‘घर जला मेरा पर मसला चिरागों व हवाओं के बीच का था
मेरा कुसूर बस यही था कि ये दीया मेरे घर की दहलीज पर था’
पिछले डेढ़ दशकों से भारतीय राजनीति को एक नया चेहरा मोहरा देने के प्रयासों में जुटी भाजपा और उसके सियासी स्वांगों के समक्ष पस्त पड़ते विपक्ष को देखना कोई नया अनुभव नहीं, पर गुरुवार को जिस तरह महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक 54 वोटों से औधे मुंह लुढ़क गया, सियासी हलकों में इसने एक नई बहस छेड़ दी है। खास कर इस बिल को लोकसभा का विशेष सत्र बुला कर उसमें इसे पेश करने की टाइमिंग को लेकर। ‘सो, बिल के गिरते ही भाजपा ने अपने कैडर से कह दिया कि ‘देश भर में भाजपा की महिला नेत्रियों और कार्यकर्ताओं की अगुवाई में जगह-जगह विपक्ष के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन आहूत हों जिससे यह साबित किया जा सके कि ये विपक्षी दल अपने मूल में महिला विरोधी हैं।’ वैसे यह भी सच है कि 2014 के बाद दिल्ली की सत्ता पर काबिज होने के बाद सरकार को पहली बार सदन में किसी बिल पर इतनी बड़ी हार का सामना करना पड़ा। दूसरी ओर 16 अप्रैल से पहले तक भाजपा रणनीतिकार कथित तौर पर 50-55 विपक्षी सांसदों के लगातार संपर्क में थे, इन्हें भरोसा था कि ‘मतदान के दिन ये विपक्षी सांसद सदन से गैर हाजिर रह जाएंगे।’ पर इस बार विपक्ष कुछ ज्यादा ही चौकस था, सपा, तृणमूल, कांग्रेस जैसे बड़े सांसदों वाले दलों ने अपने सांसदों की निगरानी बढ़ा दी थी और वे उनकी पल-पल की खबर रख रहे थे। महिला आरक्षण संशोधन विधेयक, परिसीमन संशोधन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन विधेयक पर मतदान से पहले ही सरकार के संकटमोचकों को इस बात का इल्म हो गया था कि ‘वे जरूरी गिनती नहीं जुटा पाए हैं, क्योंकि इनका अखिलेश पर पूरा भरोसा था कि वे आखिरी समय पर कुछ खेल कर देंगे।’ जब भाजपा को पता था कि वह दो-तिहाई सांसदों का जुगाड़ नहीं कर पाई है, बावजूद इसके सरकार ने महिला बिल पर मतदान के लिए हरी झंडी दे दी ताकि इसके फेल होने का ठीकरा विपक्ष पर फोड़ा जा सके और इसे एक चुनावी हथियार बनाया जा सके। अपने वृहद प्रचार तंत्र की ताकत पर अब भाजपा खुद को महिला हितैशी और विपक्ष को महिला विरोधी ठहराने पर तुल गई है। सनद रहे कि 2012 के बाद संसद में गिरने वाला यह पहला संविधान संशोधन विधेयक है।
सुप्रीम कोर्ट को चाहिए महिला जज : एक ओर जहां देश की सर्वोत्तम अदालत सुप्रीम कोर्ट को सितंबर 2027 में अपनी पहली महिला चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया बी वी नागरत्ना का इंतजार है, उम्मीद यही जताई जा रही है कि वरिष्ठता के आधार पर महज कुछ दिनों यानी लगभग एक महीने के लिए ही सही वह सितंबर 2027 में यह अहम जिम्मा संभाल सकती हैं। पर स्वयं जस्टिस नागरत्ना सुप्रीम कोर्ट में महिला जजों की गैर मौजूदगी को लेकर चिंता जता रही हैं, क्योंकि फिलवक्त वह सुप्रीम कोर्ट की एकमात्र महिला जस्टिस हैं। जस्टिस बेला एम त्रिवेदी के रिटायरमेंट के बाद यह शून्य और बड़ा हो गया है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत भी इस बात के पक्षधर बताए जाते हैं कि ‘देश की सुप्रीम अदालत में महिला जजों की मौजूदगी अवश्य रहनी चाहिए।’ अभी सुप्रीम कोर्ट में दो जजों के स्थान रिक्त हैं, इनमें से कम से कम एक स्थान पर किसी महिला जज की नियुक्ति के उपक्रम साधे जाने लगे हैं, इसके लिए फिलवक्त तीन नामों पर विचार चल रहा है, जिसमें से पहला नाम है गुजरात हाई कोर्ट की मौजूदा चीफ जस्टिस सुनीता अग्रवाल का। इनका नाम वरिष्ठता में सबसे आगे चल रहा है। दूसरा नाम है आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस लिजा गिल का, जिन्होंने पिछले माह ही पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट से निकल कर यह महती जिम्मेदारी संभाली है। तीसरा नाम है कर्नाटक हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस अनु सिवारमन का।
