वरिष्ठ नागरिक केसरी क्लब एक ऐसा क्लब है जहां 60+के सदस्य हैं। लगभग 23 साल हो रहे हैं इसके लिए काम करते-करते। इसमें खुशियां हैं, गम है, सदस्य आते हैं, जाते हैं, ईश्वर को प्यारे हो जाते हैं परन्तु कई सदस्य अपनी यादें अपने अच्छे व्यवहार, प्यार, अपने क्लब के प्रति समर्पण से हमारे दिलों में अमिट छाप छोड़ जाते हैं और तभी यह समझ आता है कि जीवन एक पहेली की तरह कभी हंसाता है, कभी रुलाता है। सच में ऐसे सदस्य हमें बहुत याद आते हैं, क्योंकि इनसे ऐसे संबंध बन जाते हैं जो खून के रिश्ते से भी बढ़कर हो जाते हैं। इसीलिए हम अपने सभी सदस्यों को कहते हैं कि आप अपनी सेहत को देखते हुए अपनी जिम्मेदारी और अपने घरवालों की इजाजत और सहमति से आएं। क्योंकि सबको इतनी खुशियां मिलती हैं कि उन्हें अपनी सेहत की भी परवाह नहीं होती। मुझे तो सारे सदस्य बहुत ही प्यारे लगते हैं। उनके चेहरे की मुस्कान मुझे बहुत सुकून और खुशियां देती है। उनका उत्साह और जोश देखते ही बनता है परन्तु यही हंसते-खेलते, डांस करते हुए ईश्वर को प्यारे हो जाते हैं तो मन बहुत उदास होता है। यहां तक कि खाना खाने को भी मन नहीं करता।
यही हमारे साथ हुआ। हमारा जीके 2 ब्रांच का बैसाखी का फंक्शन था। सभी सदस्यों में बच्चों जैसा उत्साह था। गिद्दे, भांगड़ा, डांस, कविता भरपूर था। सभी सदस्यों ने बहुत मेहनत की हुई थी। हमारी बहुत ही प्यारी सदस्य मेरे साथ मिलकर डांस कर रही थी। हमारी 90 वर्षीय प्रभा जी, 80 वर्षीय वीना शर्मा, डॉ. नीलम नाथ और 80 वर्षीय सुमन कुमार भी इतनी खुश थीं कि मेरे पास शब्द नहीं बयान करने को। हमारे मेहता जी का मंच संचालन और ब्रांच हैड अंजू जी और को-हैड मेहता जी, किरण और उनके हसबैंड की मेहनत दिख रही थी।
हमारी प्यारी सुमन कुमार मेरे साथ झूम रही थीं। क्योंकि डांस करने का अर्थ है एक तरह की एक्सरसाइज। हम सभी सुमन कुमार को प्यार से बेबी डॉल कहते हैं। इस उम्र में इतनी सुन्दर उनके शब्द कम होते लेकिन उनकी अपार स्नेह और समझ होती थी। वह जब डांस कर रही थीं (धीरे) तो सभी ने उन्हें कहा कि बस, पर वह बहुत खुश थी। मुझे बाद में पता चला कि वो गिर गई थीं, परन्तु उनको परवाह नहीं थी। यही नहीं वीना शर्मा अपनी छड़ी छोड़कर नाच रही थीं और प्रभा जी बड़े जोश से गाना गा रही थीं।
मुझे 2 दिन बाद पता चला कि उनको तो फैक्चर हुआ था। मैं हैरान थी कि हमारे जैसे लोगों को छोटी से चोट लगने पर बस हो जाती है और वो तो हमारी प्यारी सी डॉल नाच रही थी।
यही नहीं 4 दिन बाद मुझे पता चला कि उनको हार्ट अटैक आया, वे अस्पताल में हैं। मुझे यह नहीं मालूम था परन्तु दिल में इतना प्यार था कि मैं तो तुरंत स्वाभाविक रूप से उनका हाल पूछने के लिए फोन कर रही थी। मैं सचदेवा जी के पिता की प्रार्थना सभा में माता सुन्दरी गुरुद्वारे जा रही थी। पहले तो उनका और उनके बेटे का फोन नहीं उठा परन्तु जब मैं गुरुद्वारे में थी तो उनके बेटे ऋषि का फोन आया, जो मैं गुरुद्वारे में उठा नहीं सकती थी। फिर मैंने बाहर आकर जैसे ही कार में बैठी उन्हें फोन किया तो उन्होंने बताया कि उनको 3 बार हार्ट अटैक आया और डाक्टर के बारे पूछ रहे थे। जैसे ही मुझे उनकी डिटेल मालूम पड़ी वो इस संसार से विदा ले गई।
आप सब विश्वास नहीं करोगे जो मेरा दिल बैठा जैसे फिर से अपनी मां को खो दिया। फिर मैं अपनी ब्रांच हैड के साथ उनके घर गई, उनके परिवार को मिलकर बहुत ही सुकून मिला। अधिकतर मैं किसी के ईश्वर को प्यारे होने के बाद जाती नहीं। उनके ब्रांच हैड ही जाते हैं। क्योंकि लाखों सदस्य हैं। हर महीने कुछ सदस्य जाते हैं, कुछ आते हैं परन्तु यह मेरी प्यारी बहू सना की रिश्ते में थी और हमारी बहुत प्यारी सदस्य थीं, तो मैं विशेष रूप से गई। वहां जाकर उनके बेटे-बहू और रिश्तेदारों को मिलकर बहुत अच्छा लगा। उनकी बहन, भाभी, भाई, पोते-पोती तथा परिवार के सदस्य मौजूद थे। वे इतने कृतज्ञ थे कि हमारी मां आपके क्लब से बहुत खुशियां पाकर गई हैं। उनका प्यारा बेटा ऋषि कुमार उनको हमेशा छोडऩे आता था। उनकी प्यारी बहू राधिका उनकी इतनी तारीफ कर रही थी जिसे सुनकर मैं धन्य हो रही थी। घर में एक सुकून था, ऐसी मां फिजिकली वहां नहीं थी परन्तु उनके बच्चों और भाई-बहनों में उनकी प्यारी सी झलक थी और मैं सोच रही थी, काश! मैं उनके जीते जी उनके परिवार में आती तो वह कितनी खुश होतीं, परन्तु इतने सदस्यों के घर जाना सम्भव नहीं। क्योंकि सभी बारी-बारी बिछड़ते हैं, जो आज हैं वो कल नहीं रहेंगे और एक दिन आएगा मैं भी नहीं रहूंगी। क्योंकि जीवन, मरण, यश, अपयश, लाभ, हानि सब विधि हाथ।























