होर्मुज बना हथियार

49 दिनों बाद ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट खोलने के ऐलान के कुछ घंटे बाद ही इसे फिर से बंद किए जाने की खबर से दुनियाभर में फिर हताशा फैल गई। 28 फरवरी को अमेरिका-इजराइल के ईरान पर हमला करते ही होर्मुज स्ट्रेट पर जहाजों की आवाजाही बाधित हो गई थी। कुछ दिन बाद ईरान ने इसे पूरी तरह से बंद कर दिया था जिससे पूरी दुनिया में हाहाकार मचा हुआ है। अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस की कीमतों में बढ़ौतरी हो चुकी है। ईरान ने अमेरिका पर वादा तोड़ने का आरोप लगाते हुए इस समुद्री मार्ग को फिर से बंद कर दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की अस्थिर मानसिकता एक बार फिर सामने आ गई जब उन्होंने धमकी दी कि ईरान ने भले ही होर्मुज स्ट्रेट को खोल दिया है लेकिन अमेरिका तब तक होर्मुज की नाकेबंदी जारी रखेगा जब तक ईरान से उनकी डील नहीं हो जाती। ट्रम्प की इस धमकी के बाद ईरान ने भी अपना रुख कड़ा कर लिया और अमेरिका से आगे की बातचीत करने से साफ इंकार कर दिया। ट्रम्प ने नाकेबंदी इ​सलिए लगाई थी जिसका उद्देश्य तेहरान पर दबाव बनाकर होर्मुज को खुलवाना और पाकिस्तान की मध्यस्थता से हुए युद्ध विराम को स्वीकार कराना था।
ईरान द्वारा इस समुद्री रूट को खोलने की घोषणा के बावजूद ट्रम्प की धमकियां ईरान पर दबाव बनाए जाने की रणनीति का ही हिस्सा है। अस्थिर युद्ध विराम के बीच कुछ अनसुलझे मुद्दे अभी भी सामने हैं जैसे ईरान के संवर्धित यूरेनियम क्या अमेरिका हासिल कर लेगा? क्या ईरान अपना मिसाइल कार्यक्रम धीमा करेगा? दिनभर ऐसी रिपोर्टें भी खबरिया चैनलों पर आती रहीं कि अमेरिका अरबों डॉलर देकर उसका यूरेनियम डस्ट खरीद लेगा लेकिन ईरान की शक्तिशाली आईआरजीसी ने अमेरिकी दावों को नकार दिया। होर्मुज पर तनातनी के बाद युद्ध विराम का भविष्य अनिश्चित हो गया। ईरान ने युद्ध के बीच होर्मुज स्ट्रेट को एक सुपर हथियार के रूप में इस्तेमाल करते हुए अपनी रणनीतिक बढ़त बनाई हुई है। छोटी पनडुब्बियों और बारूदी सुरंगों के जरिये इस समुद्री मार्ग पर नियंत्रण कर ईरान ने वैश्विक तेल आपूर्ति को बाधित कर आर्थिक दबाव बनाने का जरिया बना लिया है। ईरान ने इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों से फीस वसूलने के आरोप झेलते हुए इसे अपनी कमाई का जरिया भी बना लिया। ईरान जानता है कि इस समुद्री मार्ग को नियंत्रित कर किसी भी पारम्परिक सैन्य ताकत के मुकाबले कहीं ज्यादा रणनीतिक फायदे वाला है।
पूरी दुनिया उस भयावह स्थिति में वापिस नहीं लौटना चाहेगी जब ट्रम्प ने एक सभ्यता को समाप्त करने की धमकी दी थी और ईरान ने महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की रक्षा के लिए मानव ढालों का इस्तेमाल किया था। वह क्षण दहशत का चरम था जब दोनों पक्ष अपनी-अपनी जीत का दावा करते हैं तो इसका मतलब यही होता है कि कोई भी पक्ष लड़ाई जारी रखने का जोखिम नहीं उठाना चाह रहा। यह भी सच्चाई है कि ट्रम्प युद्ध से बाहर निकलने के रास्ते तलाश कर रहे थे और ईरान भी नाजुक मोड़ पर पहुंच चुका था। युद्ध विराम के बावजूद एक बुनियादी दिक्कत बनी हुई थी, वह थी हिजबुल्लाह। लेबनान में जंग इजराइल और लेबनानी सेना के बीच नहीं, बल्कि इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच है। हिजबुल्लाह वार्ता का हिस्सा नहीं रहा है। हिजबुल्लाह के कुछ नेताओं ने कहा है कि अगर इजराइली हमले बंद हो जाते हैं तो उनकी सेना इजराइल पर हमले करना बंद कर देगी। यह शिया उग्रवादी समूह कमजोर तो हो गया है, लेकिन अभी तक पराजित नहीं हुआ है। इजराइल ने यह भी कहा है कि वह दक्षिणी लेबनान में अपने कब्जे वाले इलाके से सैनिकों को वापस नहीं बुलाएगा, जबकि हिजबुल्लाह 2 मार्च से पहले की स्थिति में लौटने पर जोर दे रहा है। नेतन्याहू का कहना है कि लेबनान के साथ शांति समझौते का एक ‘ऐतिहासिक मौका’ है, लेकिन ऐसे किसी भी समझौते में लेबनानी सेना से कहीं ज्यादा मजबूत और एक व्यापक राजनीतिक एवं सामाजिक नेटवर्क बनाए रखने वाले हिजबुल्लाह को शामिल किए जाने की संभावना नहीं है। हालांकि अब युद्धविराम लागू हो चुका है, लेकिन शांति अभी भी दूर की कौड़ी ही है।होर्मुज स्ट्रेट खुलने की खबर से भारत समेत पूरी ​दुनिया को राहत मिली थी। कच्चे तेल की कीमतें 12 फीसदी टूटकर 83 डॉलर प्रति बैरल तक आ गई थी। सप्लाई चेन की बाधाएं खत्म होने की उम्मीद से वैश्विक शेयर बाजार गुलजार हो गए थे। युद्ध टलने की खबर से निवेशकों का रुझान सोना-चांदी में फिर से देखा गया था। उम्मीद लगाई जा रही थी कि तेल और गैस की सप्लाई सामान्य होने से महंगाई का खतरा टल जाएगा लेिकन गुड न्यूज बैड न्यूज में बदल गई। अब तेल और ऊर्जा संकट गहराया जाना तय है। अगर यही हाल रहा तो कीमतें बढ़ना तय हैं। भारत क्योंकि अपनी जरूरत का ज्यादा तेल खाड़ी देशों से मंगाता है इसलिए उसका तेल आयात बिल रोजाना बढ़ रहा है। ईरान के पास परमाणु बम भले ही न हो लेकिन उसने होर्मुज को अपना ताकतवर हथियार बना लिया है। देखना होगा इस युद्ध का परिणाम क्या निकलता है।

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