Raju P Puthran Inspirational Story : उडुपी से मुंबई तक अपने संघर्ष व सेवा का सफर तय कर राजू पी पुथरन व सारस्वती पुथरन की जोड़ी ने समाज सेवा के क्षेत्र में अपनी गहरी छाप छोड़ी। शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में मिसाल बने सरस्वती फाउंडेशन के तहत राजू पी पुथरन की मेहनत ने कई लोगों के जीवन को बदला। उन्होंने अपने किए कामों से उम्मीद की रौशनी जगाई और हजारों लोगों के लिए प्रेरणादायक बने. भले वे हमारे बीच नहीं मगर उनकी शादी की सालगिरह के रूप में हमेशा याद किए जाते रहेंगे.
कर्नाटक में सरस्वती फाउंडेशन की नीव

राजू पी. पुथरन ने कर्नाटक में सरस्वथी फाउंडेशन की स्थापना एक छोटे सामाजिक प्रयास के रूप में की थी। शुरुआत में यह संस्था सीमित संसाधनों के साथ काम कर रही थी, लेकिन उनकी दूरदर्शिता और ईमानदार प्रयासों से यह धीरे-धीरे एक मजबूत सामाजिक संगठन बन गई।
उनका मानना था कि जब तक समाज के अंतिम व्यक्ति तक सहायता नहीं पहुँचती, तब तक कोई भी विकास अधूरा है। इसी सोच के साथ उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और जरूरतमंदों की मदद के कई कार्यक्रम शुरू किए। इन प्रयासों से हजारों लोगों को राहत मिली और कई परिवार आत्मनिर्भर बनने में सफल हुए।
राजू पी. पुथरन की सेवा केवल कर्नाटक तक सीमित नहीं रही। मुंबई में भी उन्होंने सामाजिक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने राम मंदिर से जुड़े कार्यों में सहयोग किया और नवदुर्गा सेवा समिति के कोषाध्यक्ष के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली।
इस पद पर रहते हुए उन्होंने संस्था की आर्थिक व्यवस्था को मजबूत किया और समाज के लिए चलने वाली गतिविधियों को आगे बढ़ाया। गरीबों की सहायता, धार्मिक कार्यक्रमों और सामाजिक आयोजनों में उनका योगदान हमेशा सराहनीय रहा।
Raju P Puthran Inspirational Story : सेवा को बनाया जीवन का उद्देश्य
राजू पी. पुथरन के लिए समाज सेवा कोई औपचारिक काम नहीं थी, बल्कि यह उनके जीवन का मूल उद्देश्य थी। वे हर जरूरतमंद की मदद को अपना कर्तव्य मानते थे। चाहे किसी गरीब परिवार को सहारा देना हो या बच्चों की पढ़ाई में मदद करनी हो, वे हमेशा आगे रहते थे।
उनकी यही सोच उन्हें एक साधारण व्यक्ति से समाज का मार्गदर्शक बनाती है। उन्होंने लोगों को सिर्फ सहायता ही नहीं दी, बल्कि उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा भी दी।
आज भी लोगों के दिलों में जीवित
आज उनकी सालगिरह है. इस मौके पर पर सरस्वथी फाउंडेशन से जुड़े लोग, सामाजिक कार्यकर्ता और आम नागरिक उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। उनके द्वारा किए गए कार्य आज भी समाज में बदलाव ला रहे हैं।
राजू पी. पुथरन भले ही हमारे बीच शारीरिक रूप से मौजूद नहीं हैं, लेकिन उनकी सोच, उनका संघर्ष और उनकी सेवा भावना आज भी लोगों को प्रेरित कर रही है। उनका जीवन हमें सिखाता है कि सच्ची खुशी दूसरों की मदद करने में ही है।
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