भारत-इजराइल रणनीतिक रिश्ते

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2014 में सत्ता में आने के बाद इजराइल और भारत के संबंधों को पूरी तरह से बदल कर रख दिया है। इजराइल के मामले में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भारतीय विदेश नीति की पुरानी परम्पराओं को तोड़ने वाले साबित हुए। एक तरफ भारत की इजराइल से नजदीकियां बढ़ीं तो दूसरी तरफ भारत के खाड़ी देशों से संबंधों में भी गर्मजोशी आई। भारत की अपनी सुरक्षा ​चिंताएं हैं और इजराइल एक महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में उभरा है। 2017 में प्रधानमंत्री मोदी ने इजराइल का दौरा किया था तो ये आशंकाएं व्यक्त की गई थीं कि इससे भारत के करोड़ों मुसलमान अलग-थलग पड़ सकते हैं लेकिन सत्तारूढ़ भाजपा नीत एनडीए घरेलू राजनीतिक प्रभावों से पूरी तरह से मुक्त हो चुका है। भारत ने जहां फिलि​स्तीन के साथ संबंधों में संतुलन बनाए रखा तो दूसरी तरफ इजराइल से भी अपने रिश्तों का विस्तार किया।
आतंकवाद को लेकर दोनों देशों की साझा चिंताओं ने दोनों देशों के बीच खुफिया सहयोग को बढ़ावा दिया। हाईटेक हथियारों की भारत की मांग आैर उन्हें बेचने की इजराइल की उदारता ने मजबूत रक्षा व्यापार संबंधों को जन्म ​िदया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इजराइली संसद नेसेट को सम्बोधित करते हुए इजराइल पर 7 अक्तूबर 2023 को हुए हमास के हमले की स्पष्ट शब्दों में निन्दा की और कहा कि नागरिकों की हत्या को किसी भी तरह से तर्कसंगत नहीं ठहराया जा सकता। साथ ही उन्होंने गाजा में शांति स्थापना की पहल को दृढ़ समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि हम शांति के पेरोकार हैं। क्षेत्र के सभी लोगों के लिए न्यायपूर्ण आैर स्थायी शांति बहुत जरूरी है। जिसमें फिलिस्तीन मुद्दे का समाधान शामिल है। इस तरह प्रधानमंत्री ने फि​​िलस्तीन मुद्दे पर भारत के स्टैंड को नहीं छोड़ा साथ ही आतंकवाद पर चोट भी की। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को स्पीकर ऑफ द नेसेट मैडल से नवाजा भी गया। यह पदक प्रधानमंत्री के व्यक्तिगत नेतृत्व के माध्यम से भारत और इजराइल के बीच रणनीतिक संबंध मज़बूत करने में उनके असाधारण योगदान को मान्यता प्रदान करता है। अब यह तथ्य पूरी तरह से सार्वजनिक हो चुका है कि इजराइल ने 1962 में चीन से, 1965, 1971 में पाकिस्तान से युद्ध के दौरान भारत की गुपचुप ढंग से सैन्य मदद की थी और कारगिल युद्ध में इजराइली मदद से ही हमने पाकिस्तान के घुसपैठियों को खदेड़ने में सफलता प्राप्त की थी तब इजराइल ने भारत को लेजर गाइडेड बम किट और मिसाइलें दी थीं। उस के बाद से ही दोनों देशों के रक्षा संबंधों की शुरुआत हुई।
लोकतान्त्रिक देश भारत की विदेश नीति 90 के दशक तक इजराइल के प्रति भेदभाव की रही और हमने फिलिस्तीन के मुक्ति संग्राम का खुलकर समर्थन किया मगर इसमें भी कोई दोष नहीं था क्योंकि स्व. यासर अराफात के नेतृत्व में फिलिस्तीन के लोग भी अपने जायज हकों के लिए लड़ रहे थे और वह स्वतन्त्र देश का दर्जा चाहते थे। भारत ने इस संघर्ष में कूटनीतिक स्तर पर उनका साथ दिया। फिलिस्तीन के अस्तित्व में आने के बाद विश्व परिस्थितियों में अन्तर आया है और इजराइल ने अरब देशों के साथ अन्तर्राष्ट्रीय निगरानी में कई बार शान्ति प्रयास किये हैं जिनमें ‘कैम्प डेविड’ समझौता सबसे महत्वपूर्ण कहा जा सकता है। बदलती दुनिया में इजराइल की स्थिति में परिवर्तन आना लाजिमी था और इस माहौल में भारत के राष्ट्रहितों में परिवर्तन आना भी लाजिमी था। अतः 90 के दशक में तत्कालीन प्रधानमन्त्री स्व. पी.वी. नरसिम्हा राव के शासनकाल में हमने इजराइल के साथ कूटनीतिक सम्बन्धों की शुरूआत की। आज इजराइल दुनिया का सामरिक उद्योग क्षेत्र का महारथी माना जाता है और आतंकवाद के विरुद्ध युद्ध लड़ने का माहिर भी माना जाता है। कृषि व विज्ञान के क्षेत्र में इस छोटे से देश ने जबर्दस्त तरक्की तब की है जब यह चारों तरफ से अरब देशों जैसे सीरिया, जोर्डन, मिस्र, लेबनान और फिलिस्तीन से घिरा हुआ है।
90 के दशक से लेकर अब तक भारत की तरफ से राजनयिक स्तर की यात्राएं तो होती रही हैं मगर उच्चस्थ स्तर पर राजनयिक यात्राएं नहीं हुईं। पहली बार भारत के राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी को मोदी सरकार ने इजराइल यात्रा पर भेजा था। याद कीजिए जब केन्द्र में 1977 में पहली गैर कांग्रेस जनता पार्टी की मोरारजी देसाई सरकार बनीं थी आैर श्री अटल बिहारी वाजपेयी विदेश मंत्री थे तो इजराइल के तत्कालीन रक्षा मंत्री ‘मोशे दायां’ दिल्ली के हवाई अड्डे पर आकर ही वापस स्वदेश चले गए थे।
इजराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू की हेक्सागन समूह की स्थापना करने की घोषणा वर्ल्ड आर्डर में नया आयाम स्थापित कर सकती है। हेक्सागन का अर्थ ऐसा षटकोण जिसमें इजराइल, भारत, अमेरिका, खाड़ी देश और अफ्रीकी देश शामिल होंगे। अगर पहल सिरे चढ़ती है तो यह पाकिस्तान आैर चीन को बड़ा झटका होगा। दोनों देशों में रक्षा, एआई, साइबर सुरक्षा, क्वांटम, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, दुर्लभ खनिज, कृषि, डि​िजटल भुगतान समेत अन्य महत्वपूर्ण समझौते हुए। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि शीघ्र ही दोनों देश मुक्त व्यापार समझौता को मूर्त रूप देंगे।

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