Bhupesh Baghel on Women Reservation Bill : रायपुर में पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय महासचिव भूपेश बघेल ने केंद्र सरकार पर तीखा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जनहित के मुद्दों और अपनी विफलताओं से ध्यान हटाने के लिए भाजपा महिला आरक्षण का मुद्दा उछाल रही है। उन्होंने सिलेंडर की कमी, पेट्रोल-डीजल, खाद-बीज की उपलब्धता, बढ़ती महंगाई और अन्य मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार की साख गिर चुकी है और अब जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश हो रही है।
2023 में पास हो चुका है महिला आरक्षण कानून
भूपेश बघेल ने कहा कि महिला आरक्षण बिल यानी ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023’ पहले ही संसद के दोनों सदनों से पारित हो चुका है और राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू की मंजूरी के बाद यह कानून बन चुका है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कानून बन चुका है तो इसे लागू क्यों नहीं किया जा रहा। उनके मुताबिक, इसी आधार पर तुरंत आरक्षण लागू किया जा सकता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि 16 अप्रैल 2026 को पेश किया गया 131वां संविधान संशोधन विधेयक महिला आरक्षण से सीधे जुड़ा नहीं है। उनका कहना है कि भाजपा महिला आरक्षण को “मुखौटा” बनाकर परिसीमन संशोधन बिल और केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन बिल को पास करवाना चाहती है।
33% आरक्षण तुरंत लागू करने की मांग
भूपेश बघेल ने कहा कि अगर सरकार सच में महिला आरक्षण लागू करना चाहती है, तो परिसीमन का इंतजार किए बिना मौजूदा सीटों में ही 33 प्रतिशत आरक्षण दे सकती है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस समेत सभी विपक्षी दल इसके लिए तैयार हैं।
उन्होंने कहा कि भाजपा का प्रस्तावित परिसीमन छोटे राज्यों, खासकर छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों के लिए नुकसानदेह हो सकता है। उनके अनुसार, यह प्रक्रिया राजनीतिक लाभ को ध्यान में रखकर की जा रही है।
लागू क्यों नहीं किया कानून
भूपेश बघेल ने कहा कि सरकार चाहती तो 2023 के महिला आरक्षण बिल नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन कर महिला आरक्षण को तुरंत तुरंत लागू कर सकती थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। उन्होंने बताया कि मौजूदा कानून के अनुसार यह 2034 से लागू होगा, जबकि संशोधन के जरिए इसे तुरंत प्रभावी बनाया जा सकता था।
महिलाओं को आरक्षण कांग्रेस नीतियों से संभव
पूर्व मुख्यमंत्री, राष्ट्रीय महासचिव भूपेश बघेल ने कहा कि पंचायतों एवं स्थानीय निकायों में महिलाओं को आरक्षण मिल रहा तो यह भी कांग्रेस की नीतियों से संभव हो पाया। सबसे पहले राजीव गांधी ने 1989 के मई महीने में पंचायतों और नगरपालिकाओं में महिलाओं के एक तिहाई आरक्षण के लिए संविधान संशोधन विधेयक पेश किया। वह विधेयक लोकसभा में पारित हो गया था लेकिन सितंबर 1989 में राज्यसभा में पास नहीं हो सका।
अप्रैल 1993 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव ने पंचायतों और नगरपालिकाओं में महिलाओं के एक तिहाई आरक्षण के लिए संविधान संशोधन विधेयक को फिर से पेश किया। दोनों विधेयक पारित हुए और कानून बन गए। महिलाओं के लिए संसद और राज्यों की विधानसभाओं में एक तिहाई आरक्षण के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह संविधान संशोधन विधेयक लाए।
विधेयक 9 मार्च 2010 को राज्यसभा में पारित हुआ। कांग्रेस की सरकारों के प्रयास से ही आज देशभर में पंचायतों और नगरपालिकाओं में 15 लाख से अधिक निर्वाचित महिला प्रतिनिधि हैं। सीटों के परिसीमन का भाजपा का षड़यंत्र विफल हो गया है, अतः वह महिला आरक्षण के नाम पर पूरे देश में भ्रम फैला रही है।
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