नारी वंदन बिल जिसकी चर्चा दो दिन टीवी पर सुनी। एक-एक के विचार सुने, समझे। इस बिल के नैगेटिव-पॉजिटिव प्वाइंट सुने, क्योंकि यह बिल करोड़ों महिलाओं की उम्मीदों से जुड़ा हुआ है लेकिन दुर्भाग्यवश यह बिल पास नहीं हो पाया। इसी कारण यह आज एक अधूरी उम्मीद बनकर हमारे सामने खड़ा है। नारी वंदन बिल का उद्देश्य बहुत स्पष्ट था। महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देना, ताकि वे देश के निर्णयों में अपनी मजबूत भागीदारी निभा सकें। यह बिल केवल एक कानून नहीं था, यह महिलाओं के आत्मसम्मान, अधिकार और पहचान की बात थी।
जब यह बिल पास नहीं हो पाया तो सबसे बड़ा नुक्सान यह हुआ कि महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम रुक गया। देश की लाखों बेटियों को जो प्रेरणा मिलनी थी वह अधूरी रह गई और सबसे बड़ी बात हम एक मजबूत संदेश देने से चूक गए कि भारत महिलाओं को बराबरी देने के लिए पूरी तरह तैयार है। महिला आरक्षण बिल को लेकर प्रधानमंत्री मोदी खुद बहुत उत्साहित थे और उन्होंने देश की महिला शक्ति को सम्मान दिए जाने की जरूरत पर बल दिया था। इतना ही नहीं उन्होंने सभी राजनीतिक दलों को पत्र भी लिखा था। जिसमें उन्होंने नेताओं से आग्रह किया था कि महिलाओं को प्रगति करने, निर्णय लेने और नेतृत्व करने का अवसर प्रदान करने के लिए सब एक हो जाएं। पीएम ने कहा था कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के अपने सपने को साकार करने के लिए महिलाओं को इस यात्रा में शामिल करने का मौका दिया जाना चाहिए। विस्तृत विचार-विमर्श के बाद नारी शक्ति वंदन अधिनियम लागू करने के लिए एकजुटता जरूरत है। पीएम ने कहा था कि मैं खुुद चाहता हूं कि 2029 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव महिलाओं के लिए आरक्षण के साथ ही कराए जाएं। उनकी यह बातें सचमुच दिल से निकली थीं। वह महिलाओं को लोकतंत्र में बराबरी का अधिकार दे रहे थे लेकिन उनकी भावनाओं का और उनके प्रयासों को महान मानते हुए उनका आभार मानते हैं और कलम उनके योगदान की वंदना कर रही है।
अगर हम इतिहास देखें तो हमारे देश की महिलाओं ने हर क्षेत्र में अपनी शक्ति साबित की है और 2014 से तो महिलाएं नभ-जल-थल में सबसे आगे हैं। चन्द्रयान के काम में 35 महिलाओं का योगदान, राम मंदिर के लिए लक्ष्मी भाणा मंदिर को घंटों नंगे पांव ट्रक चलाकर अयोध्या लाई। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ यूं तो वैदिक काल से महिलाएं अपना योगदान दिखा चुकी हैं परन्तु मध्यकाल में बाल विवाह, सती प्रथा, दहेज प्रथा, भ्रूण हत्या जैसे कई कुरीतियों का सामना करना पड़ा। परन्तु 2014 से मोदी जी उनकी हर जरूरत, हर सम्मान का ध्यान रख रहे हैं। यही नहीं इतिहास गवाह है रानी लक्ष्मीबाई, दुर्गा भाभी, सरोजनी नायडु, इंदिरा गांधी ने देश का नेतृत्व किया। सुषमा स्वराज ने अपनी वाणी और कार्यशैली से लाखों के दिल जीते। निर्मला सीता रमण आज देश की आर्थिक नीतियों का नेतृत्व कर रही हैं। हमारी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी का योगदान और एक सफल राष्ट्रपति होना किसी से छुपा नहीं और हमारी दिल्ली की सीएम हमारी सबकी प्यारी रेखा गुप्ता तो 100 की स्पीड से चलकर काम कर रही हैं। लोगों के दिलों में अपने सफल काम से जगह बना रही हैं। जब ये महिलाएं बिना आरक्षण के इतना कुछ कर सकती हैं, अगर हजारों महिलाओं को मौका मिले तो देश कितनी तेजी से आगे बढ़ सकता है। नारी वंदन बिल भले ही पास नहीं हो पाया, लेकिन नारी सशक्तिकरण का यह सपना कभी असफल नहीं होगा। यह एक शुरूआत है, एक संदेश है, एक चेतावनी है, यह एक अधूरी उम्मीद जागृति की शुुरूआत है। यह एक क्रांति है यह केवल बिल पास करने की नहीं सोच बदलने की, क्योंकि अब नारी अबला नहीं सबला है।
देश की असली ताकत है। नारी उठेगी तो इतिहास बदलेगा। नारी बढ़ेगी तो भारत आगे बढ़ेगा। जिस देश में, क्षेत्र में नारी को अवसर नहीं मिलता वह देश प्रगति की दौड़ में पीछे रह जाता है। आज हमें केवल अफसोस नहीं करना हमें अपने सिस्टम से भी सवाल करने हैं। हमें बिना बिल के भी महिलाओं को आगे बढ़ाना है। राजनीतिक, सामाजिक क्षेत्र में आगे लेकर जाना है। हां इस बिल की चर्चा में एक बात अच्छी दिखी कि प्रियंका गांधी और अमित शाह जी ने एक-दूसरे की तारीफ की और एक सम्मानित सदस्य की तरह एक-दूसरे को सम्बोधन किया, अन्यथा पार्लियामैंट में सदस्य हदें पार कर देते हैं। यह भी अच्छी शुरूआत है। अंत मैं यही कहूंगी अगर नारी ‘‘शक्ति है तो उसे सत्ता में हिस्सा क्यों नहीं। अगर नारी देवी है तो उसे निर्णय लेने का अधिकार क्यों नहीं। सच्चाई हमेशा कड़वी होती है। हम नारी की पूजा तो करते हैं लेकिन उसे बराबरी का मौका देने में आज भी हिचकिचाते हैं। क्यों नहीं हम स्वीकार करते और समझते कि जहां नारी, महिला, बेटी का सम्मान होगा, उसका अधिकार होगा तभी भारत महान बन सकेगा।























