Flipkart के CFO श्रीराम वेंकटरमन ने दिया इस्तीफा, IPO से पहले कंपनी में बड़ा फेरबदल

Flipkart CFO Resignation

Flipkart CFO Resignation: दिग्गज ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट ने शुक्रवार को घोषणा की कि उसके मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) श्रीराम वेंकटरमन एक दशक से ज्यादा समय तक कंपनी के साथ रहने के बाद अपने पद से इस्तीफा देंगे। हालांकि, वेंकटरमन तुरंत कंपनी नहीं छोड़ेंगे और अगले कुछ महीनों तक अपनी भूमिका में बने रहेंगे, ताकि बदलाव की प्रक्रिया सुचारू रूप से पूरी हो सके।

भारत में आईपीओ लाने की तैयारी में फ्लिपकार्ट

कंपनी ने कहा कि यह कदम एक अहम समय में वित्तीय संचालन की स्थिरता बनाए रखने के लिए उठाया गया है। इस दौरान अंतरिम व्यवस्था के तहत रवि अय्यर कंपनी के वित्त विभाग की जिम्मेदारी संभालेंगे, जब तक नए सीएफओ की नियुक्ति नहीं हो जाती।

यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब फ्लिपकार्ट भारत में अपना आईपीओ लाने की तैयारी कर रही है। ऐसे समय में लीडरशिप में बदलाव को निवेशक काफी ध्यान से देखते हैं, हालांकि कंपनी ने कहा है कि उसकी लिस्टिंग योजना तय समय पर आगे बढ़ रही है।

मैनेजमेंट स्ट्रक्चर में बदलाव क्यों?

इसी बीच फ्लिपकार्ट ने अपनी लीडरशिप टीम को मजबूत करते हुए निशांत वर्मा को कॉरपोरेट डेवलपमेंट और पार्टनरशिप के लिए सीनियर वाइस प्रेसिडेंट नियुक्त किया है। हालिया बदलावों से संकेत मिलता है कि कंपनी अपने अगले ग्रोथ फेज के लिए मैनेजमेंट स्ट्रक्चर में बदलाव कर रही है।

आईपीओ की तैयारी के बीच फ्लिपकार्ट जरूरी बदलाव कर रही है, ताकि वह पब्लिक मार्केट और भविष्य के विस्तार के लिए पूरी तरह तैयार हो सके। वित्तीय प्रदर्शन की बात करें तो मार्च 2025 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष (वित्त वर्ष 2025) में फ्लिपकार्ट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड का कंसोलिडेटेड घाटा बढ़कर 5,189 करोड़ रुपए हो गया।

बढ़ते खर्च से बढ़ा कंपनी का घाटा

बिजनेस इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म टोफ्लर द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, कंपनी को पिछले वित्तीय वर्ष (वित्त वर्ष 2024) में कंपनी का शुद्ध घाटा 4,248.3 करोड़ रुपए था। हालांकि इस दौरान कंपनी का कुल राजस्व 17.3 प्रतिशत बढ़कर 82,787.3 करोड़ रुपए हो गया, जो पिछले साल 70,541.9 करोड़ रुपए था। इस दौरान कंपनी के खर्च भी लगभग इसी गति से बढ़े। कुल खर्च 17.4 प्रतिशत बढ़कर 88,121.4 करोड़ रुपए हो गया। सबसे ज्यादा खर्च स्टॉक-इन-ट्रेड की खरीद पर हुआ, जो बढ़कर 87,737.8 करोड़ रुपए हो गया, जबकि एक साल पहले यह 74,271.2 करोड़ रुपए था। इसके अलावा, कंपनी के फाइनेंस कॉस्ट में भी करीब 57 प्रतिशत की तेज बढ़ोतरी हुई और यह 454 करोड़ रुपए तक पहुंच गया।

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