बात तब की है जब देश में स्व. अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में भाजपा नीत एनडीए सरकार चल रही थी और श्री राम नाइक इसमें पेट्रोलियम मन्त्री थे। 1999 से 2004 तक वह इस पद पर रहे। उनके कार्यकाल के दौरान कच्चे तेल के अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में कई बार हिचकोले आये। भारत का तेल आयात बिल उस समय कुल बजट की धनराशि के आधे से थोड़ा ही कम था। श्री नायक ने तब लोकसभा में तजवीज रखी कि आयात बिल घटाने के लिए भारत में पेट्रोल में ‘इथनाल’ की मिलावट दूसरे देश ब्राजील की तर्ज पर ही की जानी चाहिए। ब्राजील में 1931 में पेट्रोल में 5 प्रतिशत इथनाल का मिश्रण शुरू किया गया था जो अब 30 प्रतिशत तक हो गया है। इसके लिए श्री नाइक ने शुरू में 5 प्रतिशत इथनाल को मिश्रित करने के लिए एक पायलट परियोजना शुरू करने का भी विचार रखा।
भारत में तब आयातित तेल पर आयात शुल्क की दर बहुत कम थी। इस दर को सरकार केवल दोगुना ही बढ़ा सकती थी। इसकी वजह यह थी कि कच्चे तेल के भाव अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में बहुत कम हो गये थे। उस समय वित्त मन्त्री संभवतः श्री यशवन्त सिन्हा थे। तब संसद में कच्चे तेल आयात पर शुल्क दरों को सीमारहित बनाने के लिए एक विधेयक लाया गया जिससे सरकार को राजस्व घाटा कम से कम हो सके। उस समय कुछ राजनीतिज्ञों ने यह सुझाव भी दिया कि कुछ दक्षिणी देशों की तरह भारत को भी घरेलू बाजार में पेट्रोल व डीजल के दाम स्थिर रखने के लिए अपने शुल्क ढांचे को इस तरह लचीला बनाना चाहिए कि अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के उतार-चढ़ाव का उस पर कोई असर न पड़े।
मसलन तेल सस्ता होने पर शुल्क दर बढ़ा दी जाये और महंगा होने पर घटा दी जाये जिससे घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल के भाव स्थिर रह सकें। मगर श्री नाइक ने इथनाल मिश्रण की तकनीक रखी और बताया कि ब्राजील जैसे देश में यह तरीका बहुत सफल रहा है। इससे भारत के किसानों को बहुत लाभ होगा क्योंकि इथनाल का उत्पादन गन्ने के रस के अलावा अन्य कृषि उप-उत्पादों से भी होता है। श्री नाइक की पृष्ठभूमि मूल रूप से ग्रामीण थी और वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के समर्पित कार्यकर्ता भी थे। इथनाल मिश्रण के उनके सुझाव का संसद में ज्यादा विरोध नहीं हुआ और भारत ने इस तरफ लगभग कदम बढ़ाने शुरू कर दिये। मगर आज के भारत में केन्द्रीय सड़क व परिवहन मन्त्री श्री नितिन गडकरी जब पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथनाल मिश्रण के फार्मूले को सिरे चढ़ा रहे हैं तो सोशल मीडिया पर इस बारे में तरह-तरह की अनर्गल भ्रान्तियां फैलाई जा रही है। 2004 के बाद भी भारत में इथनाल मिश्रण की टैक्नोलोजी पर लगातार काम होता रहा मगर 2014 के बाद से इसमें तेजी जरूर आयी। जिसके परिणाम स्वरूप पिछले साल से 20 प्रतिशत इथनाल मिश्रित पेट्रोल भारत के पेट्रोल पंपों पर मिलने लगा।
सोशल मीडिया पर सबसे बड़ा भ्रम यह फैलाया गया कि इस पेट्रोल के इस्तेमाल से मोटर गाडि़यों का इंजन खराब हो जाता है। जो की पूरी तरह बेबुिनयाद है क्योंकि पुणे स्थित ‘आटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन’ ने 20 प्रतिशत इथनाल मिश्रित पेट्रोल वाली मोटर गाडि़यों पर विभिन्न प्रयोग किये जिसके बाद ही यह पेट्रोल पूरे देश में सप्लाई किया गया। इस तथ्य का खुलासा स्वयं श्री गडकरी ने एक अंग्रेजी दैनिक को दिये गये एक साक्षात्कार में किया है।
श्री गडकरी ने यह जरूर स्वीकार किया है कि इसके इस्तेमाल से गाड़ियों का पेट्रोल खपत औसत जरूर थोड़ा बढ़ जाता है। मगर यह केवल दो से तीन प्रतिशत के बीच ही रहता है। सवाल यह है कि क्या भारत के लोग आत्मनिर्भर होने की दिशा में आगे बढ़ने के लिए अपने किसानों की आर्थिक दशा सुधारने के पक्षधर नहीं हैं? एेसा बिल्कुल नहीं है क्योंकि भविष्य में इसका सबसे ज्यादा इस्तेमाल कृषि श्रेत्र के मोटर व अन्य उपकरणों में ही होगा। इसकी वजह यह है कि ट्रैक्टरों से लेकर जेनरेटरों व हार्वेस्टर तक में आगे डीजल की जगह मेथनाल के मिश्रण का प्रयोग होने लगेगा और इससे भी आगे जाकर ब्यूटनाल का प्रयोग होगा। अतः कल्पना की जा सकती है कि भविष्य में किसानों के जीवन में इथनाल किस प्रकार की भूमिका अदा करेगा। मेथनाल व ब्यूटनाल भी कृषि उत्पादों से ही प्राप्त किये जायेंगे। एक महत्वपूर्ण जानकारी श्री गडकरी ने यह भी दी कि सरकार मोटर वाहन उत्पादक कम्पनियों के सीधे सम्पर्क में है और मोटर वाहनों में फ्लेक्सिबिल इंजन लगाने पर जोर दे रही है। इससे मिश्रित पेट्रोल की खपत क्षमता (माइलेज) में 100 प्रतिशत सुधार होगा।
