Delhi : राजघाट स्थित महात्मा गांधी की समाधि के पास बनी झील में मछलियों की रहस्यमयी मौत से हड़कंप मचा हुआ है। पिछले चार दिनों से झील में बड़ी संख्या में मृत मछलियां तैर रही हैं, जबकि कई मछलियां किनारों पर पड़ी सड़ रही हैं। उनसे उठ रही तेज दुर्गंध के कारण रोजाना आने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों, स्कूली बच्चों और स्थानीय लोगों का वहां ठहरना तक मुश्किल हो गया है।
राजधानी के सबसे संवेदनशील और प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल राजघाट की यह तस्वीर झील के रखरखाव और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। आखिर मछलियां किस वजह से मर रही हैं, इसका जवाब अब तक सामने नहीं आया है।
बता दें कि, राजघाट दिल्ली के सबसे प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है, जहां रोजाना बड़ी संख्या में विदेश-भारतीय पर्यटक, स्कूली बच्चे और स्थानीय लोग घूमने आते हैं, लेकिन इन दिनों झील का नजारा लोगों को सुकून नहीं, बल्कि परेशानी दे रहा है। झील के पानी में जगह-जगह मरी हुई मछलियां तैर रही हैं। कई मृत मछलियां पानी के बाहर मृत पड़ी हैं, जिन्हें कुत्ते और कौवे खा रहे हैं।
ऐसे में मृत मछलियों का मांस इधर-उधर पड़ा रहता है। वहां से उठ रही दुर्गंध की वजह से लोगों का कुछ देर तक रुकना भी मुश्किल हो गया है। लोगों का कहना है कि पिछले करीब चार दिनों से यही हाल है, लेकिन अब तक कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। लोगों का आरोप है कि झील का रखरखाव ठीक से नहीं हो रहा है।
यहां कोई देखभाल करने वाला भी नहीं है। ऐसे में झील की लंबे समय से ठीक तरह से सफाई नहीं हुई है। पानी भी समय-समय पर नहीं बदला जाता, जिसकी वजह से गंदगी बढ़ती जा रही है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर मछलियां क्यों मर रही हैं, इसका जवाब अभी तक किसी के पास नहीं है। ऐसे में जरूरी है कि झील के पानी की जांच कराई जाए, ताकि यह पता चल सके कि इसकी वजह ऑक्सीजन की कमी है, प्रदूषण है या फिर कोई और ठोस कारण है।
मछलियों की मौत पर सीपीडब्ल्यूडी का जवाब
झील की देखरेख करने वाले केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) के एक अधिकारी ने बताया कि मछलियों की मौत का यह गंभीर मामला विभाग के संज्ञान में है। विभाग की तकनीकी टीमें पानी के सैंपल की जांच कर रही है, जिससे मौत के सही कारण का पता चलेगा। वहीं एक अन्य अधिकारी ने बताया कि मानसून के कारण मौसम में बदलाव आने पर यह घटना हर साल होती है।
बावजूद इसके मामले की जांच की जा रही है। जबकि सीपीडब्ल्यूडी के बागवानी विभाग के एक अधिकारी ने यह भी कहा कि केवल एक विशेष प्रकार की मछली है, जो सतह के करीब रहती थी, मरी है और बड़ी मछलियां अभी भी झील में मौजूद हैं, जो शक्ति स्थल के पास स्थित है।
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