राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने मथुरा वृंदावन विकास प्राधिकरण से कहा कि वह मथुरा में राधा और श्याम कुंड के पानी को इंसानों के उपभोग के लिये उपयुक्त नहीं पाए जाने पर कार्रवाई रिपोर्ट दाखिल करे। एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने निर्देश दिया की जब तक स्थिति में सुधार नहीं होता तब तक दोनों कुंडों के पानी की गुणवत्ता को प्रदर्शित किया जा सकता है कि मानव उपभोग के लिये यह पानी उपयुक्त नहीं है।
पीठ ने कहा, “उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड जल (निरोधक एवं प्रदूषण नियंत्रण) अधिनियम, 1974 के प्रावधानों के तहत अपने अधिकार का इस्तेमाल कर कार्रवाई करते हुए जल प्रदूषण पर नियंत्रण सुनिश्चित कर सकता है। ‘प्रदूषक भुगतान करे’ के सिद्धांत पर कार्रवाई कर वह मुआवजा भी वसूल सकता है।”
मथुरा वृंदावन विकास प्राधिकरण को 11 नवंबर 2019 या उससे पहले ई-मेल के जरिये कार्रवाई रिपोर्ट दाखिल करनी होगी। मामले में अगली सुनवाई 23 दिसंबर को रखी गई है। न्यायाधिकरण ने पहले उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, मथुरा जिला मजिस्ट्रेट और मथुरा वृंदावन नगर निगम की एक समिति बनाई थी और रिपोर्ट मांगी थी।
एनजीटी ने कहा था कि आगरा के एस एन मेडिकल कॉलेज द्वारा पूर्व में किए गए सूक्ष्म जैविक परीक्षणों में राधा और श्याम कुंड के जल में जीवाणु संक्रमण हैजा की उपस्थिति पायी गई थी। अधिकरण सुशील राघव द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रहा है जिसमें मथुरा के अरिता गांव में राधा और श्याम कुंड में अवजल छोड़े जाने से रोकने के लिये कदम उठाने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता के मुताबिक समुचित अवजल शोधन प्रणाली के अभाव में अवजल और घरेलू कचरा राधा कुंड में गिराया जा रहा है।


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