भारत कच्चे तेल के अलावा विदेशों से विभिन्न पेट्रोलियम उप उत्पाद भी खरीदता है जिनका सालाना बिल दो लाख करोड़ रु. के लगभग का होता है। इथनाल रूट पर जाने से इन उत्पादों का उत्पादन भी भारत में बहुतायत में हो सकेगा। इसके साथ ही देश में पुरानी कारों में धातु के वाशर लगे होने की वजह से दिक्कत आती है मगर अब जो भी गाड़ी सर्विस के लिए जायेगी उसके वाशर रबड़ के वाशरों से बदल दिये जायेंगे और अतिरिक्त खर्च भी नहीं आयेगा क्योंकि सरकार ने सख्त निर्देश दे दिये हैं कि धातु के वाशरों को रबड़ के वाशरों से बिना किसी खर्चे के बदला जाये।
दरअसल जब से पश्चिम एशिया का संकट आया है तब से सरकार इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है और डीजल की जगह ब्यूटनाल टैक्नोलोजी पर भी काम कर रही है। जरा सोचिये जब ट्रक व बसें भी मेथनाल मिश्रित डीजल या विशुद्ध ब्यूटनाल से सड़कों पर दौड़ेंगी तो भारत का तेल आयात बिल कितना कम हो जायेगा? मेथनाल का उत्पादन भी इथनाल की तरह कृषि उत्पादों से ही होता है। मगर इथनाल प्रयोग को लेकर एक और ही राजनैतिक विवाद पैदा कर दिया गया है। यह विवाद है कि श्री गडकरी के दो पुत्रों सारंग व निखिल की दो कृषि उत्पाद मूलक विविधीकृत कम्पनियां हैं। इनमें से एक इथनाल का उत्पादन भी करती है।
निश्चित रूप से एेसे आरोप राजनैतिक प्रतिद्वन्दिता की वजह से ही लग रहे हैं। मैं एेसा कह कर श्री गडकरी का बचाव बिल्कुल नहीं कर रहा हूं बल्कि वह तथ्य सामने ला रहा हूं जो राजनैतिक पारदर्शिता के लिए बहुत जरूरी होते हैं। इथनाल व मेथनाल आगे आने वाले दिनों के मोटर ईंधन होंगे। भारत के पूर्वोत्तर इलाकों में इनका प्रयोग बसों व ट्रकों में हो भी रहा है। इनसे वायु प्रदूषण भी बहुत न्यूनतम होता है। प्रश्न यह है कि क्या भारत पेट्रोलियम क्षेत्र में आत्मनिर्भर होने के प्रयास सिर्फ इसलिए छोड़ दे कि एक मन्त्री के बेटे का कारोबार इस क्षेत्र में है? भविष्य में इथनाल उत्पादन का सबसे बड़ा क्षेत्र पश्चिमी उत्तर प्रदेश होगा जहां गन्ने की खेती बहुतायत में होती है। इस इलाके में गन्ने के रस से विविध रासायनिक उत्पादन करने का एक बड़ा कारखाना निजी क्षेत्र में पहले से ही गजरौला में स्थित है जिसे वाम आर्गेनिक्स कहा जाता है। यहां गन्ने के रस से ही विभिन्न दैनिक व औद्योगिक क्षेत्र में काम आने वाली वस्तुओं का उत्पादन होता है। अतः 21वीं सदी में भारत के कृषि प्रधान देश होने के मायने बदल सकते हैं और देश के किसान का रुतबा भी बदल सकता है। पेट्रोलियम क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता बहुत जरूरी है क्योंकि भारत का आयात बिल आज की तारीख में भी बहुत ज्यादा है जिसमें विदेशी मुद्रा की ही खपत होती है। भारत इस दिशा में बिजली से चलने वाले वाहनों पर भी जोर देकर बढ़ रहा है। हमने रेलवे के सभी इंजन बिजली चालित में बदल दिये हैं। यह काम एक दिन में पूरा नहीं हुआ है बल्कि हर सरकार ने इस दिशा में प्रयास किये हैं।
पेट्रोल-डीजल में आत्मनिर्भरता जरूरी
Summary :
बात तब की है जब देश में स्व. अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में भाजपा नीत एनडीए सरकार चल रही थी और श्री राम नाइक इसमें पेट्रोलियम मन्त्री थे। 1999 से 2004 तक वह इस पद पर रहे। उनके कार्यकाल के दौरान कच्चे तेल के अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में कई बार हिचकोले आये। भारत का तेल आयात बिल उस समय कुल बजट की धनराशि के आधे से थोड़ा ही कम था। श्री नायक ने तब लोकसभा में तजवीज रखी कि आयात बिल घटाने के लिए भारत में पेट्रोल में ‘इथनाल’ की मिलावट दूसरे देश ब्राजील की तर्ज पर ही की जानी…


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