Rupee Hit All-Time Low: कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और डॉलर की बढ़ती मांग के बीच भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले सबसे निचले स्तर पर खुला। रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 92.20 पर खुला और शुरुआती कारोबार के दौरान और कमजोर होकर 92.528 प्रति अमेरिकी डॉलर पर आ गया। मुद्रा विशेषज्ञों ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल के कारण घरेलू मुद्रा पर दबाव पड़ रहा है, जो लगभग 25 प्रतिशत बढ़कर 116 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल हो गई। बाजार के जानकारों का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से अमेरिकी डॉलर की मांग बढ़ गई है, खासकर तेल आयातकों की ओर से, जिससे रुपये पर दबाव पड़ रहा है।
Rupee Hit All-Time Low
रुपये की शुरुआत शुक्रवार के बंद भाव 92.20 से 46 पैसे के अंतर के साथ हुई। अभी यह 92.29/30 पर है। आरबीआई का हस्तक्षेप अस्थिरता को रोकने और बाजार में भारी उतार-चढ़ाव से बचाव का काम करेगा। आयातकों और तेल कंपनियों की ओर से भी डॉलर की भारी मांग है। जब तक तनाव कम होने और आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन के सामान्य होने के ठोस संकेत नहीं मिलते, तब तक अनिश्चितता बनी रहेगी। ब्रेंट क्रूड आज 110 अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया।
रुपया पर दबाव
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर दबाव जारी रहता है तो भारतीय रिजर्व बैंक के हस्तक्षेप से मुद्रा बाजारों में अत्यधिक अस्थिरता को कम करने में मदद मिल सकती है। एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर ने कहा कि बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बीच यूएसडी/आईएनआर जोड़ी वर्तमान में नए सर्वकालिक उच्च स्तर पर कारोबार कर रही है।
नया ऑल-टाइम लो बनाया
मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष के कारण डॉलर के मुकाबले रुपए ने बुधवार को नया ऑल-टाइम लो बनाया और पहली बार 92 के स्तर के पार निकल गया। खबर लिखे जाने तक दिन के दौरान, डॉलर के मुकाबले रुपए में 0.8 प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई और फिलहाल यह 92.30 पर है। इसका पिछला रिकॉर्ड लो 91.875 था, जो कि इस साल की शुरुआत में देखा गया था। रुपए में गिरावट की वजह मध्य पूर्व संघर्ष के चलते महंगाई और व्यापार घाटा बढ़ने की संभावना और विदेशी निवेश के उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं से बाहर जाने की आशंका है।
ALSO READ: जंग में तबाह हुआ शेयर बाजार, कुछ मिनट में डूबे 15 लाख करोड़, इन 5 कारणों से हुआ बाजार महाक्रैश





















