नई दिल्ली, 24 सितंबर (आईएएनएस)। हिंदू धर्म में पंचांग का काफी महत्व होता है। कोई शुभ काम, यात्रा, निवेश या पूजा-पाठ करने से पहले पंचांग जरूर देखा जाता है। पंचांग हिंदू काल-गणना पद्धति है जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है।
25 सितंबर 2026 को भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि रात 11:07 बजे तक रहेगा। इसके बाद पूर्णिमा तिथि शुरू हो जाएगी। शुक्रवार सुबह 6:20 बजे सूर्योदय और शाम 5:16 बजे सूर्यास्त होगा। वहीं, शाम 5:27 चंद्रोदय और तड़के 5:42 बजे चंद्रास्त होगा।
शुक्रवार को अनंत चतुर्दशी मनाई जाएगी। इस दिन भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा की जाती है। संकटों से रक्षा के लिए हाथ में अनंत सूत्र (धागा) बांधा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत के पालन से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है तथा अंत में साधक को बैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है।
पंचांग के अनुसार इस दिन सूर्य उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा। यह आकाश मंडल का 12वां नक्षत्र है। सिंह राशि के 26 डिग्री 40 मिनट से लेकर कन्या राशि के 10 डिग्री 00 मिनट तक फैला हुआ है। इसके स्वामी सूर्य देव हैं। इस नक्षत्र के देवता अर्यमा (देवताओं और पितरों के प्रमुख) हैं। इस नक्षत्र में जन्मे जातक तेजस्वी, महत्वाकांक्षी, परोपकारी और नेतृत्व क्षमता से परिपूर्ण होते हैं।
शुक्रवार दोपहर लगभग 2:49 बजे तक शूल योग रहेगा। ज्योतिष पंचांग के 27 नित्य योगों में से नौवां योग शूल योग है, जिसे सामान्यतः एक अशुभ और संघर्षकारी योग माना जाता है। ‘शूल’ का शाब्दिक अर्थ ‘कांटा’, ‘भाला’ या ‘नुकीला अस्त्र’ होता है। जब सूर्य और चंद्रमा की स्थितियों का योग एक निश्चित अंश (विशेषकर 106 डिग्री 40 मिनट से 120 डिग्री 00 मिनट के बीच) होता है, तब यह नित्य शूल योग बनता है। इस दौरान कोई भी शुभ काम करने से बचना चाहिए।
इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:54 से दोपहर 12:42 बजे तक रहेगा। यह दिन का सबसे शुभ और फलदाई समय माना जाता है। आमतौर पर यह लगभग 48 मिनट (या दिनमान के अनुसार गणना किया गया आठवां मुहूर्त) होता है। माना जाता है कि इस मुहूर्त में किए गए कार्यों से सभी प्रकार के अशुभ प्रभाव या दोष स्वतः नष्ट हो जाते हैं। जब सूर्य ठीक सिर के ऊपर रहते हैं तब अभिजीत मुहूर्त की बेला होती है।
शुक्रवार को अमृतकाल तड़के 3:23 से 5:00 बजे तक रहेगा। ज्योतिष और पंचांग के अनुसार, अमृतकाल एक अत्यंत शुभ, मंगलकारी और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर समयावधि (मुहूर्त) होता है। इसे अमृत के समान उत्तम फल देने वाला माना जाता है। इस दौरान किए गए कार्यों में सफलता की संभावना सबसे अधिक होती है। नए व्यापार, निवेश, पूजा-पाठ, और महत्वपूर्ण यात्रा के लिए यह समय श्रेष्ठ माना गया है।
इस दिन राहुकाल सुबह 10:49 बजे से दोपहर 12:18 बजे तक रहेगा। हिन्दू ज्योतिष के अनुसार, राहुकाल दिन का वह समय होता है जिसे किसी भी नए या शुभ कार्य की शुरुआत के लिए अशुभ माना जाता है। राहुकाल को सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच के समय को 8 बराबर भागों में बांटकर निकाला जाता है, जो हर दिन लगभग 90 मिनट का होता है। स्थान बदलने के साथ इसके समय में भी बदलाव हो जाता है। इस दौरान कोई नया काम शुरू नहीं करना चाहिए, लेकिन जो काम पहले से चल रहे हैं, उन्हें जारी रखा जा सकता है।
शुक्रवार को गुलिक काल सुबह 7:49 से 9:19 बजे तक रहेगा। गुलिक काल को ‘विषैला समय’ भी कहा जाता है। यह एक उपग्रह है, इसको अशुभ माना जाता है। माना जाता है कि इस काल में किए गए कार्य नकारात्मक परिणाम देते हैं। इस काल में कोई नया काम शुरू करने से बचना चाहिए, लेकिन जो काम पहले से चल रहे हैं, उनको जारी रखा जा सकता है। जो काम बार-बार करना चाहते हैं तो इस काल में किया जा सकता है। बैंक में पैसे जमा करना, दान देना या निवेश करना इस काल में अच्छा माना जाता है।
इस दिन यमगंड काल दोपहर 3:17 से 4:47 बजे तक रहेगा। यह समय मृत्यु के देवता यमराज से जुड़ा हुआ माना जाता है। इस समय के दौरान स्वास्थ्य, दीर्घायु या सामान्य दुर्भाग्य से संबंधित बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। इस काल को नए कार्यों की शुरुआत के लिए अशुभ माना जाता है। नया व्यापार या नया काम शुरू करने से बचना चाहिए। इस दौरान किसी यात्रा पर भी निकलने से बचना चाहिए और पैसों के लेनदेन से भी बचना चाहिए।
शुक्रवार को सूर्य कन्या राशि में स्थित रहेंगे, जब सूर्य कन्या राशि में प्रवेश करते हैं, तो इसका प्रभाव व्यक्ति के जीवन, कामकाज और बौद्धिक क्षमता पर विशेष रूप से पड़ता है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, इस दौरान व्यावहारिक और योजनाबद्ध तरीके से काम करना लाभकारी माना जाता है।
इस दिन चंद्रमा कुंभ राशि में स्थित रहेगा। चंद्रमा का कुंभ राशि में रहना लोगों के आत्मविश्वास, ऊर्जा और कार्यक्षमता को बढ़ाने वाला रहेगा। इस दौरान सोचे हुए कार्य समय पर पूरे हो सकते हैं और नए अवसरों की प्राप्ति हो सकती है। नौकरी में अपनी काबिलियत दिखाने का मौका मिलेगा। व्यापार में नई रणनीति या योजना बनाने के लिए यह समय अनुकूल है। नए संपर्क से लाभ मिलने के योग हैं।
शुक्रवार को दिशाशूल पश्चिम दिशा में रहेगा। ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार, दिशाशूल उस अशुभ दिशा को कहते हैं, जिसमें किसी खास दिन यात्रा करना या निकलना अशुभ माना जाता है।
–आईएएनएस
एसडी/वीसी
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