तमिलनाडु के कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र से कथित डेटा लीक के बाद भारत की साइबर सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठे हैं। डेटा लीक की खबरों के बाद न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनपीसीआईएल) ने पुष्टि की कि लीक हुई जानकारी किसी भी परमाणु सुरक्षा प्रणाली से संबंधित नहीं है। तमिलनाडु के तिरुनेलवेली जिले में स्थित कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र में वीवीईआर डिजाइन के छह प्रेशराइज्ड वाटर रिएक्टर (वीवीईआर) यूनिट हैं, जिन्हें रूस के साथ तकनीकी सहयोग से स्थापित किया गया था। गौरतलब है कि रिलायंस समूह ने अपने एक सर्वर में सीमित डाटा उल्लंघन होने की पुष्टि की है। कंपनी के अनुसार यह सर्वर तीसरे पक्ष की डाटा सेवा प्रदाता कंपनी योट्टा के माध्यम से संचालित किया जा रहा था। कंपनी ने यह भी कहा है कि घटना की जानकारी सरकार को दे दी गई है। भले ही संयंत्र की अखंडता को खतरे में डालने वाली कोई चीज चोरी न हुई हो।
साल 2019 में इसी प्रतिष्ठान के प्रशासनिक नेटवर्क पर मैलवेयर मिला था, लेकिन एनपीसीआईएल का कहना था कि चालू रिएक्टर इससे प्रभावित नहीं हुआ। ताजा घटना उसी थीम का विस्तार है। दरअसल, ‘वर्ल्ड लीक्स’ नाम से कुख्यात एक साइबर अपराधी गिरोह ने दावा किया कि उसने संयंत्र से संबंधित उन्नीस हजार से ज्यादा संवेदनशील फाइलें ‘डार्क वेब’ पर जारी कर दी हैं। ज्यादा चिंता की बात यह है कि जारी दस्तावेजों को चोरी हुए डेटा की आठ लाख अट्ठावन हजार फाइलों का महज एक हिस्सा बताया गया है। ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस प्लेटफार्म ‘रैन्समलुक’ के मुताबिक, यह डेटा 11 जून को ‘वर्ल्ड लीक्स’ पर दिखना शुरू हुआ। मगर एनपीसीआईएल ने औपचारिक स्पष्टीकरण 15 जुलाई को जाकर जारी किया, जब काफी मीडिया रिपोर्ट आ चुकी थीं। लगभग 14.3 जीबी फाइलें जारी की गयीं, जिसमें वेंटीलेशन सिस्टम का लेआउट, कथित “कंट्रोल रूम” का फ्लोर प्लान, आपूर्तिकर्ताओं और वेंडरों की सूचियां और बीमा संबंधी लिखा-पढ़ी शामिल हैं।
जाहिर है यह घटना देश की परमाणु ऊर्जा से संबंधित एक महत्वपूर्ण अवसंरचना के साइबर सुरक्षा तंत्र के मजबूत होने के दावों पर एक सवालिया निशान है। इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद गंभीर घटना माना जा रहा है। हालांकि खबरों के मुताबिक चोरी हुए डेटा में परमाणु संयंत्र के मुख्य तंत्र की रूपरेखा शामिल नहीं है, लेकिन जो ब्योरे उड़ाए गए उनकी वजह से गंभीर नुक्सान पहुंच सकता है। भारत की सुरक्षा-उल्लंघन खुलासा (ब्रीच डिस्क्लोजर) व्यवस्था भरोसेमंद नहीं है और अक्सर ही स्पष्ट रूप से अपारदर्शी है। प्रभावित संगठनों का मानना होता है कि सुरक्षा-उल्लंघन को स्वीकार करना जनता के भरोसे, शेयर की कीमतों, ठेकों को नुक्सान पहुंचायेगा,, ‘वर्ल्ड लीक्स’ कहलाने वाले समूह के हमले में रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े सिस्टम प्रभावित हुए। यह कंपनी यूनिट 3 और 4 के इंजीनियरिंग ठेकेदारों में से एक है। इस घटना में डेटा होस्ट करने वाली योट्टा डेटा सर्विसेज ने बताया कि उसने 29 मई को अपने सर्वरों पर संदिग्ध गतिविधियों का पता लगाया।
परमाणु सुरक्षा विशेषज्ञ निकोलस रोथ ने इस घटना को गंभीर बताया है। उनका कहना है कि यदि किसी हमलावर को यह जानकारी मिल जाती है कि परियोजना में किस व्यक्ति या संस्था की किस प्रणाली तक पहुंच है तो वह भविष्य में कमजोर कड़ियों का फायदा उठाने की कोशिश कर सकता है। साइबर हमलों के लिहाज से भारत फिलहाल दुनिया के सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में से एक है। अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि पिछले वर्ष भारत में 2.89 करोड़ खाते किसी न किसी रूप में साइबर फर्जीवाड़े की जद में आए और पहले भी इसी तरह के हमले एम्स दिल्ली, एयरलाइनों, और राज्य सरकारों के पोर्टलों के खिलाफ झेल चुका है।
आज के परिवेश में सरकार ने कुडनकुलम को भारत की परमाणु ऊर्जा महत्वाकांक्षाओं में सबसे महत्वपूर्ण जगह दी है। जब सीईआरटी-इन एक जांच संचालित कर रही है और रिलायंस व योट्टा ने अपने निष्कर्ष सरकार के साथ साझा किये हैं। सीईआरटी-इन और एनपीसीआईएल को यह भी साफ करना चाहिए कि फाइलों की प्रकृति और प्रामाणिकता क्या है, क्या हमले का पता लगने से पहले डेटा चुरा लिया गया और क्या क्रेडेंशियल्स आईडी, पासवर्ड वगैरह और आपूर्तिकर्ताओं के खातों की गोपनीयता भंग हुई है। यहां बहुत ज्यादा पारदर्शिता तो नामुमकिन है, लेकिन बुनियादी साइबर-स्वच्छता और अग्र-सक्रिय संवाद से कोई समझौता नहीं हो सकता। विडंबना यह है कि कई बार संस्थानों को अपने तंत्र में हुए साइबर हमलों के बारे में पता भी नहीं चल पाता। ऐसे में कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र में हुए साइबर हमले की गंभीरता समझी जा सकती है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा, परिवहन, संचार और रक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में साइबर सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुकी है।
परमाणु संयंत्र में साइबर सेंधमारी : खतरे की घंटी
Summary :
तमिलनाडु के कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र से कथित डेटा लीक के बाद भारत की साइबर सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठे हैं। डेटा लीक की खबरों के बाद न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनपीसीआईएल) ने पुष्टि की कि लीक हुई जानकारी किसी भी परमाणु सुरक्षा प्रणाली से संबंधित नहीं है। तमिलनाडु के तिरुनेलवेली जिले में स्थित कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र में वीवीईआर डिजाइन के छह प्रेशराइज्ड वाटर रिएक्टर (वीवीईआर) यूनिट हैं, जिन्हें रूस के साथ तकनीकी सहयोग से स्थापित किया गया था। गौरतलब है कि रिलायंस समूह ने अपने एक सर्वर में सीमित डाटा उल्लंघन होने की पुष्टि की है।…



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