आईआरजीसी को लेकर ब्रिटेन के फैसले पर ईरान का कड़ा विरोध, जवाबी कार्रवाई की दी चेतावनी

नई द‍िल्‍ली, 14 जुलाई (आईएएनएस)। ईरान के विदेश मंत्रालय ने ब्रिटेन के उस फैसले की कड़ी निंदा की है, जिसमें उसने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) को तथाकथित आतंकवादी संगठन घोषित किया है।

मंत्रालय ने चेतावनी दी कि तेहरान इस कदम के जवाब में समान कार्रवाई करने का अधिकार अपने पास रखता है और इस फैसले के जो भी नतीजे होंगे, उनकी जिम्मेदारी ब्रिटेन की होगी।

ईरान के विदेश मंत्रालय ने सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म ‘एक्‍स’ पोस्‍ट में ल‍िखा, ”ईरान इंग्लैंड के उस कदम की निंदा करता है, जिसमें उसने ईरान के इस्लाम के रक्षकों को आतंकवादी करार दिया है। ईरान के खिलाफ इस विरोधी फैसले का आधार बेबुनियाद सुरक्षा दावे बनाए गए हैं। इंग्लैंड खुद आतंकवादी और हिंसक नेटवर्कों और समूहों को शरण और समर्थन देता है।”

ईरान के विदेश मंत्रालय ने ब्रिटेन के इस कदम को दुश्मनी भरा, गलत और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है।

मंत्रालय का कहना है कि आईआरजीसी, ईरान के आधिकारिक सशस्त्र बलों का एक अहम हिस्सा है। यह सेना के साथ मिलकर देश की सीमाओं, राष्ट्रीय संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा करता है।

बयान में कहा गया कि ईरान की रक्षा करने और क्षेत्र में शांति और सुरक्षा बनाए रखने में आईआरजीसी की भूमिका अच्छी तरह से जानी जाती है, खासकर दाएश (आईएसआईएस) जैसे संगठन के खिलाफ उसकी लड़ाई के कारण।

मंत्रालय ने कहा कि ब्रिटेन को दूसरे देशों पर आरोप लगाने का नैतिक अधिकार नहीं है। ईरान ने कहा क‍ि ब्रिटेन का दुनिया के कई देशों, खासकर पश्चिम एशिया के आंतरिक मामलों में दखल देने का इतिहास रहा है। साथ ही, हाल ही में ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल की कथित आक्रामक कार्रवाई में भी ब्रिटेन की मिलीभगत रही है।

ईरान ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत उसे इस फैसले के जवाब में समान कार्रवाई करने का पूरा अधिकार है, साथ ही चेतावनी दी कि इस ईरान-विरोधी कदम के राजनीतिक, कानूनी और कूटनीतिक नतीजों की पूरी जिम्मेदारी ब्रिटिश सरकार की होगी।

ब्रिटेन की सरकार ने सोमवार को कहा कि वह ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) और दो अन्य संगठनों को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा घोषित करने की प्रक्रिया शुरू कर रही है।

अगर यह फैसला लागू हो जाता है तो इन संगठनों की ब्रिटेन से जुड़ी गतिविधियों में मदद करना, उनका समर्थन करना या जानबूझकर उनसे किसी तरह का आर्थिक या दूसरा फायदा लेना अपराध माना जाएगा। इनमें से कुछ मामलों में अधिकतम सजा उम्रकैद तक हो सकती है।

ब्रिटेन पहले ही पूरे आईआरजीसी पर प्रतिबंध लगा चुका है। हालांकि, यह नई व्यवस्था टेररिज्म एक्ट 2000 के तहत किसी संगठन को आतंकवादी घोषित करने वाली व्यवस्था से अलग है। इस पर तीनों संगठनों की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

–आईएएनएस

एवाई/डीकेपी

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