Project Aja Chhattisgarh Success Model: छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले की अभिनव पहल “प्रोजेक्ट अजा” ने राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए प्रतिष्ठित The Economic Times GovTech Awards 2026 में “एग्रीटेक फॉर फार्मर एम्पावरमेंट” श्रेणी के तहत सम्मान प्राप्त किया है। नई दिल्ली में आयोजित भव्य समारोह में रायपुर कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह को यह पुरस्कार प्रदान किया गया, जो जिले में किसानों और विशेषकर ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए किए जा रहे नवाचारों की राष्ट्रीय स्तर पर सराहना है।
‘प्रोजेक्ट अजा’ बना ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सहारा
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में संचालित “प्रोजेक्ट अजा” ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रभावी भूमिका निभाई है। इस योजना के तहत महिला स्व-सहायता समूहों को बकरी पालन से जोड़कर उन्हें स्थायी आजीविका के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे वे आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं और अपने परिवार की आय में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।
जिला प्रशासन की इस पहल के अंतर्गत हितग्राही महिलाओं को 10 बकरियां और 2 बकरे उपलब्ध कराए जाते हैं, जिससे वे स्वरोजगार अपनाकर प्रतिवर्ष एक लाख रुपये से अधिक की आय अर्जित कर रही हैं। इसके साथ ही मुर्गी पालन और जैविक खाद उत्पादन जैसे अतिरिक्त गतिविधियों से उनकी आय के स्रोत और भी विस्तृत हुए हैं।
‘प्रोजेक्ट अजा’ में ‘पशु सखी’ बनी बदलाव की ताकत
“प्रोजेक्ट अजा” की सफलता का एक महत्वपूर्ण पहलू “पशु सखी” कैडर का गठन भी है, जिसके माध्यम से प्रशिक्षित ग्रामीण महिलाएं पशुपालकों को टीकाकरण, नस्ल सुधार और आधुनिक पशुपालन तकनीकों की जानकारी दे रही हैं। इससे न केवल पशुपालन की गुणवत्ता में सुधार आया है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी सृजित हुए हैं।
‘प्रोजेक्ट अजा’ बना देशभर में सफल मॉडल
यह योजना राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत संचालित हो रही है और अब देशभर में एक सफल मॉडल के रूप में उभर रही है। कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने इस उपलब्धि का श्रेय पूरी टीम और लाभान्वित महिलाओं को देते हुए कहा कि यह सम्मान आगे और बेहतर कार्य करने की प्रेरणा देगा। “प्रोजेक्ट अजा” आज छत्तीसगढ़ में ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण और नवाचार का प्रतीक बन चुका है, जिसने यह सिद्ध कर दिया है कि सही नेतृत्व और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन संभव है।
रिपोर्ट: रायपुर, आनंद खरे/ पंजाब केसरी























