Petrol Price Hike: मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग का असर खाड़ी देशों में पर सबसे ज्यादा देखने को मिला है। जिसके चलते इसका असर सीधे कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की सप्लाई पर पड़ा है। कई देशों में ईंधन की कमी की स्थिति बन गई है, जहां पेट्रोल पंप बंद होने लगे हैं और गैस एजेंसियों पर लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। इसी बीच भारत में भी ईंधन की कीमतों में बड़ा बदलाव किया गया है।
Petrol Price Hike: भारत में ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी
भारत की प्रमुख तेल कंपनियों ने प्रीमियम पेट्रोल के दाम में लगभग 2 से 2.35 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ोतरी की है। नई कीमतें 20 मार्च 2026 से लागू हो गई हैं। इसके अलावा, इंडस्ट्रियल डीजल की कीमत में करीब 22 रुपये प्रति लीटर का बड़ा इजाफा किया गया है। इससे इसकी कीमत करीब 87 रुपये से बढ़कर 109 रुपये प्रति लीटर के आसपास पहुंच गई है।
प्रीमियम पेट्रोल की कीमतें पहले और अब
| राज्य / शहर | पहले कीमत (₹/लीटर) | अब कीमत (₹/लीटर) |
|---|---|---|
| दिल्ली/NCR | 99.87 | 101.89 |
| आंध्र प्रदेश | 111.5 | 112 |
| महाराष्ट्र | 106.5 | 107 |
| कर्नाटक | 105.5 | 106 |
| तमिलनाडु | 103 | 104 |
| तेलंगाना | 109.5 | 110 |
| पश्चिम बंगाल | 107.5 | 108 |
| मध्य प्रदेश | 109.5 | 110 |
| केरल | 108 | 109 |
| बिहार | 109 | 110 |
| उत्तर प्रदेश | 97 | 98 |
इंडस्ट्रियल डीजल क्या होता है?
इंडस्ट्रियल डीजल को अक्सर हाई स्पीड डीजल (HSD) भी कहा जाता है। यह सामान्य डीजल से अलग होता है और खासतौर पर भारी मशीनों के लिए बनाया जाता है। इसमें अधिक शुद्धता होती है और इसका सिटेन नंबर ज्यादा होता है, जिससे यह जल्दी और बेहतर तरीके से जलता है। इससे मशीनों को ज्यादा ताकत मिलती है और उनका प्रदर्शन बेहतर होता है।
10 बड़े राज्यों में इंडस्ट्रियल डीजल पहले और अब
| राज्य | पहले (₹/लीटर)* | अब (₹/लीटर)** | बदलाव |
|---|---|---|---|
| दिल्ली | ₹87.7 | ₹109–110 | +22 |
| उत्तर प्रदेश | ₹87.5 | ₹109–110 | +22 |
| महाराष्ट्र | ₹90.0 | ₹112 | +22 |
| गुजरात | ₹90.1 | ₹112 | +22 |
| राजस्थान | ₹89.8 | ₹111–112 | +22 |
| बिहार | ₹93.0 | ₹115 | +22 |
| मध्य प्रदेश | ₹93.2 | ₹115 | +22 |
| पश्चिम बंगाल | ₹92.0 | ₹114 | +22 |
| तमिलनाडु | ₹93.4 | ₹115–116 | +22 |
| तेलंगाना | ₹97.0 | ₹119 | +22 |
सामान्य डीजल से कैसे अलग है?
इंडस्ट्रियल डीजल में खास तरह के एडिटिव्स मिलाए जाते हैं, जैसे लुब्रिकेंट और डिटर्जेंट। ये इंजन के अंदरूनी हिस्सों को सुरक्षित रखते हैं और घिसाव कम करते हैं। भारी मशीनें लंबे समय तक लगातार चलती हैं, इसलिए यह डीजल उनके लिए ज्यादा उपयुक्त होता है। वहीं, सामान्य डीजल कार, बस और ट्रक जैसे वाहनों के लिए बनाया जाता है। इंडस्ट्रियल डीजल में सल्फर की मात्रा कम रखी जाती है, जिससे जलने पर कम प्रदूषण होता है। यह पर्यावरण के लिए अपेक्षाकृत बेहतर माना जाता है। हालांकि, इसकी रिफाइनिंग प्रक्रिया जटिल होती है, जिससे इसकी लागत बढ़ जाती है।
कहां होता है इस्तेमाल?
इस डीजल का उपयोग बड़े उद्योगों, फैक्ट्रियों, निर्माण कार्यों और बिजली उत्पादन के लिए इस्तेमाल होने वाले जनरेटरों में होता है। इसके अलावा, क्रेन, खुदाई मशीनों और बड़े जहाजों में भी इसका इस्तेमाल होता है। कृषि क्षेत्र में भी कुछ भारी मशीनों में इसका उपयोग किया जाता है।
कीमतें बढ़ने की वजह
इंडस्ट्रियल डीजल महंगा होने से उद्योगों की लागत बढ़ना तय है। इससे बिजली उत्पादन, निर्माण कार्य और परिवहन की लागत भी बढ़ सकती है। अंततः इसका असर आम लोगों तक महंगाई के रूप में पहुंचेगा। इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण खाड़ी देशों में चल रहा युद्ध है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के रूप में आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत बढ़ने का सीधा असर देश के अंदर भी पड़ता है।
सप्लाई में कमी और भविष्य की चिंता को देखते हुए कीमतें बढ़ाना जरूरी हो गया। कुल मिलाकर, यह स्थिति दिखाती है कि वैश्विक घटनाओं का असर सीधे हमारे रोजमर्रा के जीवन पर पड़ता है। आने वाले समय में इसका असर और भी व्यापक हो सकता है।
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