PGI Chandigarh STS 2026 Conference: पीजीआईएमआर (PGIMER) चंडीगढ़ का रीनल ट्रांसप्लांट सर्जरी विभाग आगामी 19 से 21 मार्च तक ‘इंडियन सोसाइटी ऑफ ट्रांसप्लांट सर्जन्स’ के दूसरे वार्षिक सम्मेलन ‘STS-2026’ की गौरवशाली मेजबानी कर रहा है। चिकित्सा जगत का यह महाकुंभ अंग प्रत्यारोपण की पारंपरिक सीमाओं को तोड़कर एक नई दिशा तय करने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है, जिसमें तकनीकी नवाचार और सामाजिक सरोकार का अनूठा संगम देखने को मिलेगा।
पैन्क्रियाज ट्रांसप्लांट बना बच्चों के लिए वरदान

सम्मेलन की तैयारियों और इसके महत्व पर प्रकाश डालते हुए विभाग के विभागाध्यक्ष (Head of Department) प्रोफेसर आशीष शर्मा ने कहा कि आज के दौर में प्रत्यारोपण केवल एक जटिल सर्जरी नहीं, बल्कि समय की मांग बन चुका है। उन्होंने साझा किया कि भारत ने इस क्षेत्र में अभूतपूर्व कामयाबी हासिल की है और वर्तमान में अंग प्रत्यारोपण की सफलता दर लगभग 99 प्रतिशत तक पहुँच गई है।
प्रोफेसर शर्मा ने विशेष रूप से ‘पैन्क्रियाज ट्रांसप्लांट’ की चर्चा करते हुए बताया कि यह उन बच्चों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है जो जन्म से ही गंभीर डायबिटीज के कारण कभी मीठा नहीं खा पाते। सफल प्रत्यारोपण के बाद ऐसे बच्चे बिल्कुल सामान्य जीवन जी सकते हैं और बिना किसी हिचकिचाहट के शुगर या चॉकलेट का आनंद ले सकते हैं।
PGI Chandigarh STS 2026 Conference: गरीब मरीजों के लिए बड़ी उम्मीद: सस्ता होगा ट्रांसप्लांट
प्रोफेसर आशीष शर्मा ने यह भी जानकारी दी कि ट्रांसप्लांट को आम आदमी के लिए सुलभ और किफायती बनाने के लिए सरकार को एक अहम प्रस्ताव भेजा गया है। उन्होंने मांग की है कि किडनी ट्रांसप्लांट की तरह ही अन्य सभी प्रकार के अंगों के प्रत्यारोपण को भी ‘आयुष्मान भारत योजना’ के अंतर्गत पूरी तरह कवर किया जाए। इस पहल से आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए विश्वस्तरीय इलाज के दरवाजे खुल सकेंगे।
इस तीन दिवसीय कार्यक्रम की वैश्विक भागीदारी इसे और भी खास बनाती है, जहाँ अमेरिका और यूरोप के विख्यात ट्रांसप्लांट सर्जन और शोधकर्ता रोबोटिक ट्रांसप्लांट सर्जरी और न्यूनतम इनवेसिव तकनीकों जैसी भविष्य की प्रणालियों पर मंथन करेंगे। पीजीआई के विशेषज्ञ इन तकनीकों के माध्यम से न केवल नई पीढ़ी के सर्जनों का कौशल विकास करेंगे, बल्कि समाज में अंगदान के प्रति व्याप्त झिझक को दूर करने के लिए भी ठोस रणनीति तैयार करेंगे। उत्तर भारत के अग्रणी संस्थान के रूप में पीजीआई अपनी दशकों की विशेषज्ञता के जरिए देश में ट्रांसप्लांट की प्रतीक्षा सूची को कम करने और हजारों जिंदगियों को नई उम्मीद देने के लिए पूरी तरह तैयार है।





















