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कमल नाथ ने छिंदवाड़ा से किया नामांकन, याद किए पुराने दिन

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने छिंदवाड़ा से कांग्रेस के उम्मीदवार के तौर पर नामांकन भरा। इस मौके पर उन्होंने छिंदवाड़ा और अपने रिश्ते को याद करते हुए कहा कि चार दशक पहले छिंदवाड़ा में जीप से घूमने पर डेढ़ किलो धूल शरीर पर चढ़ जाती थी, अब स्थिति बदल गई है। छिंदवाड़ा विधानसभा क्षेत्र से नामांकन भरने से पहले कमलनाथ ने अपनी बात बेबाकी से रखी और कहा कि नामांकन भरने का मुहूर्त है, जैसे आप मुहूर्त निकलवाते हैं, मैंने भी निकलवाया है। इसलिए समय से नामांकन भरना जरूरी है।

मंच पर बैठकर सन 1979 का वह दिन याद आता

कमलनाथ ने कहा कि मुझे अभी मंच पर बैठकर सन 1979 का वह दिन याद आता है, जब मैंने पहली बार नामांकन भरा था। उस समय मेरी उम्र बहुत कम थी और मुझे राजनीति का बहुत ज्यादा ज्ञान नहीं था, मैं आप सभी के बीच में हाथ जोड़कर आपकी गलियों में, आपके घरों तक आया था, आपसे समर्थन मांगा था, आपके बीच में आकर प्रार्थना की और वोट मांगा था। मैं आज यह बात खुलकर कह सकता हूं कि पिछले 45 सालों से मुझे आपका केवल वोट ही नहीं मिला, बल्कि आपका प्यार भी मुझे मिला है।

जब मैं पहली बार यहां से जीता

कमलनाथ ने कहा कि मुझे याद है कि आज जहां पर यह बाजार है वह बाजार उस समय नहीं था। जब मैं पहली बार यहां से जीता तो मैंने सोचा था कि मैं क्या करुंगा और कैसे करूंगा? छिंदवाड़ा में उस समय 2000 गांव में से केवल 480 गांव में बिजली थी। तब, मैंने सभी गांवों में बिजली पहुंचाने का काम शुरू किया, मैं गाड़ी से दौरा करता था तो मैंने छिंदवाड़ा को देखा था और मुझे बार-बार एक ही बात याद आती थी कि छिंदवाड़ा के लोगों ने मुझ पर विश्वास किया है और मेरा कर्तव्य है कि छिंदवाड़ा की पहचान बने और छिंदवाड़ा को देश में पहचाना जाए। मैंने खेती के लिए प्रयास करना शुरू किया। जब मैंने छिंदवाड़ा में सोयाबीन की खेती को बढ़ावा देने के लिए काम करना शुरू किया तो लोग मुझ पर हंसते थे कि यह देखो कमलनाथ सोयाबीन में उलझे हुए हैं। लेकिन, आपको पता ही है कि केवल चार साल में छिंदवाड़ा जिला सोयाबीन की फसल में नंबर वन हो गया था और छिंदवाड़ा के लिए भी यह पहली क्रांति थी।

उस समय छिंदवाड़ा में न तो कोई पानी की नहीं थी सही व्यवस्था

कमलनाथ ने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा कि उस समय छिंदवाड़ा में न तो कोई पानी की सही व्यवस्था थी, न ही तालाब थे, न ही सिंचाई की व्यवस्था के लिए नहरें थी। संतरे की खेती करने वाले लोगों को मैं बताना चाहता हूं कि उस समय पर लोग मुझे फोन करते थे और मुझसे कहते थे कि मेरा संतरा सड़ रहा है, उसके लिए मुझे रेट दिलवाइये।

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