सुदृढ़ ग्रामीण अर्थव्यवस्था से हिमाचल आत्मनिर्भरता समृद्धि की राह पर

Summary :

प्रिय प्रदेशवासियो, उन्नासीवें हिमाचल दिवस के शुभ अवसर पर मैं आप सभी को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देता हूँ। वर्ष 1948 में आज ही के दिन हमारा यह सुंदर प्रदेश 30 छोटी-बड़ी पहाड़ी रियासतों के विलय से चीफ कमिशनर्स प्रोविंस के रूप में अस्तित्व में आया था। आज के इस पावन अवसर पर मैं हिमाचल निर्माता और प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री डॉ. यशवन्त सिंह परमार सहित उन सभी महान विभूतियों के प्रति सम्मान व्यक्त करता हूँ, जिन्होंने हिमाचल के गठन में बहुमूल्य योगदान दिया। मैं, वीर भूमि हिमाचल के उन स्वतंत्रता सेनानियों और बहादुर सैनिकों को भी श्रद्धांजलि अर्पित करता…

प्रिय प्रदेशवासियो, उन्नासीवें हिमाचल दिवस के शुभ अवसर पर मैं आप सभी को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देता हूँ। वर्ष 1948 में आज ही के दिन हमारा यह सुंदर प्रदेश 30 छोटी-बड़ी पहाड़ी रियासतों के विलय से चीफ कमिशनर्स प्रोविंस के रूप में अस्तित्व में आया था।
आज के इस पावन अवसर पर मैं हिमाचल निर्माता और प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री डॉ. यशवन्त सिंह परमार सहित उन सभी महान विभूतियों के प्रति सम्मान व्यक्त करता हूँ, जिन्होंने हिमाचल के गठन में बहुमूल्य योगदान दिया। मैं, वीर भूमि हिमाचल के उन स्वतंत्रता सेनानियों और बहादुर सैनिकों को भी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ, जिन्होंने देश की एकता और अखण्डता बनाए रखने के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। साथ ही, मैं प्रदेश के मेहनती, ईमानदार और शान्तिप्रिय लोगों का विशेष रूप से आभार व्यक्त करता हूँ जिनके निरन्तर प्रयासों से हमारे प्रदेश ने विकास के उच्च आदर्श स्थापित किए हैं। हमारी सरकार ने 11 दिसम्बर, 2022 को जनसेवा का उत्तरदायित्व संभाला और मुझे मुख्यमंत्री के रूप में आपकी सेवा करने का सौभाग्य मिला। व्यवस्था परिवर्तन के माध्यम से हमारी सरकार हिमाचल प्रदेश को वर्ष 2027 तक आत्मर्निभर और 2032 तक देश का सबसे समृद्ध राज्य बनाने की दिशा में पूरे समर्पण के साथ आगे बढ़ रही है। हमारे सामने एक बड़ा वित्तीय संकट खड़ा हुआ है जिसका कारण पिछली सरकार से विरासत में मिला 76,633 करोड़ रुपये का कर्ज़ और कर्मचारियों की देनदारियों के रूप में लगभग 10 हजार करोड़ रुपये का वित्तीय बोझ है। इस आर्थिक बोझ के बीच, प्रदेश के लोगों के सामने राजस्व घाटा अनुदान बंद होना एक और चुनौती है। 16वें वित्त आयोग ने 1952 से मिल रहे राजस्व घाटा अनुदान को समाप्त करने की सिफारिश की जिसे केन्द्र सरकार ने अमल में लाया है। यह अनुदान हिमाचल को वर्ष 2026-31 तक की अवधि के लिए मिलना था। इसके बंद होने से हमारे प्रदेश को प्रति वर्ष औसतन 8 से 10 हजार रुपये यानी पांच साल में लगभग 50 हजार करोड़ का नुकसान होगा। वहीं, अगर पिछली भाजपा सरकार की बात करें तो पांच वर्षों में उसको आरडीजी के रूप में 47 हजार करोड़ रुपये तथा जीएसटी प्रतिपूर्ति के रूप में 13 हजार करोड़ रुपये प्राप्त हुए थे। पिछली सरकार को जहां 60 हजार करोड़ रुपये मिले वहीं हमारी सरकार को महज 17 हज़ार करोड़ रुपये ही मिले। हमारी सरकार गाय और भैंस के दूध की खरीद पर पशुपालकों को देश में सबसे अधिक समर्थन मूल्य प्रदान कर रही है। पिछले तीन वर्षों में गाय के दूध पर समर्थन मूल्य 32 से बढ़ाकर 61 रुपये प्रति लीटर और भैंस के दूध पर 47 से बढ़ाकर 71 रुपये प्रति लीटर किया गया है। हिमाचल प्रदेश देश का पहला राज्य बना है जहां प्राकृतिक खेती पद्धति से उगाए गेहूं, मक्का और हल्दी के लिये समर्थन मूल्य दिया गया है। किसानों को और लाभ पहंुचाने के लिए हमने गेहूं के न्यूनतम समर्थन को 60 रुपये से बढ़ाकर 80 रुपये प्रति किलो और मक्की के न्यूनतम समर्थन को 40 रुपये से बढ़ाकर 50 रुपये प्रति किलो करने का फैसला किया है। राज्य सरकार विश्व स्तर की स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। 