Punjab Groundwater Uranium: पंजाब में भूजल की गुणवत्ता को लेकर संसद में पेश किए गए आंकड़ों ने राज्य के लिए चिंता खड़ी कर दी है। इन आंकड़ों के अनुसार, राज्य में यूरेनियम से प्रभावित भूजल के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पिछले कुछ सालों में सुरक्षित सीमा से अधिक यूरेनियम वाले सैंपल की संख्या काफी बढ़ी है, जो लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए चिंता का विषय है।
Punjab Groundwater Uranium: तेजी से बढ़ रहा यूरेनियम प्रदूषण
ताजा आंकड़ों के मुताबिक, साल 2019 में पंजाब के 24.2 फीसदी भूजल नमूनों में यूरेनियम की मात्रा तय सीमा से अधिक पाई गई थी। यह आंकड़ा 2022 में 33.7 फीसदी और 2023 में 32.6 फीसदी रहा। वहीं 2024 में यह बढ़कर 53.04 फीसदी तक पहुंच गया है। यानी पिछले छह साल में यह संख्या दोगुने से भी ज्यादा हो गई है।
जांच में सामने आए चौंकाने वाले तथ्य
राज्यसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, साल 2024 में पंजाब के 296 भूजल नमूनों की जांच की गई। इनमें से 53.04 फीसदी नमूनों में यूरेनियम का स्तर विश्व स्वास्थ्य मानकों से ज्यादा पाया गया। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और एनवायरनमेंटल प्रोटेक्शन एजेंसी (EPA) के अनुसार, पानी में यूरेनियम की सुरक्षित सीमा 30 पार्ट्स पर बिलियन (ppb) तय की गई है।
केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया
केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने अपने लिखित जवाब में बताया कि यह बढ़ोतरी चिंताजनक जरूर है, लेकिन इसके पीछे एक कारण यह भी है कि अब जांच अधिक संवेदनशील और लक्षित क्षेत्रों में की जा रही है। सरकार ने 2023 में नए प्रोटोकॉल के तहत कुछ इलाकों को ‘हॉटस्पॉट’ के रूप में चिन्हित किया था, जहां प्रदूषण की आशंका ज्यादा थी।
इसलिए इन आंकड़ों का मतलब यह नहीं है कि पूरे पंजाब का भूजल एक समान रूप से दूषित है। सरकार के मुताबिक, भूजल में यूरेनियम की मौजूदगी का मुख्य कारण प्राकृतिक है। यह समस्या इलाके की भू-वैज्ञानिक बनावट और स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों से जुड़ी हुई है।
अन्य राज्यों की तुलना में पंजाब की स्थिति गंभीर
राष्ट्रीय स्तर पर भी यूरेनियम प्रदूषण के मामलों में वृद्धि हुई है। साल 2019 में जहां पूरे देश में 3 फीसदी नमूनों में यूरेनियम अधिक पाया गया था, वहीं 2024 में यह बढ़कर 6.7 फीसदी हो गया। हालांकि, पंजाब की स्थिति अन्य राज्यों के मुकाबले ज्यादा खराब है।
हरियाणा में भी भूजल प्रदूषण की समस्या देखी गई है, लेकिन वहां हालात कुछ हद तक बेहतर हैं। 2023 में हरियाणा के 18.7 फीसदी नमूने असुरक्षित थे, जो 2024 में घटकर 15 फीसदी रह गए।
किन राज्यों में ज्यादा असर
केंद्रीय भूजल बोर्ड की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब के अलावा हरियाणा, दिल्ली, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में भी यूरेनियम प्रदूषण के मामले सामने आए हैं। हालांकि, देश के अधिकांश राज्यों में स्थिति सामान्य पाई गई है।
पंजाब में भूजल दोहन की गंभीर स्थिति
पंजाब में भूजल का अत्यधिक इस्तेमाल एक बड़ी चिंता बन गया है। यहां पानी का उपयोग उसकी भरपाई (रिचार्ज) क्षमता से काफी ज्यादा हो चुका है। राज्य में यह आंकड़ा करीब 156.4 फीसदी तक पहुंच गया है, जो देश में सबसे अधिक है। इसके बाद राजस्थान में 147.1 फीसदी और हरियाणा में 136.7 फीसदी भूजल दोहन दर्ज किया गया है। वहीं पूरे देश का औसत करीब 60.6 फीसदी है।
प्रमुख आंकड़े
- 2024 में (Unsecured Samples) असुरक्षित नमूने: 53.04%
- 2023 में असुरक्षित नमूने: 32.6%
- 2019 में असुरक्षित नमूने: 24.2%
- सुरक्षित सीमा (WHO/EPA): 30 पीपीबी (ppb)
- राष्ट्रीय औसत (2024): 6.7%
- 2024 में पंजाब में जांचे गए नमूने: 296
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