यमुना पुनर्जीवन का रोडमैप तैयार करेगा यमुना डायलॉग्स, हितधारक परामर्श कार्यशाला की गई आयोजित

Delhi : यमुना पुनर्जीवन का रोडमैप तैयार करेगा यमुना डायलॉग्स, हितधारक परामर्श कार्यशाला की गई आयोजित

Delhi : यमुना नदी और उसके फ्लडप्लेन (बाढ़ क्षेत्र) को साफ, सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल विकसित करने की दिशा में दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने बड़ी कवायद शुरू कर दी है। इसी कड़ी में शनिवार को ‘यमुना डायलॉग्स’ के तहत पहली हितधारक परामर्श कार्यशाला आयोजित की गई।

इसमें सरकारी विभागों, पर्यावरण विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों, शहरी योजनाकारों, तकनीकी संस्थानों और अन्य संबंधित पक्षों ने भाग लेकर यमुना के भविष्य को लेकर अपने सुझाव दिए। डीडीए ने बताया कि यह पूरी प्रक्रिया दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू के निर्देश पर शुरू की गई है।

हाल ही में उपराज्यपाल संधू ने यमुना के फ्लडप्लेन का दौरा किया था और उसके बाद डीडीए अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर नदी में बढ़ते प्रदूषण और फ्लडप्लेन के संरक्षण के लिए व्यापक कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए थे। उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू का कहना है कि यमुना को बचाने का काम केवल सरकारी एजेंसियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए।

इसमें दिल्ली के लोगों, पर्यावरण विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और अन्य हितधारकों की भी सक्रिय भागीदारी जरूरी है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि यमुना के फ्लडप्लेन आम लोगों के उपयोग में आते हैं, इसलिए उनके विकास और संरक्षण की योजना उसी के अनुरूप बनाई जानी चाहिए। साथ ही देश और विदेश में नदी संरक्षण के सफल मॉडलों से भी सीख लेने की जरूरत है।

इसी सोच के साथ डीडीए ने ‘यमुना डायलॉग्स’ की शुरुआत की है। इसके जरिए देश और विदेश के विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर नदी संरक्षण, फ्लडप्लेन प्रबंधन, रिवरफ्रंट विकास, जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चुनौतियों, प्रकृति आधारित समाधान और पर्यावरणीय परियोजनाओं के लिए वित्तीय मॉडल जैसे विषयों पर चर्चा की जाएगी।

पहली कार्यशाला में दो प्रमुख विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। पहला, ऐसा विकास मॉडल तैयार करना जिससे फ्लडप्लेन का प्राकृतिक स्वरूप और नदी का बहाव प्रभावित न हो। दूसरा, ऐसे घाट विकसित करना जो पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन गतिविधियों के लिए भी उपयोगी हों।

डीडीए के मुताबिक यह केवल शुरुआत है। आने वाले हफ्तों में दो और हितधारक कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। इनमें जल गुणवत्ता, नालों का प्रबंधन, प्रकृति आधारित समाधान, वित्तीय व्यवस्था और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय जैसे विषयों पर चर्चा होगी। इस पूरी प्रक्रिया के बाद सितंबर 2026 और जनवरी 2027 में दो बड़े ‘यमुना डायलॉग्स’ आयोजित किए जाएंगे।

इन बैठकों में ‘दिल्ली यमुना कॉम्पैक्ट’ को अंतिम रूप दिया जाएगा। इसमें यमुना नदी और उसके फ्लडप्लेन के संरक्षण, विकास और पुनर्जीवन के लिए प्राथमिकताएं, कार्ययोजना और समय-सीमा तय की जाएगी।

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