दिल्ली में बाढ़ से बचने के लिए यमुना किनारे बनेगी 4.7 किलोमीटर लंबी फ्लड वॉल, विशेषज्ञों ने जताई दूसरी चिंताएं

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Yamuna Flood Wall :  पिछले साल दिल्ली के यमुना इलाके के आसपास यमुना के पानी ने कोहराम मचाया था, लोगों के घरों तक बाढ़ का पाने घुस आया था, और पश्चिमी तट की तरफ लोग लम्बे समय तक बाढ़ के पानी से घिरे रहे। इस सिचुएशन को टैकल करने के लिए सरकार योजना बना रही है। मानसून के समय संभावित जलभराव और बाढ़ से निपटने के लिए सरकार अब यमुना किनारे फ्लड वॉल बनाने की तैयारी में है और इस पर योजना बनाई जा रही है। Yamuna Flood Wall: बनेगी 4.7 किमी लंबी दीवार बता दें, दिल्ली सरकार ने यमुना…

Yamuna Flood Wall :  पिछले साल दिल्ली के यमुना इलाके के आसपास यमुना के पानी ने कोहराम मचाया था, लोगों के घरों तक बाढ़ का पाने घुस आया था, और पश्चिमी तट की तरफ लोग लम्बे समय तक बाढ़ के पानी से घिरे रहे। इस सिचुएशन को टैकल करने के लिए सरकार योजना बना रही है। मानसून के समय संभावित जलभराव और बाढ़ से निपटने के लिए सरकार अब यमुना किनारे फ्लड वॉल बनाने की तैयारी में है और इस पर योजना बनाई जा रही है।

Yamuna Flood Wall: बनेगी 4.7 किमी लंबी दीवार

Yamuna Flood Wall
Yamuna Flood Wall (Source: Social Media)

बता दें, दिल्ली सरकार ने यमुना नदी के पश्चिमी किनारे पर करीब 4.7 किलोमीटर लंबी कंक्रीट दीवार बनाने का फैसला किया है। यह दीवार मजनू का टीला से पुराने रेलवे पुल तक बनाई जाएगी।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के अनुसार, इस परियोजना को मानसून शुरू होने से पहले पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। अधिकारियों का दावा है कि इससे हर साल आने वाली बाढ़ से बड़े इलाके को राहत मिलेगी। यानी इस पर काम शुरू होगा।

Delhi Flood Control: बाढ़ से राहत

बता दें पिछले साल मानसून के समय यमुना में जलस्तर बढ़ने पर सिविल लाइन्स, कश्मीरी गेट और यमुना बाजार जैसे निचले इलाकों में पानी भर गया था। हालत यह थी कि रिंग रोड तक जलमग्न हो हो गई थी। ऐसा ही कुछ 1978, 2023 में भी देखा गया था। यानी समस्या पुरानी है। कहा जा रहा है कि प्रस्तावित फ्लड वॉल इन क्षेत्रों को बाढ़ के पानी से बचाने के साथ-साथ नदी किनारे होने वाले कटाव को भी रोकने में मदद करेगी।

सरकार का कहना है कि यह दीवार केवल जलभराव रोकने तक सीमित नहीं होगी, बल्कि अवैध कचरा फेंकने पर भी लगाम लगाएगी। इस परियोजना को संयुक्त बाढ़ समिति और Central Water and Power Research Station की सिफारिशों का समर्थन भी मिला है।

Yamuna Flood News: पर्यावरण विशेषज्ञों की चिंता

Yamuna Flood News
Yamuna Flood News (Source: Social Media)

हालांकि, इस योजना को लेकर पर्यावरण विशेषज्ञों ने चिंता जाहिर भी की है। उनका मानना है कि नदी को उसके प्राकृतिक बाढ़ क्षेत्र से अलग करना पारिस्थितिकी के लिए नुकसानदायक हो सकता है। उनका मानना है कि यमुना के आसपास जो कालोनियां बसी हैं वह यमुना के प्राकृतिक क्षेत्र में बसी है। समस्या यह है कि अगर यमुना का दायरा अगर सीमित कर दिया गया तो वह दूसरे रूप में अपना दायरा फैला सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि बाढ़ की असली वजह नदी के प्रवाह में बदलाव और बैराजों का सही प्रबंधन न होना है। उनका दावा है कि 2023 की बाढ़ में ITO बैराज की भूमिका रही थी।
उनके अनुसार, अगर इन संरचनाओं का वैज्ञानिक तरीके से इस्तेमाल किया जाए, तो बाढ़ की समस्या काफी हद तक कम हो सकती है।

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Rohit Singh

रोहित सिंह पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। राजनीति, समाज, अंतर्राष्ट्रीय, अपराध और शैक्षणिक लेख लिखने में दिलचस्पी रखते हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से पोलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन और जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं।