगाए जाते हैं, तो भाजपा के प्रवक्ता तुरंत स्पष्टीकरण देने के लिए आगे आ जाते हैं, जिससे स्वाभाविक रूप से दोनों के बीच संबंधों को लेकर सवाल उठते हैं।”

कांग्रेस नेता ने कहा कि विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ राज्यसभा में पहले ही एक नोटिस पेश कर दिया है। उन्होंने कहा, “इसीलिए हमने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ राज्यसभा में एक नोटिस सौंपा है। अगर हर जगह ऐसी घटनाएं होती रहीं, तो देश में लोकतंत्र खतरे में पड़ जाएगा।”

पार्टी के रुख को दोहराते हुए तिवारी ने चुनावी पारदर्शिता की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने आगे कहा, “कांग्रेस स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों की पूरी तरह वकालत करती है और यह मांग करती है कि मतगणना पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ की जाए।”

इस बीच, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के कुछ दिनों बाद कोलकाता की सड़कों पर चुनाव आयोग और तृणमूल कांग्रेस के बीच नया विवाद देखने को मिला, जब सत्ताधारी पार्टी ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) को रखे जाने वाले स्ट्रॉन्गरूम में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए धरना-प्रदर्शन किया।

तृणमूल ने प्रक्रियागत खामियों का आरोप लगाते हुए दावा किया कि स्ट्रॉन्गरूम के बाहर तैनात पार्टी कार्यकर्ताओं को दोपहर में वहां से जाने को कहा गया था। बाद में उन्हें बताया गया कि स्ट्रॉन्गरूम शाम करीब 4 बजे फिर से खोला जाएगा। इस बात से चिंता बढ़ी और उन्होंने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।

गुरुवार को इससे पहले, कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि मतदान का अधिकार खतरे में है और इसे नागरिकों के लिए एक मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता दिए जाने की मांग की।

जयराम रमेश ने मुख्य चुनाव आयुक्त की आलोचना करते हुए कहा कि चुनाव आयोग पहले कभी इतना समझौतावादी नहीं रहा, जितना आज है। उन्होंने कहा, “इसकी शुरुआत उनके पूर्ववर्ती के समय ही हो गई थी। यह व्यक्ति एक खिलाड़ी है, न कि कोई निष्पक्ष पर्यवेक्षक।”

उन्होंने आगे आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार “पूरी तरह से समझौता कर चुके हैं” और चुनावी प्रक्रिया में निष्पक्ष अधिकारी होने के बजाय एक पक्षकार बन गए हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग को लेकर राज्यसभा में नया नोटिस लाने के विपक्ष के कदम पर रमेश ने कहा कि इस दिशा में प्रयास जारी रहेंगे।

–आईएएनएस

एसएचके/पीएम

(This content is sourced from a syndicated feed and is published as received. Punjab Kesari assumes no responsibility or liability for its accuracy, completeness, or content.)

News Desk

News Desk is the editorial team of Punjab Kesari. This article is based on information provided by IANS.