ईडी ने रिलायंस अनिल अंबानी समूह के दो पूर्व अधिकारियों को किया गिरफ्तार, कंपनी ने दी प्रतिक्रिया

मुंबई, 13 जून (आईएएनएस)। अधिकारियों के अनुसार, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत रिलायंस अनिल अंबानी समूह (एडीएजी) के दो पूर्व अधिकारियों को मुंबई में गिरफ्तार किया है।

जांच एजेंसी ने रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड के पूर्व निदेशक सतीश सेठ और गौतम दोशी को ट्रांजिट रिमांड पर लिया है।

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने मार्च में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) से जुड़े 114.98 करोड़ रुपए के कथित लोन धोखाधड़ी मामले की जांच के तहत दोनों के खिलाफ मामला दर्ज किया था और उनके परिसरों पर छापेमारी भी की थी।

सतीश सेठ पहले रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के उपाध्यक्ष रह चुके हैं। उन्हें आगे की हिरासत के लिए दिल्ली की अदालत में पेश किया जाएगा।

रिलायंस समूह के एक प्रवक्ता ने बयान में कहा कि “सतीश सेठ (70 वर्ष) और गौतम दोशी (73 वर्ष) का अब समूह से कोई संबंध नहीं है।”

प्रवक्ता ने कहा, “सतीश सेठ ने समूह में समूह प्रबंध निदेशक के रूप में और कई कंपनियों के निदेशक मंडल में निदेशक के रूप में सेवाएं दी थीं। उन्होंने वर्ष 2025 में समूह छोड़ दिया था। गौतम दोशी ने भी समूह प्रबंध निदेशक और समूह के भीतर तथा बाहर कई कंपनियों के निदेशक के रूप में काम किया था। उन्होंने छह वर्ष पहले, वर्ष 2020 में समूह छोड़ दिया था।”

सीबीआई के अनुसार, भारतीय स्टेट बैंक उन 11 बैंकों के समूह का हिस्सा था, जिसने रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड को कुल 735 करोड़ रुपए की टर्म लोन सुविधा मंजूर की थी। माना जा रहा है कि ईडी ने सीबीआई की इसी शिकायत का संज्ञान लेकर बैंक लोन धोखाधड़ी मामले में सतीश सेठ और गौतम दोशी की भूमिका की जांच शुरू की है।

इससे पहले जून में सीबीआई ने रिलायंस कम्युनिकेशंस के पूर्व समूह प्रबंध निदेशक अमिताभ झुनझुनवाला को कथित लोन धोखाधड़ी मामले में गिरफ्तार किया था। अधिकारियों के अनुसार, इस मामले में कंपनी द्वारा एसबीआई को 2,929.05 करोड़ रुपए का नुकसान पहुंचाया गया था। अदालत में पेश किए जाने के बाद सीबीआई ने उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया था।

इस बीच, राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) ने गुरुवार को एसबीआई की याचिका स्वीकार करते हुए उद्योगपति अनिल अंबानी के खिलाफ व्यक्तिगत दिवाला समाधान प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया। यह कार्रवाई रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) और रिलायंस इन्फ्राटेल लिमिटेड (आरआईटीएल) को दिए गए ऋणों के लिए उनकी व्यक्तिगत गारंटी के आधार पर की गई है।

एनसीएलटी के इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए अनिल अंबानी के प्रवक्ता ने कहा कि आदेश की प्रति उपलब्ध होने के बाद उनकी कानूनी टीम उसका अध्ययन करेगी और कानूनी सलाह के अनुसार उपयुक्त मंचों पर उसे चुनौती देगी।

प्रवक्ता ने कहा, “अंबानी को पूरा विश्वास है कि वह उचित कानूनी मंचों पर अपना पक्ष सफलतापूर्वक साबित करेंगे।”

–आईएएनएस

डीबीपी

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