केंद्र सरकार के 500 और 1000 का नोट बंद करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में पहुंची याचिका पर सुनवाई को 12 अक्टूबर तक के लिए स्थगित कर दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई को टालते हुए कहा की सबसे पहले, यह जांचा जाएगा कि क्या नोटबंदी को चुनौती देने वाली याचिका अकादमिक तो गई हैं। सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक यह पता लगाना भी जरुरी है कि इस मामले पर सुनवाई हो सकती है या नहीं।
सुप्रीम कोर्ट ने 16 दिसंबर 2016 को यह मामले को संवैधानिक पीठ को सौंप दिया था। अब मामले को जस्टिस एस अब्दुल नजीर, जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस एएश बोपन्ना, जस्टिस वी. रामासुब्रमण्यन और जस्टिस बीवी नागरत्ना सुनवाई कर रहे थे।
अदालत ने वर्ष 2016 में कई मुद्दों की पहचान की
मामले में सुनवाई करते हुए जस्टिस नजीर ने वकील से सवाल किया की, क्या अब भी यह बचा है ? इस पर वकील ने जवाब दिया कि शीर्ष अदालत ने वर्ष 2016 में कई मुद्दों की पहचान की थी और मामले को संविधान पीठ को सौंप दिया था। उन्होंने कहा कि इस मामले पर हाईकोर्ट में सुनवाई पर रोक लगा दी गई थी । इसी तरह का सवाल बाद में जस्टिस गवई ने भी उठाया था।
अदालतों में लंबित सभी नोटबंदी मामलों की सुनवाई पर रोक
नोटबंदी के बाद देशभर की अदालतों में कई मामले आ गए थे। तब सुप्रीम कोर्ट ने देशभर की अदालतों में लंबित सभी नोटबंदी मामलों की सुनवाई पर रोक लगा दी थी और मामले को पांच के पास भेज दिया था। सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर की एक पीठ ने नौ प्रशन तैयार किए, जिन्हें पांच-न्यायाधीशों की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए भेजा गया था।


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