Fifa के नए बिजनेस प्लान पर UEFA ने किया विरोध, कहा- ‘फुटबॉल की आत्मा बिकाऊ नहीं’

Summary :

फीफा की नई कंपनी फीफा फॉरवर्ड एंटरप्राइज (FFE) बनाने की योजना को लेकर यूईएफए ने कड़ा विरोध जताया है। फीफा इस कंपनी में हिस्सेदारी बेचकर 4.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर जुटाना चाहती है, जिसे 211 सदस्य देशों में बांटा जाएगा। यूईएफए का कहना है कि इस योजना से होने वाले फायदे स्पष्ट नहीं हैं और फुटबॉल को व्यावसायिक संपत्ति की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। संगठन ने जोर देकर कहा कि "फुटबॉल की आत्मा बिकाऊ नहीं है।"

वर्ल्ड फुटबॉल की सुप्रीम बॉडी फीफा की नई कॉमर्शियल प्लानिंग को लेकर अब नया विवाद शुरू हो गया है। फीफा द्वारा फीफा फॉरवर्ड एंटरप्राइज (FFE) नाम की नई कंपनी बनाने की अनाउंसमेंट के बाद यूरोपियन फुटबॉल फेडरेशन (UEFA) ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है। यूईएफए का कहना है कि इस प्लानिंग से खेल को क्या फायदा होगा, यह साफ नहीं है।

क्या है फीफा की नई योजना?

FIFA's New Plan
FIFA’s New Plan (Source: Google)

फीफा अपने कमर्शियल और इवेंट मैनेजमेंट से जुड़े कामों को एक अलग कंपनी के तहत ऑपरेट करना चाहती है। इसके लिए वह FFE में हिस्सेदारी बेचकर लगभग 4.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर जुटाने की प्लानिंग बना रही है। फीफा का कहना है कि इस इन्वेस्टमेंट से मिलने वाला अमाउंट उसके 211 सदस्य देशों के बीच बांटा जाएगा, ताकि वे अपने फुटबॉल डेवेलपमेंट इवेंट और बाकी जरूरतों पर इसका इस्तेमाल कर सकें।

संचालन का नियंत्रण रहेगा फीफा के पास

FIFA Have Control of operations
FIFA Have Control of operations (Source: Google)

प्लानिंग के मुताबिक, फुटबॉल कॉम्पटीशन, मैच कैलेंडर, खेल ऑप्रेशन और खेल से जुड़े सभी महत्वपूर्ण डिसीज़न का अधिकार फीफा के पास ही रहेगा। वहीं, नई कंपनी के कमर्शियल और इवेंट ऑपरेशंस में पर्सनल इन्वेस्टर्स को लिमिटेड हिस्सेदारी दी जाएगी।

UEFA Opposes Fifas New Business Plan: यूईएफए ने जताई गंभीर चिंता

UEFA Opposes Fifas New Business Plan
UEFA Opposes Fifas New Business Plan (Source: Google)

यूईएफए ने इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि यह ऐसा कदम है, जो खेल के फंडामेंटल प्रिंसीपल्स को प्रभावित कर सकता है। संगठन के मुताबिक, इस फैसले के दूरगामी रिजल्ट हो सकते हैं और इसलिए सभी स्टेकहोल्डर—लीग, क्लब, खिलाड़ी, फैंस, सरकारें और फुटबॉल से जुड़े बाकी पार्टीज़ को इसे गंभीरता से लेना चाहिए।

यूईएफए ने अपने बयान में यह भी कहा कि फुटबॉल किसी एक इन्सटीट्यूशन की पर्सनल प्रॉपर्टी नहीं है, इसलिए इसे बिजनेस की हिस्सेदारी के रूप में बेचने का अधिकार किसी के पास नहीं होना चाहिए। संगठन का मानना है कि जब यह साफ नहीं है कि इस प्लानिंग से असल में फाइनेंशियली फायदा किसे मिलेगा, तब तक इस तरह का कदम सही नहीं माना जा सकता।

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Rishabh Pandey

ऋषभ पांडे पिछले पांच साल से पत्रकारिता के फील्ड में काम कर रहे हैं, उन्होंने अपनी शुरुआत Zee News चैनल से की थी, इसके बाद उन्होंने News 24 में पॉलिटिकल, एंटरटेनमेंट न्यूज और क्राइम से जुड़ी खबरें लिखीं और बतौर प्रोड्यूसर भी एंटरटेनमेंट बीट पर काम किया, अब ऋषभ Punjab Kesari में एंटरटेनमेंट और स्पोर्टस बीट पर बतौर Sub Editor (हिंदी में) काम कर रहे हैं।