ओडिशा में इस बात की चर्चा ज़ोरों पर है कि 79 साल के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजू जनता दल (बीजद) के प्रमुख नवीन पटनायक अपने उत्तराधिकारी को तैयार कर रहे हैं। हाल ही में उन्होंने अपने करीबी सहयोगी वी.के. पांडियन की पत्नी सुजाता राउत कार्तिकेयन को बीजद में शामिल किया है। सुजाता राउत ओडिशा कैडर की पूर्व नौकरशाह (ब्यूरोक्रेट) रही हैं। वह ओडिशा की रहने वाली हैं और मुख्य रूप से महिलाओं के लिए पटनायक की खास योजना ‘मिशन शक्ति’ की देखरेख करने के लिए जानी जाती हैं। ऐसी अटकलें हैं कि उन्हें पटनायक के बाद पार्टी की कमान संभालने के लिए तैयार किया जा रहा है। असल में, बीजद प्रमुख शायद पांडियन को पसंद करते, जो मुख्यमंत्री के तौर पर उनके आखिरी सालों में उनके भरोसेमंद सहयोगी थे। हालांकि, इसमें दो अड़चनें हैं। पहली यह कि पांडियन तमिल मूल के हैं। वह आईएएस अधिकारी थे, और अपनी पत्नी सुजाता की वजह से ओडिशा कैडर में शामिल हुए थे।
दूसरी बात यह है कि बीजद में कई लोगों का मानना है कि 2024 के विधानसभा चुनाव में पटनायक की हार और पार्टी की विफलता के लिए पांडियन ही जिम्मेदार थे। जैसे-जैसे पटनायक के साथ उनकी करीबी की वजह से उनकी ताकत बढ़ी, वैसे-वैसे बीजद में उनके प्रति नाराज़गी भी बढ़ी; पार्टी के लोग उन्हें तमिल मूल का होने के कारण बाहरी मानते थे। सुजाता को बीजद में लाना और उन्हें उत्तराधिकारी के तौर पर तैयार करना, शायद उस पति-पत्नी की जोड़ी को तैयार करने का एक तरीका हो सकता है जिन पर पटनायक सबसे ज़्यादा भरोसा करते थे, ताकि सही समय आने पर वे उनकी जगह ले सकें।
राम मंदिर चढ़ावा मामले में तह तक जाएगी यूपी सरकार ?
बिना एफआईआर दर्ज किए स्पेशल इन्वेस्टिगेटिव टीम (एसआईटी) का जांच शुरू करना बहुत असामान्य बात है। राम मंदिर मामले में दान के पैसे के गलत इस्तेमाल के आरोपों के बाद ऐसा ही हुआ है। जैसे ही यह खबर सामने आई कि मंदिर में दान में दिए गए भारी मात्रा में कैश और चांदी गायब हो गए हैं, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तुरंत एसआईटी का गठन कर दिया, जबकि यूपी पुलिस ने कोई एफआईआर दर्ज नहीं की थी। असल में, यह अजीब बात है कि पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने में हिचकिचाहट दिखाई, क्योंकि माना जाता है कि तीन अलग-अलग लोगों ने अयोध्या पुलिस स्टेशन में लिखित शिकायतें दी थीं। बिना एफआईआर के एसआईटी जांच की इजाज़त सिर्फ़ असाधारण परिस्थितियों में ही दी जाती है, जैसे कि अगर कोई पुलिस अधिकारी किसी अपराध का चश्मदीद गवाह हो।
