ऑपरेशन कावेरी के तहत भारत ने सूडान से अपने लगभग 2 हजार 400 नागरिकों को सफलतापूर्वक निकाला

Summary :

भारत ने सूडान से लगभग 2 हजार 400 नागरिकों को सफलतापूर्वक निकाला, जिनमें से 700 से अधिक भारतीय दो जत्थों में यहां पहुंच चुके हैं। बचाए गए 300 भारतीयों का 13वां जत्था पोर्ट सूडान से जहाज के जरिए जेद्दा के लिए रवाना हुआ।

भारत ने सूडान से अपने लगभग 2 हजार 400 नागरिकों को सफलतापूर्वक निकाला, जिसमें से 700 से अधिक भारतीय 2 बैचों में यहां पंहुच गये है। 300 बचाए गए भारतीयों का 13वां जत्था जहाज के माध्यम से पोर्ट सूडान से जेद्दा के लिए रवाना हुआ।
इस बीच, भारतीय वायु सेना ने साहसी बचाव करते हुए खार्तूम के पास एक हवाई अड्डे से भारतीय दूतावास के अधिकारियों के परिवार के सदस्यों सहित 121 भारतीयों को निकाला।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने देर रात ट्वीट कर कहा कि लगभग 2400 भारतीयों को निकाला गया।
आईएनएस सुमेधा पोर्ट सूडान से 300 यात्रियों को लेकर जेद्दाह के लिए रवाना हुआ। ऑपरेशन कावेरी के तहत भारतीयों का 13वां जत्था निकाला गया।’’ पहले के एक ट्वीट में उन्होंने कहा कि एक आईएएफ सी -130जे पोर्ट सूडान से 135 यात्रियों को लेकर जेद्दा के लिए रवाना हुआ, वहां फंसे हुए भारतीयों के 12वें बैच को निकाला गया।

इससे पहले जेद्दा में तैनात विदेश राज्य मंत्री वी मुरलीधरन और भारत द्वारा स्थापित एक नियंत्रण कक्ष ने 135 भारतीयों के 11वें बैच की अगवानी की, जो पोर्ट सूडान से आईएएफ सी -130 जे पर पहुंचे थे।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ट्वीट में घोषणा की कि भारतीयों के दो जत्थे भारत पहुंचे – 362 भारतीयों का एक जत्था बेंगलुरु पहुंचा, जबकि 392 यात्रियों को लेकर एक और सी-17 उड़ान नई दिल्ली पहुंची।
इससे पहले बचाव कार्यों के लिए तैनात नौसेना का तीसरा जहाज आईएनएस तरकश, सूडान से 326 भारतीय निकासी के साथ जेद्दा पहुंचा। इसमें 10वां बैच शामिल था।
9वें बैच में 135 भारतीय शामिल थे, जो आईएएफ सी 130 जे पर सवार होकर जेद्दा पहुंचे।
इस बीच भारतीय वायुसेना ने खार्तूम से 40 किमी उत्तर में स्थित वाडी सीदना में एक छोटी हवाई पट्टी से 121 भारतीयों को बचाने के लिए गुरुवार देर रात साहसी और रात के समय उड़ान भरी।
विदेश राज्यमंत्री वी मुरलीधरन ने एक ट्वीट में कहा: ‘‘एक साहसी बचाव! ‘‘121 भारतीयों का 8वां जत्था आईएएफ सी 130 जे द्वारा वादी सीदना, सूडान से जेद्दा पहुंचा। यह निकासी अधिक जटिल थी क्योंकि स्थान खार्तूम के आसपास है।

Shera Rajput