किसी भी मां का बेटा खो जाना शब्दों से परे दर्द है। यह केवल एक घटना नहीं बल्कि एक उस मां का सारा संसार उजड़ जाता है। एक मां का दर्द सारी दुनिया समझती है, पर एक मां होने के नाते उसका दर्द दिल को चीर देता है। उसका रोना, उसके आंसू उसके अन्दर की पीड़ा को इस तरह ‘बयां’ करते हैं कि आपके भी आंसू निकल आते हैं। ईश्वर करे किसी भी मां को यह दिन न देखने पड़ें। जब वो रो-रोकर बोलती है कि जिस बेटे को अकेली मां होने के नाते उसने किस तरह पाला और उसका बेटा इतना लायक था कि अब उसके सभी दुःख-दर्द दूर होने वाले थे वो बाहर आगे पढ़ने जा रहा था। अपने बेटे के सलैक्शन का लैटर उसे उसके जाने के बाद मिलता है। उसके आंसू नहीं थम रहे और उसका दर्द कभी नहीं कम होगा।
हम नहीं जानते द्वारका के साहिल की सड़क हादसे में दर्दनाक मौत को लेकर कहां गलती है, यह सब पुलिस और न्यायालय का काम है परन्तु इस समय सारे समाज की भावनाएं उस मां के साथ जुड़ी हैं। आज एक मां का इकलौता बेटा छिन गया। यह एक परिवार की नहीं पूरे समाज की पीड़ा है। हम सब उस मां के लिए न्याय चाहते हैं लेकिन कानून के दायरे में हम सब सच्चाई चाहते हैं लेकिन बिना अफवाह के आैर हम साथ ही साथ ऐसी व्यवस्था चाहते हैं जहां कोई मां अपने बेटे को यूं न खोए। एक मां ने अपना इकलौता बेटा खो दिया। यह दर्द शब्दों में या लिखकर व्यक्त नहीं किया जा सकता। यह एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए सोचने आैर आत्ममंथन का विषय है लेकिन साथ ही हमें याद रखना होगा कि न्याय भावनाओं से नहीं तथ्यों आैर कानून से होता है। हम किसी को बिना जांच दोषी नहीं ठहरा सकते, हम सोशल मीडिया को अदालत नहीं मान सकते। साथ ही हमें यह घटना और उस मां का दर्द यह सोचने पर मजबूत करता है। हमारे युवाओं को सही मार्गदर्शन, मनसिक सहारा और सुरक्षित वातावरण मिल रहा है। क्या हम अपने बच्चों का खासकर नाबालिगों का ध्यान रख रहे हैं। क्या एक नाबालिग बिना लाइसेंस के गाड़ी चला सकता है, क्या कोई रील बनाने के चक्कर में किसी की जिन्दगी से खेल सकता है। फिर कहूंगी यह सब पुलिस और न्यायपालिका को ही देखना है।
पर उस मां के हाल पर मैं भी बेहाल हूं। जिसने उसे 9 महीने कोख में रखा। अंगुली पकड़कर चलना सिखाया, अकेली मां ने पूरी मेहनत और मुश्किल से पाला-पढ़ाया। जब वो 23 वर्ष का था जिसकी पूरी जिन्दगी आगे पड़ी थी वह आज इस दुनिया में नहीं है। एक मां का जीवन का आधार टूट गया। हम उस मां के साथ दिल से भावना से खड़े हैं। हम किसी पर अंगुली नहीं उठा रहे। हम किसी को बिना जांच के दोषी नहीं ठहरा रहे लेकिन हम यह जरूर चाहते हैं कि एक मां को न्याय जरूर मिलना चाहिए।
न्याय कैसे मिलेगा हम यह नहीं चाहते कि उक्त नाबालिग ड्राइवर (बेगरत) के साथ क्या हो, क्योंकि बदला नहीं चहते यह कानून का काम है। एक समाज सेविका होने के नाते यह जरूर चाहूंगी कि वो बेटा उसके बेटे की जगह तो नहीं ले सकता, पर कोशिश जरूर करे। उस मां की पूरी जिम्मेदारी वह बेटा आैर उसके माता-पिता उठाएं। उसका दिन-रात ख्याल रखें। मुझे तो खुद समझ नहीं आ रहा, कुछ दिन पहले नोएडा में एक पढ़ा-लिखा बेटा 4 घंटे जिन्दगी और मौत की लड़ाई लड़ते हार गया। लोग वहां खड़े रहे 4 घंटे कोई भी व्यवस्था उसे बचा नहीं सकी। ऐसे ही दिल्ली में एक बेटा खोदे हुए गड्ढे में िगरकर जान दे बैठा। कानून, पुलिस व्यवस्था जो करेगी सो करेगी परन्तु जवान बेटों की मांआें के साथ कुछ दिन, कुछ महीने तो लोग, रिश्तेदार खड़े होंगे, दुःख बांटेंगे परन्तु सारी जिन्दगी कौन उनके दर्द को समझेगा। कौन दर्द को महसूस करेगा। सड़क हादसे एक बड़ी चुनौती बन चुके हैं। एक बेटे की मौत केवल मौत नहीं, बल्कि परिवार के सपने और सहारा छिनने की बात है लेकिन सड़क पर हादसों के दौरान यह एक बेटे के नहर में गिरने के दौरान वीडियो बनाने आैर रील बनाने के लिए सब सक्रिय रहते हैं। तड़पते या किसी डूबते को बचाने की किसी ने नहीं सोची ऐसे लगता है? मेरा िदल करता है उस मां को मिलूं और उसको अपने सीने से लगाकर उसके सारे आंसू पी जाऊं क्योंकि मैं भी मां हूं। बच्चे को चोट लग जाए, बुखार आ जाए तब कितनी बेचैनी होती है और एक मां ने अपने बच्चे को खून से लथपथ हालत में सड़क पर पड़े देखा और उसे खो दिया। उस मां के दर्द को कोई कम कर सकता। हे ईश्वर! उसको सब्र दो, शक्ति दो जो बहुत मुश्किल है।























