पूरा अप्रैल का महीना काफी वरिष्ठ नागरिक केसरी क्लब की शाखाओं में, वैसाखी के प्रोग्रामों में जाने का अवसर मिला। हर ब्रांच में हमें संस्कार और मर्यादाएं दिख रही हैं, जो हम सपना लेकर चले थे वह काफी हद तक सार्थक होता दिखाई दे रहा है। सभी ब्रांचों में बहू-बेटे, पोते-पोतियां, बेटियां, नातिन आकर अपने माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी के जन्मदिन या शादी की सालगिरह मना रहे हैं। उनको इज्जत दे रहे हैं।
फरीदाबाद ब्रांच में तो कमाल ही हो गया, जब हमारे साथ शुरू से जुड़े हमारे भजन सम्राट श्याम कालरा जिनका संगीत पत्थरों को भी झूमने पर मजबूर कर देता है, उनकी शादी की सालगिरह मनाई गई तो उनका सारा परिवार वहां शामिल था। क्लब के हैड मनोहर पुनियानी जी और को-हैड महेन्द्र खुराना ने बहुत ही बढिय़ा इंतजाम किया हुआ था और हमारे सबके मार्गदर्शक डी. एन. कथूरिया जी अपना आशीर्वाद देने आए हुए थे। प्रसिद्ध उद्योगपति राजकुमार जैन अनेक गणमान्य सज्जन भी अपना आशीर्वाद देने आए जिनके साथ मैंने कई मंच शेयर किए हुए हैं।
लेकिन सबसे बड़ा तोहफा तो उनके बेटे ने दिया। उसने तो अपने भावनात्मक शब्दों से कमाल ही कर दिया। उसने अपने माता-पिता को भगवान का दर्जा दे डाला और अगले जन्म में ऐसे ही माता-पिता पाने की इच्छा व्यक्त की।
सदस्यों ने वैसाखी पर एक से बढ़कर एक सुन्दर कार्यक्रमों से मनमोह लिया। गुड्डी ने खालसा सृजन दिवस पर प्रेरणादायी विचार रखे। वहीं जैन जी ने कहा-अमेरिका के एल्डर हाऊस में बुजुर्ग अकेले रहते हैं, जबकि केसरी क्लब में सदस्यों का उत्साह देखते बनता है, यह सदस्यों का टैलेन्ट उभारने का बहुत बढिय़ा मंच है। हमारे प्रिय सह-शाखाध्यक्ष एस. आर. कैंथ सदस्यों की प्रतिभा को प्रोत्साहित कर रहे थे। महेन्द्र खुराना पिछले 16 वर्षों से वरिष्ठ सदस्यों को हर कार्यक्रम में नि:शुल्क प्रीति भोज व होटल की सुविधाएं देकर उनका आशीर्वाद पाकर दिन-प्रतिदिन प्रगति कर रहे हैं। कमाल का संगम है। संस्कारों और मर्यादाओं का फरीदाबाद ब्रांच में और सबसे बढिय़ा मनोहर पुनियानी जी, महेन्द्र खुराना जी और कैंथ साहब की मेहनत का संगम है कि ब्रांच बहुत आगे बढ़ रही है। फरीदाबाद के 60 से
लेकर 98 साल के युवक-युवतियों में भरपूर जोश है और यही हमारे आने वाली पीढिय़ों के लिए संस्कारों का संदेश है।
सभी शाखाओं में संस्कार दिखाई दे रहे है
Summary :
पूरा अप्रैल का महीना काफी वरिष्ठ नागरिक केसरी क्लब की शाखाओं में, वैसाखी के प्रोग्रामों में जाने का अवसर मिला। हर ब्रांच में हमें संस्कार और मर्यादाएं दिख रही हैं, जो हम सपना लेकर चले थे वह काफी हद तक सार्थक होता दिखाई दे रहा है। सभी ब्रांचों में बहू-बेटे, पोते-पोतियां, बेटियां, नातिन आकर अपने माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी के जन्मदिन या शादी की सालगिरह मना रहे हैं। उनको इज्जत दे रहे हैं। फरीदाबाद ब्रांच में तो कमाल ही हो गया, जब हमारे साथ शुरू से जुड़े हमारे भजन सम्राट श्याम कालरा जिनका संगीत पत्थरों को भी झूमने पर मजबूर कर…


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