जजों के पद भरने की कवायदः चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत देश की विभिन्न अदालतों में जजों की रिक्त पड़ी वेंकेसी को भरने के लिए किंचित गंभीर जान पड़ते हैं। चीफ जस्टिस चाहते हैं कि जजों के इन रिक्त पड़े स्थानों को भरने में और तेजी लाई जाए। सो, चीफ जस्टिस की भावनाओं को समझते हुए जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट के लिए कोलेजियम ने 11 नामों की सिफारिश की है। वर्तमान में जम्मू-कश्मीर हाई कार्ट में 13 जज हैं, पर यहां जजों की कुल क्षमता 25 की है। यानी 12 स्थान अब भी रिक्त पड़े हैं।
निशांत के लिए नीतीश : जो लोग नीतीश के राजनैतिक पराभव की भविष्यवाणियों में जुटे हैं, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार उन्हें आने वाले वक्त में बेतरह हैरान कर सकते हैं। दरअसल, सम्राट चौधरी को अपने उत्तराधिकारी के तौर पर स्थापित करने में नीतीश की एक महती भूमिका रही। नीतीश चाहते थे कि उनके मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद भी बिहार में लव-कुश गठजोड़ की महत्ता बरकरार रहे, लव-कुश यानी कुर्मी-कोइरी गठजोड़ जिसकी बिहार की आबादी में हिस्सेदारी लगभग 15 फीसदी है। नहीं तो संघ और सरकार की पसंद तो नित्यानंद राय थे, पर नीतीश नहीं चाहते थे कि ‘बिहार की गद्दी उनके बाद किसी यादव नेता के पास चली जाए।’ सो, उन्होंने रणनैतिक तौर पर अपनी ओर से सम्राट का नाम आगे किया, सम्राट को वैसे भी सरकार का वरदहस्त प्राप्त था। नीतीश सबसे पहले अपने पुत्र निशांत के नाम के आगे-पीछे से विवादों की कोई भी फेहरिस्त हटाना चाहते थे, कहते हैं गुरुवार को संपन्न हुई जदयू कोर कमेटी की बैठक की अध्यक्षता पार्टी कार्यालय में स्वयं निशांत ने की। सूत्रों की मानें तो आने वाले दिनों में निशांत को संजय झा की जगह पार्टी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाया जा सकता है। इस नई भूमिका में उसे तैयार करने के बाद नीतीश अपने पुत्र को एक वर्ष के लिए बिहार का सीएम बनाने की मांग कर सकते हैं, भाजपा को भी नीतीश की मांग पर बेहद सहानुभूतिपूर्वक विचार करना होगा क्योंकि तब नीतीश यह जताना नहीं भूलेंगे कि मौजूदा विधानसभा में उनकी पार्टी के भी 85 विधायक हैं, रही बात नीतीश के दो बेहद खास सिपहसलारों यानी राजीव रंजन उर्फ लल्लन सिंह तथा संजय झा की, तो विजेंद्र यादव और विजय चौधरी को सम्राट का डिप्टी सीएम बनवा कर नीतीश ने पहले ही ललन व संजय झा को ‘कट टू साइज’ में रखने का काम कर दिया है।
