CAA विरोध को भड़काने वाले IS से जुड़े दंपति ने जमानत के लिए खटखटाया कोर्ट का दरवाजा

Summary :

जहानजेब सामी और हिना बशीर बेग को 8 मार्च को कथित रूप से देशद्रोही नारे लगाने, और सोशल और अंतर्राष्ट्रीय मीडिया में हाईलाइट करने के लिए, सरकार के खिलाफ मुसलमानों को उकसाने के लिए सीएए विरोध प्रदर्शनों का इस्तेमाल करने की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

2020 में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के खिलाफ कथित रूप से विरोध प्रदर्शन के लिए गिरफ्तार किए गए जम्मू-कश्मीर के एक दंपति ने मामले में जमानत की मांग करते हुए दिल्ली की एक अदालत का दरवाजा खटखटाया है। दंपति के इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रोविंस (आईएसकेपी) से संबंध है। 
उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी भूमिका को पुख्ता तौर पर साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं है। जहानजेब सामी और हिना बशीर बेग को 8 मार्च को कथित रूप से देशद्रोही नारे लगाने, और सोशल और अंतर्राष्ट्रीय मीडिया में हाईलाइट करने के लिए, सरकार के खिलाफ मुसलमानों को उकसाने के लिए सीएए विरोध प्रदर्शनों का इस्तेमाल करने की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। 
जांच एजेंसियों ने कहा था कि मुसलमानों को भड़काने में नाकाम रहने की सूरत में वे सरकारी इमारतों और सार्वजनिक संपत्ति को आग के हवाले करने की योजना बना रहे थे ताकि दंगे हो सके और वे मुसलमानों की भावनाओं का फायदा उठा सकें। उनकी गिरफ्तारी के लगभग एक साल बाद, उन्होंने जमानत की अर्जी दी, जिसमें कहा गया, “इस दावे को पुष्ट करने के लिए कोई सबूत नहीं है कि आरोपी आईएसआईएस का सदस्य था या समान विचारधारा वाले लोगों को उकसा रहा था या भर्ती कर रहा था या आईएसआई के गुर्गों के संपर्क में था।” 
जमानत याचिका को वकील कौसर खान और एम.एम. खान ने पेश किया। इसमें कहा गया कि सोशल मीडिया पर पोस्ट करने वाली सामग्री को विचारधारा के प्रति झुकाव के रूप में लिया जा सकता है लेकिन यह इस बात का संकेत नहीं है कि आरोपी ने संगठन के मकसद को पूरा करने के लिए हिंसा के रास्ते की ओर कदम बढ़ाया। इसमें कहा गया आईएसआईएस पर किसी भी साहित्य या पढ़ने की सामग्री को रखने और वीडियो देखना, अभियुक्तों के खिलाफ कुछ भी प्रतिकूल साबित नहीं करता है। यह तभी प्रतिकूल हो जाता है जब हिंसा को भड़काने के लिए अभियुक्त की ओर से कोई काम किया गया होता। 
याचिका में कहा गया है कि किताबें और वीडियो पब्लिक डोमेन में भी उपलब्ध हैं और कोई भी उन तक आसानी से पहुंच सकता है। नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (सीएए) समर्थकों और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसा के बाद 24 फरवरी, 2020 को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में झड़पें हुईं और कम से कम 53 लोगों की मौत हो गई और लगभग 200 लोग घायल हुए थे। इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रोविंस (आईएसकेपी) एक प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन और आईएसआईएस का हिस्सा है। खुरासान, इस्लामिक स्टेट के मध्य एशियाई प्रांत को संदर्भित करता है। 
सितंबर में राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने युवाओं को सीएए के खिलाफ प्रभावी ढंग से विरोध करने के लिए उकसाने को लेकर इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रोविंस मामले में एक कश्मीरी दंपति समेत पांच आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी। चार्जशीट में, एनआईए ने जहानजेब सामी वानी और उसकी पत्नी हिना बशीर बेग, (दोनों जम्मू-कश्मीर के निवासी) हैदराबाद के अब्दुल्ला बासित, सादिया अनवर शेख, और नबील सिद्दीक खत्री (दोनों पुणे के निवासी) को नामजद किया था। 

Desk Team