15 से 20 वर्ष पुरानी मशीनों और उपकरणों को बदलने तथा दिल्ली एम्स के स्तर की बेहतरीन चिकित्सा सेवाएं एवं उपकरण उपलब्ध करवाने के लिए 3 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। राज्य में पहली बार रोबोटिक सर्जरी की शुरुआत स्वास्थ्य क्षेत्र में एक क्रांतिकारी पहल है। लोगों को उनके घर के नजदीक ही बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए हमारी सरकार ने आदर्श स्वास्थ्य संस्थान बनाएं हैं, जहां पर 6-6 विशेषज्ञ चिकित्सक सेवाएं दे रहे हैं। आईजीएमसी शिमला में पैट स्कैन की सुविधा शुरू हो चुकी है, जबकि टांडा चिकित्सा महाविद्यालय में यह सुविधा जल्दी उपलब्ध करवाई जाएगी। अपनी चुनावी गारंटी को पूरा करते हुए हमने सभी सरकारी स्कूलों में पहली कक्षा से अंग्रेज़ी माध्यम शुरू किया है ताकि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों में आत्मविश्वास की कमी न रहे और वे भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार हो सकें। प्रदेश के 151 सरकारी स्कूलों को सीबीएसई से संबद्ध करने का निर्णय लिया गया है जिसके कारण इन स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या में बढ़ौतरी हुई है। हमने यह भी फैसला किया है कि सभी सीबीएसई स्कूलों में मेडिकल, नॉन मेडिकल और कॉमर्स विषय पढ़ाए जाएंगे। हमने इन्दिरा गांधी सुख शिक्षा योजना को विस्तार देते हुए निर्णय लिया है कि पात्र लाभार्थियों के बच्चे, जो प्रदेश के बाहर प्रतिष्ठित सरकारी व्यावसायिक संस्थानों में प्रवेश पाएंगे, उनकी होस्टल फीस से लेकर पढ़ाई का पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी। मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना के अंतर्गत 6,000 अनाथ बच्चों को ‘चिल्ड्रन ऑफ दि स्टेट’ का दर्जा प्रदान कर प्रदेश सरकार इनकी शिक्षा, स्टार्ट-अप आरंभ करने, घर बनाने के लिए भूमि एवं धनराशि सहित अन्य सुविधाएं प्रदान करने की जिम्मेदारी उठा रही है। राजीव गांधी वन संवर्द्धन योजना के अंतर्गत इस साल महिला मंडलों, युवक मंडलों और अन्य स्वयं सहायता समूहों को प्रति हेक्टेयर 1.20 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। हम ‘मिशन 32 प्रतिशत’ योजना भी शुरू करने जा रहे हैं जिसके अंतर्गत प्रदेश के हरित आवरण को 29.5 प्रतिशत से बढ़ाकर वर्ष 2030 तक 32 प्रतिशत करने के लक्ष्य से कार्य किया जाएगा। बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत प्रदान करते हुए हर महीने 125 यूनिट तक घरेलू बिजली उपभोक्ताओं के लिए शून्य बिल योजना जारी रखने का निर्णय लिया गया है जबकि 126 से 300 यूनिट तक एक रुपये 72 पैसे प्रति यूनिट की सब्सिडी लागू होगी। हमने पुरानी बीपीएल सूची को बदले बिना एक लाख अति गरीब परिवारों को आर्थिक सहायता देने के लिए ‘अपना परिवार, सुखी परिवार’ योजना शुरू कर परिवारों को 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने का निणर्य लिया है। कांगड़ा जिले में देहरा उप-मण्डल के बनखंडी में एक बड़ा जूलोजिकल पार्क निर्मित किया जा रहा है। प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों ज्वालामुखी और नैना देवी में धार्मिक पर्यटन को बढ़ाने और नई अधोसंरचना निर्माण के लिए 150-150 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। जनजातीय क्षेत्रों के विकास को राज्य सरकार विशेष प्राथमिकता दे रही है। लाहौल स्पीति जिले के स्पीति उप-मंडल की 18 साल से ऊपर सभी पात्र बहनों और माताओं को 1500 रुपये प्रतिमाह सम्मान राशि प्रदान की जा रही है। हमारी सरकार अपने कर्मचारियों के सम्मान और सुरक्षा के प्रति हमेशा प्रतिबद्ध है और उनके सभी भुगतान समबद्ध तरीके से किए जाएंगे। हमने निर्णय लिया है कि वर्ष 2016 से पूर्व के सभी पेंशनरों और पारिवारिक पेंशनरों का बकाया एरियर इसी वित्त में किया जाएगा। इसी तरह, एक जनवरी, 2016 से 31 दिसंबर, 2021 के दौरान सेवानिवृत्त हुए चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों का बकाया ग्रेच्यूटी और लीव एनकेशमेंट एरियर का पूरा भुगतान भी इसी वित्त वर्ष में कर दिया जाएगा। 31 मार्च, 2026 तक दो वर्ष का लगातार सेवाकाल पूरा करने वाले अनुबंध कर्मचारियों को नियमित करने का फैसला लिया गया है। मुझे पूरा विश्वास है कि प्रदेशवायिों के सहयोग से हम हिमाचल प्रदेश को आत्मनिर्भर और सबसे समृद्ध राज्य बनाने में सफल होंगे। हिमाचल दिवस के अवसर पर मैं एक बार फिर आप सभी को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देते हुए आपके उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हूँ। जय हिन्द, जय हिमाचल।

Sukhvinder Singh Sukhu