आरएसएस पर प्रतिबंध लगाकर सरदार पटेल ने किया था शानदार काम : संदोष कुमार

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नई दिल्ली, 31 अक्टूबर (आईएएनएस)। सीपीआई सांसद पी. संदोष कुमार ने गृह मंत्री अमित शाह के सरदार पटेल वाले बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि वो ऐसे बयानों के लिए बदनाम हैं। उन्होंने याद दिलाया कि पटेल नेहरू मंत्रिमंडल के मंत्री थे और महात्मा गांधी की हत्या के बाद आरएसएस पर प्रतिबंध लगाकर शानदार काम किया था। गृह मंत्री अमित शाह के सरदार वल्लभ भाई पटेल वाले बयान पर सीपीआई सांसद पी संदोष ने कहा, “वो ऐसे बयान देने के लिए बदनाम हैं। क्या भाजपा ने उन्हें इस देश का मंत्री बनाया था? सरदार पटेल नेहरू मंत्रिमंडल में एक…

नई दिल्ली, 31 अक्टूबर (आईएएनएस)। सीपीआई सांसद पी. संदोष कुमार ने गृह मंत्री अमित शाह के सरदार पटेल वाले बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि वो ऐसे बयानों के लिए बदनाम हैं। उन्होंने याद दिलाया कि पटेल नेहरू मंत्रिमंडल के मंत्री थे और महात्मा गांधी की हत्या के बाद आरएसएस पर प्रतिबंध लगाकर शानदार काम किया था।

गृह मंत्री अमित शाह के सरदार वल्लभ भाई पटेल वाले बयान पर सीपीआई सांसद पी संदोष ने कहा, “वो ऐसे बयान देने के लिए बदनाम हैं। क्या भाजपा ने उन्हें इस देश का मंत्री बनाया था? सरदार पटेल नेहरू मंत्रिमंडल में एक प्रतिष्ठित मंत्री थे। इसके पीछे कौन था? क्या वे बीजेपी के उम्मीदवार थे? क्या वे संघ परिवार के उम्मीदवार थे? इससे भी अहम बात यह है कि महात्मा गांधी की हत्या के तुरंत बाद आरएसएस पर प्रतिबंध लगाकर सरदार पटेल ने शानदार काम किया था। अमित शाह सरदार वल्लभभाई पटेल को लेकर इस तरह का औचित्य कैसे ठहरा सकते हैं?”

उन्होंने कहा कि ये लोग बेहद हताश हैं और इतिहास में कुछ भी नहीं ढूंढ पा रहे हैं। वे भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का हिस्सा नहीं थे। इसीलिए उन्होंने चुनिंदा लोगों को अपनाने की नीति शुरू की। इसलिए महात्मा गांधी उन्हें स्वीकार्य नहीं हैं। जवाहरलाल नेहरू उन्हें स्वीकार्य नहीं हैं। तो जाहिर है, वे सरदार वल्लभभाई पटेल को अपना व्यक्ति बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

सीपीआई सांसद ने कहा कि इतिहास पूरी तरह उनके खिलाफ है। मुद्दा यह है कि सरदार वल्लभभाई पटेल कांग्रेस के सदस्य थे। बेशक, किसी पार्टी में मतभेद हो सकते हैं। इसका भाजपा से कोई लेना-देना नहीं है। इसलिए आरएसएस पर प्रतिबंध लगाने में पटेल सही थे।

एक अन्य सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि 2025 से इंडिया गठबंधन के दल ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और एसआईआर वापस लेने की मांग कर रहे हैं। यह एक और कदम है। कई विरोध मार्च निकाले गए और हमने भारत के राष्ट्रपति के समक्ष भी अपील की तथा भारत के सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की। इसलिए हम राजनीतिक और कानूनी तौर पर हरसंभव तरीका अपना रहे हैं। यह हमारी राजनीतिक लड़ाई का हिस्सा है और चुनाव आयोग को बड़े पैमाने पर बेनकाब करने का प्रयास भी है।

डीएमके प्रवक्ता टीकेएस एलंगोवन ने कहा कि महंगाई बढ़ रही है। सभी चीजों के दाम, खासकर खाद्य पदार्थों के दाम बढ़ रहे हैं। लोग परेशान हैं। इन सब बातों पर यह सरकार चुप है। वे सिर्फ डीएमके पर हमला करना चाहते हैं, तमिलनाडु के लोगों का कोई भला नहीं करना चाहते। इसी वजह से हम आंदोलन कर रहे हैं। आंदोलन का आह्वान केवल महिला मोर्चे ने किया क्योंकि सबसे ज्यादा पीड़ित महिलाएं ही हैं।

गृह मंत्री अमित शाह के बयान को लेकर उन्होंने कहा कि इस सरकार ने देश को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है। देश आर्थिक रूप से बर्बाद हो गया है। देश बहुत कमजोर हो गया है। डॉलर के दाम बढ़ गए हैं, जिसका मतलब है कि भारतीय मुद्रा का मूल्य गिर गया है। कोई विकास नहीं हो रहा औऔर लोग परेशान हैं। वे राज्यों के अधिकार छीन रहे हैं। राज्यों का राजस्व छीन रहे हैं। फिर भी वे अच्छी स्थिति में नहीं हैं। इसलिए 2014 से उन्होंने जो प्रशासन चलाया है, वह न तो लोगों के हित में है और न ही देश के विकास के हित में है।

–आईएएनएस

केके/पीएम

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IANS Agency

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