इंडियन वुमेन्स हॉकी टीम अपकमिंग वर्ल्ड कप की तैयारियों में पूरी तरह जुटी हुई है। टीम के मुख्य कोच स्जोर्ड मारिजने का मानना है कि बड़े टूर्नामेंट में सफलता के लिए फिटनेस सबसे अहम पहलुओं में से एक है। उनका कहना है कि करीबी मुकाबलों में जीत और हार का फैसला अक्सर खिलाड़ियों की फिटनेस से ही होता है, इसलिए फिलहाल टीम इसी फील्ड में सबसे ज्यादा मेहनत कर रही है।
Women’s Hockey Team Coach Marijne Statement: फिटनेस को बनाया प्राइयोरिटी
The Indian Women’s Hockey Team’s story is one of resilience, inspiration and belief. 🇮🇳💙
At the coming FIH World Cup, this team wants to write the finest chapter of its journey since 1974. 🏆
🎥: Select 2 (SD+HD)+ Khel and JioHotstar
🗓️: August 15-30#HockeyIndia… pic.twitter.com/XsQ529gZbU— Hockey India (@TheHockeyIndia) July 23, 2026
मारिजने ने बताया कि खिलाड़ियों को खेल की प्लानिंग की अच्छी समझ है और प्रैक्टिस मैचों के जरिए उन्हें अपनी प्लानिंग को और बेहतर करने का मौका मिलेगा। ऐसे में इस समय सबसे ज्यादा ध्यान फिटनेस के लेवल को अगले लेवल तक पहुंचाने पर दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि टीम हाई-इंटेंसिटी ट्रेनिंग और सफीशिएंट आराम के बीच सही बैलेंस बनाए हुए है। इसके साथ ही मैदान पर बेहतर क्वालिटी वाला प्रदर्शन एन्श्योर करने पर भी काम किया जा रहा है। उनके अनुसार, जितनी बेहतर फिटनेस होगी, टीम का प्रदर्शन भी उतना ही बेहतर होगा।
जर्मनी और नीदरलैंड में होंगे प्रेक्टिस मैच
Our strength and conditioning coaches are so inventive with making the translation from hockey movements to footwork exercises in the warm up. @TheHockeyIndia pic.twitter.com/tLVU6TIM3l
— Sjoerd Marijne (@SjoerdMarijne) July 10, 2026
इंडियन टीम 29 जुलाई को जर्मनी रवाना होगी, जहां वो दो प्रेक्टिस मुकाबले खेलेगी। इसके बाद 2 अगस्त को टीम नीदरलैंड पहुंचेगी। वर्ल्ड कप में 15 अगस्त को चीन के खिलाफ अपने पहले मुकाबले से पहले भारत – चिली, जापान, नीदरलैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीमों के खिलाफ चार प्रैक्टिस मैच खेलेगा।
एशियन गेम्स और वर्ल्ड कप दोनों की अलग चुनौती

वर्ल्ड कप के करीब दो महीने बाद इंडियन टीम एशियन गेम्स में हिस्सा लेगी, जहां ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करने का मौका होगा। हालांकि, मारिजने का मानना है कि दोनों टूर्नामेंट की सिचुएशन और चुनौतियां पूरी तरह अलग हैं।
उन्होंने कहा कि एशियाई टीमों का प्लेइंग स्टाइल यूरोपीय और दक्षिण अमेरिकी टीमों से काफी अलग होता है। एशियन गेम्स में खेल ज्यादा तेज और अनएक्सपैक्टेड होता है, इसलिए टीम को उसके अनुसार खुद को तैयार करना होगा। साथ ही उन्होंने कहा कि दोनों कॉम्पटीशन का एक-दूसरे पर कोई नेगेटीव असर नहीं पड़ेगा।
मजबूत टीमों के खिलाफ मौके भुनाना होगा जरूरी

मारिजने ने माना कि नीदरलैंड्स फिलहाल दुनिया की सबसे मजबूत टीमों में से एक है, लेकिन इंटरनेशनल हॉकी में कोई भी टीम किसी को भी हरा सकती है। उन्होंने कहा कि टॉप टीमों के खिलाफ मौके कम मिलते हैं, इसलिए जो मौके मिलें, उन्हें गोल में बदलना बेहद जरूरी है। इसी पहलू पर इंडियन टीम लगातार मेहनत कर रही है ताकि वर्ल्ड कप में बेहतर प्रदर्शन किया जा सके।



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