Mahakumbh 2025: महाकुंभ के वो रहस्य जिनके बारे में नहीं जानते होंगे आप

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Mahakumbh 2025: कुंभ मेले से जुड़े अद्भुत रहस्य

महाकुंभ मेले का इतिहास समुद्र मंथन से जुड़ा है। मान्यताओं के अनुसार, जब देवताओं और राक्षसों के बीच समुद्र मंथन से निकले अमृत के लिए लड़ाई हुई थी तब अमृत की बूंदें चार स्थलों पर गिरी। इन्हीं जगहों पर अब महाकुंभ का आयोजन किया जाता है

साल 2013 में हुए महाकुंभ ने 120 मिलियन से ज्यादा श्रद्धालुओं के साथ गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था

महाकुंभ मेले का आयोजन प्रत्येक 12 वर्ष में चार स्थानों पर होता है

इस उत्सव में नागा साधुओं सहित तपस्वी एकत्रित होते हैं

2017 में, यूनेस्को ने कुंभ को मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची में मान्यता दी है

ऐसा माना जाता है कि पवित्र नदियों में स्नान करने से पाप धुल जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है

महाकुंभ से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलता है। विक्रेताओं को लाभ होता है, इससे मेजबानी करने वाले शहर के जीडीपी में भी वृद्धि होती है

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Khushi Srivastava

खुशी श्रीवास्तव मीडिया इंडस्ट्री में करीब 3 साल का अनुभव रखती हैं। वायरल कंटेंट, लाइफस्टाइल, हेल्थ और वास्तु शास्त्र टिप्स पर प्रमुखता से काम किया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई के बाद पहली बार पत्रकारिता के श्रेत्र में कदम रखा। इसके बाद अमर उजाला प्रिंट (प्रयागराज) में इंटर्नशिप की। फिलहाल खुशी, पंजाब केसरी दिल्ली के डिजिटल प्लैटफॉर्म के लिए कंटेंट राइटिंग का काम करती हैं।