नई दिल्ली, 20 जून (आईएएनएस)। केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय ने ‘निर्भया फंड’ परियोजना के अंतर्गत नई दिल्ली में ‘निर्भय चेतना’ पर तीन दिवसीय प्रशिक्षक प्रशिक्षण (टीओटी) कार्यक्रम का आयोजन किया। दुनियाभर में अपनी तरह की सबसे बड़ी मुहिम मानी जाने वाली ‘निर्भय चेतना’ महिलाओं से संबंधित मुद्दों के प्रति पुरुषों को संवेदनशील बनाने की एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पहल है, जिसका उद्देश्य जमीनी स्तर पर लैंगिक रूप से संवेदनशील शासन को मजबूत करना है।
इस कार्यक्रम में ‘ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया’ की ओर से विकसित ‘निर्भय चेतना’ प्रशिक्षण मॉड्यूल का भी शुभारंभ किया गया। इस पहल का उद्देश्य कुशल प्रशिक्षकों का एक ग्रुप तैयार करना है, जो पंचायती राज संस्थाओं के भीतर लैंगिक समानता, महिलाओं की सुरक्षा, अधिकारों और नेतृत्व पर पुरुष निर्वाचित प्रतिनिधियों को प्रशिक्षित करेंगे।
पायलट बैच में छह राज्यों असम, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा और उत्तराखंड के लगभग 40 कुशल प्रशिक्षक शामिल थे। मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि यह बैच एक ऐसे ट्रेनिंग मॉडल की नींव का काम करेगा, जिसे बाद में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बढ़ाया जाएगा।
पंचायती राज मंत्रालय के सचिव विवेक भारद्वाज ने उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और समान भागीदारी सुनिश्चित किए बिना ‘विकसित भारत’ का विजन पूरा नहीं किया जा सकता। उन्होंने सामाजिक और लोकतांत्रिक बदलाव लाने वाली संस्थाओं के तौर पर पंचायतों की अहम भूमिका पर प्रकाश डाला।
निर्भय चेतना के उद्देश्य पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि यह पहल महिलाओं की गरिमा, सुरक्षा और अवसरों को विकास के जरूरी स्तंभों के रूप में स्थापित करके लैंगिक संवेदनशीलता को बढ़ावा देना चाहती है।
प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए पंचायती राज मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव सुशील कुमार लोहानी ने इस बात पर बल दिया कि महिलाओं की सुरक्षा और गरिमा सुनिश्चित करना एक सामूहिक सामाजिक जिम्मेदारी है। उन्होंने लैंगिक रूप से संवेदनशील शासन को बढ़ावा देने और महिलाओं और लड़कियों के लिए एक सुरक्षित और अधिक अनुकूल वातावरण बनाने में पंचायतों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि ‘निर्भय चेतना’ का उद्देश्य पुरुष निर्वाचित प्रतिनिधियों में जागरूकता, संवेदनशीलता और जवाबदेही का निर्माण करना है, जिससे वे अपने समुदायों में महिलाओं की सुरक्षा, गरिमा, नेतृत्व और सशक्तिकरण के लिए काम कर सकें।
इस कार्यक्रम में लैंगिक मुद्दों की गहरी समझ विकसित करने, सामाजिक रूढ़ियों को चुनौती देने और लैंगिक रूप से संवेदनशील नेतृत्व को बढ़ावा देने के लिए विशेषज्ञ सत्रों, समूह चर्चाओं, केस स्टडी और अनुभवात्मक शिक्षण के माध्यम से सहभागी दृष्टिकोण अपनाया गया। प्रमुख विषयों में सकारात्मक पुरुषत्व, सामुदायिक भागीदारी और महिलाओं की सुरक्षा, गरिमा और समावेश को बढ़ावा देने में पंचायतों की भूमिका शामिल थी।
बता दें कि ‘निर्भय चेतना’ 11 मार्च को शुरू की गई ‘निर्भय रहो’ पहल का एक अहम हिस्सा है, जिसमें तीन पूरक घटक शामिल हैं। ‘निर्भय नेत्री’ निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों की क्षमता निर्माण और कानूनी जागरूकता पर केंद्रित है, ‘निर्भय चेतना’ का उद्देश्य निर्वाचित पुरुष प्रतिनिधियों को लैंगिक समानता और महिलाओं की सुरक्षा के प्रति संवेदनशील बनाना है और ‘निर्भय दृष्टि’ के अंतर्गत पंचायतों में प्रौद्योगिकी-आधारित सुरक्षा अवसंरचना को मजबूत करने के लिए रणनीतिक ग्रामीण स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने की परिकल्पना की गई है।
‘निर्भय चेतना’ के तहत देशभर में 17.5 लाख से अधिक पुरुष निर्वाचित प्रतिनिधियों तक पहुंचने के लिए राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर 28,500 मास्टर ट्रेनरों का एक कैडर तैयार किया जा रहा है।
–आईएएनएस
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