क्या बिहार से ‘शराब बंदी’ हटेगी? : विश्वस्त सूत्रों की मानें तो बहुत जल्द बिहार में ‘शराब बंदी’ हटने वाली है। सूत्र यह भी बताते हैं कि बिहार के नए नवेले मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी मई की अपनी पहली कैबिनेट में ‘शराब बंदी’ हटाने का फैसला ले सकते हैं। इसकी दो वजहें बताई जा रही हैं, पहली यह कि ‘शराब बंदी’ लागू होने के बाद भी बिहार में हर जगह ब्लैक में शराब उपलब्ध है, दूसरा इससे सरकारी खजाने को रेवेन्यु का भारी नुक्सान हो रहा है, वहीं स्थानीय माफिया, पुलिस-प्रशासन इससे खूब चांदी काट रहे हैं। पिछले दिनों बिहार के रेवेन्यु विभाग के रिकार्ड से यह जानकारी सामने आई थी कि ‘बिहार में शराब बंदी लागू होने के बाद जमीनों की जितनी नई रजिस्ट्री हुई है, उसमें से लगभग 70 फीसदी जमीन की खरीद पुलिस वालों ने की है।’ यानी कहीं न कहीं राज्य में पुलिस ‘शराब बंदी’ की सबसे बड़ी लाभार्थी के तौर पर अवतरित हुई। दूसरा बिहार में राजस्व उगाही में लगातार भारी कमी दर्ज हुई है, जिसका प्रभाव विभिन्न विकास योजनाओं पर भी पड़ा है। समझा जाता है कि दिल्ली ने भी बिहार के नए सीएम से कहा है कि ‘राज्य सरकार को अपना राजस्व बढ़ाना होगा, कमाई के नए स्त्रोत ढूंढने होंगे।’ ऐसे में शराब बिक्री से राज्य खजाने में एक भारी आमद आ सकती है।
कौन हैं ये मंत्री जी? : भाजपा सरकार के यह मंत्री गठबंधन कोटे से आते हैं, लो-प्रोफाइल रहते हैं, पर समझा जाता है कि पिछले कुछ समय से ये बेहद हाई प्रोफाइल कमाई कर रहे हैं। कहते हैं उच्च अधिकारियों की नजर भी इस मंत्री जी पर तब पड़ी जब इन्हें सूचना मिली की मंत्री के पुत्र ने हाल के दिनों में 12 करोड़ रुपयों की कीमत का कारों का जखीरा खरीदा है। इनके जखीरे में लैंड रोवर से लेकर महंगी विदेशी गाड़ियां शामिल हैं। कहते हैं मंत्री के साथ ‘डिपार्टमेंट ऑफ हेल्थ रिसर्च’ का एक अधिकारी जुड़ा हुआ है, जो उनके लिए तमाम डील को अंजाम देता है, चाहे मेडिकल या आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज में सीट बढ़ाने का मामला हो या कोई अन्य। कहते हैं मंत्री जी को सरकार की ओर से अब अल्टीमेटम दिए जाने की पूरी तैयारी हो चुकी है।
…और अंत में : राजनीति में अब भी कुछ पढ़ने-लिखने वाले लोग शेष हैं, वरना इस नए दौर की नई राजनीति में अंगूठा छाप राजनेताओं की ही बल्ले-बल्ले है। कांग्रेस शासन काल में लंबे समय तक कानून मंत्री रहे डॉ. वीरप्पा मोइली जरूर याद होंगे आपको। अभी पिछले दिनों बतौर लेखक वीरप्पा मोइली की 50वीं पुस्तक ‘ भारतीय न्यायशास्त्र (रिफलेक्षनस ऑन इंडियन ज्यूरीप्रूडेंस एंड परसपेक्टिव फॉर पोस्टेरिटी)’ बाजार में आई हैं। जो भारतीय न्यायशास्त्र की मूल भावनाओं की तहकीकात करती है। अभी हाल में ही इस पुस्तक का विमोचन ‘ओ पी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी’ में किया गया, इस पुस्तक की प्रस्तावना भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डॉ. एम एन वेंकट चलैया ने लिखी है। दिलचस्प है कि एक पूर्णकालिक राजनेता होने के बावजूद मोइली ये हजार-हजार पृष्ठों की किताब लिखने का समय निकाल पाते हैं। कहां वक्त गुजरने के साथ राजनेताओं की यह पौध बस अतीत बनकर ही न रह जाए।
बिल से निकले विपक्षी हौंसले
Summary :
‘घर जला मेरा पर मसला चिरागों व हवाओं के बीच का था मेरा कुसूर बस यही था कि ये दीया मेरे घर की दहलीज पर था’ पिछले डेढ़ दशकों से भारतीय राजनीति को एक नया चेहरा मोहरा देने के प्रयासों में जुटी भाजपा और उसके सियासी स्वांगों के समक्ष पस्त पड़ते विपक्ष को देखना कोई नया अनुभव नहीं, पर गुरुवार को जिस तरह महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक 54 वोटों से औधे मुंह लुढ़क गया, सियासी हलकों में इसने एक नई बहस छेड़ दी है। खास कर इस बिल को लोकसभा का विशेष सत्र बुला कर उसमें इसे…


Download Android App
Download iOS App



