‘हमने पहले ही आगाह किया था…’, गैस ठिकानों पर ईरान के हमले से हिले कतर CEO, ट्रंप को जमकर लगाई फटकार

Middle East Energy Crisis

Middle East Energy Crisis: मिडिल ईस्ट में तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। इजरायल ने अमेरिका के समर्थन से बुधवार रात दुनिया के सबसे बड़े गैस फील्ड साउथ पार्स पर हमला कर दिया। यह गैस फील्ड ईरान और कतर के बीच साझा संसाधन है। इस हमले के बाद ईरान ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए खाड़ी के कई देशों के ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाया, जिससे पूरे क्षेत्र में ऊर्जा संकट की आशंका गहरा गई।

Middle East Energy Crisis: ईरान ने कई देशों के ऊर्जा ठिकाने को बनाया निशाना

Middle East Energy Crisis
Middle East Energy Crisis (Source: Social Media)

साउथ पार्स पर हमले के कुछ घंटों के भीतर ही ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए कतर, सऊदी अरब, यूएई और कुवैत के तेल और गैस ठिकानों पर मिसाइल हमले किए। इन हमलों में सबसे ज्यादा नुकसान कतर को हुआ, खासकर उसके रास लाफान क्षेत्र को, जो दुनिया का सबसे बड़ा एलएनजी (LNG) हब माना जाता है। रास लाफान में स्थित गैस रिफाइनरी और निर्यात केंद्रों को भारी क्षति पहुंची है। यह क्षेत्र वैश्विक ऊर्जा सप्लाई का अहम केंद्र है, जहां से बड़ी मात्रा में गैस यूरोप और एशिया को भेजी जाती है।

कतर एनर्जी के प्रमुख की चेतावनी सच साबित हुई

साद अल-काबी, जो कतरएनर्जी के सीईओ और कतर के ऊर्जा मंत्री भी हैं, उन्होंने पहले ही इस तरह के खतरे की चेतावनी दी थी। उनका कहना है कि अगर ईरान के गैस ठिकानों पर हमला होगा तो उसका जवाब पूरे क्षेत्र को झेलना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि उन्होंने कई बार अमेरिकी अधिकारियों और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कंपनियों को इस खतरे के बारे में आगाह किया था। कतरएनर्जी के साझेदारों में ExxonMobil और ConocoPhillips जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं।

Middle East Energy Crisis: बिना चेतावनी के हुआ हमला

Middle East Energy Crisis (1)
Middle East Energy Crisis (Source: Social Media)

अल-काबी के अनुसार, ईरानी हमलों से हुए नुकसान को ठीक करने में 3 से 5 साल तक का समय लग सकता है। खास तौर पर रास लाफान में मौजूद एलएनजी प्लांट को भारी नुकसान हुआ है। उन्होंने बताया कि गैस को ठंडा करके तरल रूप में बदलने वाली प्रमुख यूनिट, जिसे “कोल्ड बॉक्स” कहा जाता है, पूरी तरह नष्ट हो गई है। यह एलएनजी उत्पादन की सबसे महत्वपूर्ण तकनीकी इकाई होती है। कतरएनर्जी के कुल 14 कोल्ड बॉक्स में से 2 बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिससे उत्पादन क्षमता पर बड़ा असर पड़ा है।

वैश्विक गैस सप्लाई पर असर

इस हमले का असर केवल खाड़ी देशों तक सीमित नहीं रहेगा। अल-काबी ने कहा कि यूरोप और एशिया को गैस की सप्लाई आने वाले 5 साल तक प्रभावित हो सकती है। रास लाफान से होने वाला निर्यात वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। कतर की एलएनजी निर्यात क्षमता का लगभग 17% हिस्सा फिलहाल बंद हो गया है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतों में बढ़ोतरी और सप्लाई में कमी की आशंका है।

बिना चेतावनी के हुआ हमला

अल-काबी ने यह भी कहा कि साउथ पार्स पर हुए हमले की उन्हें कोई पहले से जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा कि न तो उन्हें और न ही किसी अन्य अधिकारी को इस बारे में पहले से बताया गया था। यहां तक कि डोनाल्ड ट्रंप ने भी कहा कि उन्हें इस हमले की पूर्व जानकारी नहीं थी। इससे यह साफ होता है कि यह कार्रवाई अचानक और बिना किसी चेतावनी के की गई। कतर एनर्जी की भविष्य की योजनाओं पर भी इस हमले का बड़ा असर पड़ा है।

कंपनी 2027 तक अपनी एलएनजी उत्पादन क्षमता को 77 मिलियन टन से बढ़ाकर 126 मिलियन टन प्रति वर्ष करने की योजना बना रही थी। लेकिन मौजूदा हालात के कारण इस विस्तार में देरी होना तय है। रास लाफान क्षेत्र से लगभग 10,000 कर्मचारियों को 24 घंटे के भीतर सुरक्षित बाहर निकाला गया। इस तेज कार्रवाई की वजह से कोई जनहानि नहीं हुई, जो एक राहत की बात है।

उत्पादन कब शुरू होगा?

अल-काबी के मुताबिक, एलएनजी उत्पादन तभी फिर से शुरू हो पाएगा जब क्षेत्र में तनाव कम होगा। इसके बाद भी पूरी तरह संचालन बहाल करने में 3 से 4 महीने का समय लगेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक हालात सामान्य नहीं होते, तब तक उत्पादन शुरू करना जोखिम भरा रहेगा। इस पूरे घटनाक्रम का असर खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्था पर गहराई से पड़ा है।

अल-काबी ने कहा कि इस संघर्ष ने क्षेत्र को 10 से 20 साल पीछे धकेल दिया है। पर्यटन, व्यापार, और एयरलाइंस जैसे कई सेक्टर बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। बंदरगाहों पर कामकाज ठप हो गया है और तेल-गैस से होने वाली आय लगभग शून्य हो गई है।

यह भी पढ़ें: ईरान-होर्मुज मुद्दे पर साउथ कोरिया की एंट्री, साउथ कोरिया ने ईरान से की बातचीत शुरू

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