मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पिछले दिनों से काफी चर्चा में है। इस सीट पर उपचुनाव होने हैं। इसी बीच उपचुनाव से ठीक पहले बीजेपी ने एक बड़ा दांव खेलते हुए अपने सबसे भरोसेमंद नेता और पूर्व मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को ही साइड लाइन कर दूसरे युवक को चुनावी मैदान में उतार दिया। इसी वजह से पार्टी में कलह शुरू है। पार्टी ने इस सीट से आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया है।
जैसे ही पार्टी की तरफ से ये घोषणा हुई, उसके बाद पार्टी के स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं में नाराजगी खुलकर सामने आ गई। जबरदस्त नाराजगी जाहिर करते हुए समर्थकों ने दतिया की सड़कों पर हंगामा किया। पुलिस हरकत में आई, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच झड़प हो गई; इसमें कई पुलिस अधिकारी घायल हुए और कई बीजेपी कार्यकर्ता भी चोटिल हुए। ऐसे में उपचुनाव से पहले दतिया की राजनीति गरमा गई है।
सड़क पर उतरे समर्थक और जिला कार्यकारिणी ने दिया इस्तीफा

बता दें कि पार्टी की तरफ से टिकट बदलने के फैसले के बाद नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों ने कई जगहों पर जमकर प्रदर्शन किया। बीच सड़क पर उतरकर नारेबाजी हुई और जाम जैसी स्थिति भी देखने को मिली। वहीं बीजेपी के जिला अध्यक्ष सहित पूरी जिला कार्यकारिणी ने सामूहिक इस्तीफा सौंप दिया। जिला नेतृत्व ने बीजेपी पर आरोप लगाया कि उम्मीदवार तय करते समय स्थानीय संगठन की बात नहीं सुनी गई। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं को हमेशा साइड कट कर दिया जा रहा था।
दिल्ली तक पहुंचेगा मामला
दूसरी तरफ, नाराज नेताओं ने पार्टी हाई कमान को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने कहा है कि यदि इस दौरान उम्मीदवार बदलकर फिर से डॉ. नरोत्तम मिश्रा को चुनावी मैदान में नहीं उतारा जाएगा, तो वे सिर्फ पद ही नहीं बल्कि पार्टी से ही इस्तीफा दे देंगे। पार्टी सूत्रों के अनुसार, समर्थकों का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द दिल्ली जाएगा और वहां पार्टी के शीर्ष नेताओं से मुलाकात कर इस मामले पर बात कर सकता है। दतिया का मामला अब प्रदेश की राजनीति में बड़ा बदलाव को बता रहा है।
पूरा विवाद क्या है?

बताते चले कि एमपी दतिया विधानसभा सीट पर 30 जुलाई को उपचुनाव होने हैं। इस चुनाव के लिए बीजेपी ने आशुतोष तिवारी को अपना उम्मीदवार बनाया, जबकि नरोत्तम मिश्रा लंबे समय से इस सीट से चुनावी मैदान में अपना कब्जा जमा चुके थे। ऐसे में पार्टी के टिकट बदलने के फैसले से उनके समर्थकों में भारी नराजगी है। उनका मानना है कि सालों से संगठन के लिए काम करने वालों को पार्टी की तरफ से साइड कट किया गया है। फिलहाल पार्टी की तरफ से विरोध को लेकर कोई बड़ा आधिकारिक बयान नहीं आया है।