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि आम पुलिस जांच के बजाय एसआईटी जांच का फैसला इसलिए लिया गया ताकि राम मंदिर में दान के पैसे के गलत इस्तेमाल का मामला सार्वजनिक घोटाला बनने से पहले ही उसे नियंत्रित किया जा सके। माना जाता है कि योगी सरकार जांच के नतीजों को गुप्त रखना चाहती थी। गोपनीयता बनाए रखने का सबसे अच्छा तरीका यह था कि मामला दर्ज करने के लिए यूपी पुलिस को सौंपने से पहले जांच तीन पूर्व पुलिस अधिकारियों की एक भरोसेमंद टीम को सौंपी जाए। स्थानीय पुलिस पर छोड़ने से शर्मनाक खबरें लीक हो सकती थीं। माना जाता है कि अयोध्या में स्थानीय पुलिस के किसी व्यक्ति ने कुछ पत्रकारों को जानकारी दी थी कि उन्हें मंदिर के दान के गलत इस्तेमाल के बारे में तीन शिकायतें मिली हैं और इसी तरह यह मामला सार्वजनिक हुआ। अब जब एसआईटी ने अपनी जांच पूरी कर ली है और चोरी के लिए जिम्मेदार लोगों के नाम सौंप दिए हैं, तो मामले को आगे की कार्रवाई के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस को सौंप दिया गया है। आखिरकार एफआईआर दर्ज कर ली गई है।
राजनेताओं को खुद पर हंसने का हुनर आना चााहिए
हाल ही में तमिलनाडु विधानसभा में हुई एक मज़ेदार बातचीत से साबित हुआ कि हमारे राजनेताओं में खुद पर हंसने की क्षमता है, भले ही कभी-कभी ही सही। यह तब हुआ जब डीएमडीके विधायक प्रेमलता विजयकांत ने सुझाव दिया कि विधायकों को स्टील के गिलास में अलग-अलग पानी परोसने के बजाय, यह बेहतर होगा कि कर्मचारी सदन की बैठक शुरू होने से पहले ही हर विधायक की सीट के सामने मेज पर पानी की एक बोतल रख दें। उन्होंने कहा कि इससे समय बचेगा और सभी विधायकों के लिए आसानी होगी, क्योंकि उन्हें पानी चाहिए होने पर हर बार वेटर को बुलाना नहीं पड़ेगा।
पूर्व मुख्यमंत्री ओ. पन्नीरसेल्वम ने मज़ाक में कहा कि यह अच्छा विचार नहीं है क्योंकि इससे विधायकों को तीखी बहस के दौरान एक-दूसरे पर फेंकने के लिए तैयार मिसाइलें मिल जाएंगी। पूरा सदन ठहाकों से गूंज उठा। यह मज़ाक तब और बढ़ गया जब पूर्व वित्त मंत्री थंगम थेन्नारासु ने पन्नीरसेल्वम से मज़ाक करते हुए कहा कि वे शायद अपने पुराने अनुभव से बोल रहे हैं, इसलिये उन्होंने चेतावनी दी है कि सदन के अंदर पानी की बोतलों का इस्तेमाल हथियार के तौर पर किया जा सकता है। आजकल ऐसी आपसी समझदारी कम ही देखने को मिलती है। राजनीति इतनी बंटी हुई है कि संसद और विधानसभाओं में अक्सर रोज़ाना हंगामा होता है, क्योंकि विरोधी पार्टियां गंभीर बहस में हिस्सा लेने के बजाय एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाती रहती हैं।
पटनायक की उत्तराधिकारी बन सकती है सुजाता राउत ?
Summary :
ओडिशा में इस बात की चर्चा ज़ोरों पर है कि 79 साल के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजू जनता दल (बीजद) के प्रमुख नवीन पटनायक अपने उत्तराधिकारी को तैयार कर रहे हैं। हाल ही में उन्होंने अपने करीबी सहयोगी वी.के. पांडियन की पत्नी सुजाता राउत कार्तिकेयन को बीजद में शामिल किया है। सुजाता राउत ओडिशा कैडर की पूर्व नौकरशाह (ब्यूरोक्रेट) रही हैं। वह ओडिशा की रहने वाली हैं और मुख्य रूप से महिलाओं के लिए पटनायक की खास योजना ‘मिशन शक्ति’ की देखरेख करने के लिए जानी जाती हैं। ऐसी अटकलें हैं कि उन्हें पटनायक के बाद पार्टी की कमान संभालने…


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