रांची, 24 अगस्त (आईएएनएस)। झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री और जामताड़ा से कांग्रेस विधायक इरफान अंसारी ने योग शिक्षिका राफिया नाज को लेकर आपत्तिजनक एवं अभद्र टिप्पणी से जुड़े केस में सोमवार को रांची स्थित एमपी-एमएलए कोर्ट में सरेंडर किया। अदालत ने उन्हें 10-10 हजार रुपये के दो जमानतदारों के आधार पर जमानत दे दी। मामले में अब आगे की सुनवाई होगी।
यह मामला 19 अगस्त 2020 का है, जब रांची के डोरंडा निवासी योग शिक्षिका राफिया नाज ने सिविल कोर्ट में इरफान अंसारी के खिलाफ शिकायतवाद दर्ज कराया था। आरोप है कि मंत्री ने एक निजी समाचार चैनल पर उनके पहनावे को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी, जिससे उनकी छवि धूमिल हुई और धार्मिक भावनाएं आहत हुईं।
शिकायत में अंसारी पर स्त्री लज्जा भंग करने, भीड़ को हिंसा के लिए उकसाने, धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाने और जानबूझकर अपमानित करने जैसे आरोप लगाए गए हैं। मामले की जांच और गवाहों के बयान के आधार पर अदालत ने इरफान अंसारी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 500 और 504 के तहत संज्ञान लिया था। इसके बाद अदालत ने उन्हें पेश होने के लिए समन जारी किया था।
इससे पहले, इरफान अंसारी की ओर से अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने से छूट देने के लिए याचिका दायर की गई थी। जुलाई 2025 में एमपी-एमएलए मामलों के विशेष न्यायिक दंडाधिकारी सार्थक शर्मा की अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी।
अदालत ने कहा था कि मंत्री को मामले की सुनवाई के दौरान व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा। बचाव पक्ष ने मंत्री की व्यस्तता का हवाला देते हुए व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट की मांग की थी।
वहीं, शिकायतकर्ता राफिया नाज के अधिवक्ता जितेंद्र कुमार वर्मा ने इसका विरोध किया था। उन्होंने कहा था कि मंत्री का मुख्यालय रांची में ही है और अदालत भी राजधानी में स्थित है। ऐसे में व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट देने का कोई औचित्य नहीं है। सोमवार को अदालत में पेश होने के बाद इरफान अंसारी ने कहा कि वह सभी अदालतों का सम्मान करते हैं।
–आईएएनएस
एसएनसी/एएसएच
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