नई दिल्ली: सीबीआई में छिड़ी जंग के बीच आज यानी शुक्रवार को सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा की अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई है। सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा और स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जब सार्वजनिक हो गया, तब केंद्र सरकार ने दोनों को छुट्टी पर भेज दिया। मगर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो के निदेशक आलोक कुमार वर्मा को अधिकार वापस लेकर उन्हें छुट्टी पर भेजे जाने के खिलाफ उनकी याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा।
दरअसल, आलोक वर्मा ने अपनी याचिका में केंद्र की ओर से उन्हें छुट्टी पर भेजे जाने तथा अंतरिम प्रभार 1986 बैच के भारतीय पुलिस सेवा के ओडिशा कैडर के अधिकारी तथा एजेंसी के संयुक्त निदेशक एम नागेश्वर राव को सौंपे जाने के फैसले पर रोक लगाने की मांग की है। प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एस के कौल एवं न्यायमूर्ति के एम जोसेफ की पीठ वर्मा की याचिका पर सुनवाई करेगी।
कांग्रेस का देशभर में हल्ला-बोल
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के निदेशक को छुट्टी पर भेजने के केंद्र सरकार के आदेश के खिलाफ कांग्रेस शुक्रवार को दिल्ली में सीबीआई मुख्यालय तथा राज्यों की राजधानियों में सीबीआई के कार्यालयों के सामने धरना- प्रदर्शन करेगी। राजधानी दिल्ली में इस प्रदर्शन में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के भी शामिल होने की संभावना है। कांग्रेस के सूत्रों ने बताया कि पार्टी सीबीआई निदेशक वर्मा के खिलाफ आदेश को तुरंत वापस लेने की मांग के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस पूरे प्रकरण पर देश से माफी मांगने की मांग करेगी।
पद पर रहेंगे वर्मा-अस्थाना
देश की सबसे प्रतिष्ठित जांच एजेंसी सीबीआई में शीर्ष पदों पर फेरबदल के बीच सीबीआई की तरफ से स्पष्ट किया गया है कि आलोक वर्मा एजेंसी के निदेशक और राकेश अस्थाना विशेष निदेशक के पद पर बने रहेंगे, जबकि एम नागेश्वर राव को अंतरिम प्रभार दिया गया है। वहीं घूसकांड के आरोपों की जांच होने तक वर्मा और अस्थाना के सारे अधिकार ले लिए गए हैं।
सीबीआई के प्रवक्ता ने कहा है कि वर्मा और अस्थाना के सारे अधिकार वापस लेने की केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) की सिफारिश को देखते हुए संयुक्त निदेशक एम नागेश्वर राव को अंतरिम व्यवस्था के तहत निदेशक के कर्तव्यों का निर्वहन करने की जिम्मेदारी दी गई है।
प्रवक्ता ने कहा कि आलोक वर्मा सीबीआई के निदेशक के पद पर और राकेश अस्थाना विशेष निदेशक के पद पर बने रहेंगे. वहीं, आरोप – प्रत्यारोप की सीवीसी द्वारा जांच किए जाने तक अंतरिम अवधि के दौरान दोनों के पास कोई अधिकार नहीं होंगे।
उन्होंने मीडिया में आ रही उन खबरों का खंडन किया है जिसमें यह कहा गया था कि सात फाइलें हटा दी गई हैं. प्रवक्ता ने कहा कि यह झूठी खबर है और इसे निहित स्वार्थ में गढ़ा गया है। प्रवक्ता ने मीडिया सीबीआई में प्रत्येक स्तर पर हर फाइल का रिकॉर्ड रखा जाता है। मीडिया में आ रही इन खबरों का जांच एजेंसी की विश्वसनीयता पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।


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