Breaking! गोवा कंज्यूमर कोर्ट ने OLA इलेक्ट्रिक के CEO भाविश अग्रवाल के खिलाफ किया गिरफ्तारी वारंट जारी, जानें क्या है मामला

Arrest Warrant to Bhavish Aggarwal

Arrest Warrant to Bhavish Aggarwal : दक्षिण गोवा जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने ओला इलेक्ट्रिक टेक्नोलॉजीज के संस्थापक और CEO भाविश अग्रवाल के खिलाफ जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। बता दें वे पूर्व सूचना के बावजूद आयोग के समक्ष पेश नहीं हुए थे।

13 फरवरी को जारी वारंट में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 73 के तहत बेंगलुरु के कोरमंगला पुलिस स्टेशन को अग्रवाल को गिरफ्तार करने और 23 फरवरी को सुबह 10:30 बजे आयोग के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया गया है।

यह मामला मोरमुगाओ के चिकालिम निवासी प्रितेश चंद्रकांत घड़ी की शिकायत से जुड़ा है, जिन्होंने अगस्त 2023 में 1,47,499 रुपये में ओला एस 1 प्रो सेकंड जेनेरेशन स्कूटर खरीदा था।

शिकायतकर्ता ने मोटर की आवाज, टचस्क्रीन की खराबी और ब्लूटूथ कनेक्टिविटी की समस्याओं सहित बार-बार होने वाली समस्याओं का आरोप लगाया है। स्कूटर को मरम्मत के लिए ओला इलेक्ट्रिक के वास्को सेवा केंद्र में सौंपा गया था, लेकिन उसका अभी तक पता नहीं चल पाया है।

Arrest Warrant to Bhavish Aggarwal : क्या है मामला

दरअसल, ओला इलेक्ट्रिक के खिलाफ प्रीतिश चंद्रकांत घाड़ी नामक एक ग्राहक ने शिकायत की थी. उन्होंने अगस्त 2023 में ओला एस1 प्रो सेकंड जेन स्कूटर ₹1.47 लाख में खरीदा था। स्कूटर खरीदने के थोड़े समय बाद ही स्कूटर के मोटर से अजीब आवाज आने लगी और टचस्क्रीन ठीक से काम नहीं कर रही थी। इसे ठीक करने के लिए उन्होंने वास्को (गोवा) में ओला के डीलर को दिया लेकिन काफी समय बीत जाने के बाद भी स्कूटर का पता नहीं चला। कंपनी से कई बार संपर्क करने पर कोई जवाब नहीं मिला।

सेवा में लापरवाही से जुड़ा मामला

20 जनवरी 2026 को सुनवाई में आयोग ने कहा कि स्कूटर का पता नहीं चल रहा है, इसलिए ओला इलेक्ट्रिक के सीईओ भाविश अग्रवाल को खुद पेश होकर बताना चाहिए कि स्कूटर कहां है और ग्राहक को स्कूटर क्यों नहीं लौटाया गया। उन्हें 4 फरवरी को पेश होने को कहा गया था लेकिन वह आयोग के सामने हाजिर नहीं हुई। इसलिए आयोग ने जमानती वारंट जारी किया।

वारंट के मुताबिक, बेंगलुरु पुलिस को भाविश अग्रवाल को गिरफ्तार करके 23 फरवरी 2026 को सुबह 10:30 बजे मार्गाव (दक्षिण गोवा) में आयोग के सामने पेश करना है। चूंकि यह जमानती वारंट है, इसलिए वे ₹1.47 लाख का बॉन्ड और एक जमानतदार देकर रिहा हो सकते हैं। यह राशि स्कूटर की कीमत के बराबर है।

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