अदाणी समूह की विकास रणनीति स्थानीय नौकरियों और सम्मानजनक जीवन को बढ़ावा देने पर केंद्रित : गौतम अदाणी

अहमदाबाद, 1 मई (आईएएनएस)। अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी ने शुक्रवार को कहा कि समूह की विकास रणनीति स्थानीय नौकरियों और सम्मानजनक जीवन को बढ़ावा देने पर केंद्रित रहेगी।

गौतम अदाणी का यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब अदाणी ग्रुप तेजी से विस्तार और पूंजीगत व्यय में बढ़ोतरी कर रहा है।

अंतरराष्ट्रीय श्रम दिवस के अवसर पर समूह के कर्मचारियों को संबोधित करते हुए गौतम अदाणी ने कहा कि समूह अपनी प्रगति का आकलन सृजित संपत्तियों, सक्षम आजीविकाओं और सशक्त बनाए गए समुदायों के आधार पर करेगा और अपने कार्यबल को राष्ट्र निर्माण के केंद्र में रखेगी।

अदाणी समूह 24 राज्यों में 700 से ज्यादा संपत्तियों का संचालन करता है और 4 लाख के करीब कर्मचारी संगठन से जुड़े हुए हैं।

अरबपति उद्योगपति ने कहा, “आप सिर्फ कर्मचारी नहीं हैं; आप राष्ट्र निर्माता हैं। जब हम कोई परियोजना पूरी करते हैं, तो हम सिर्फ काम नहीं सौंप रहे होते, बल्कि देश के भविष्य को आकार दे रहे होते हैं।”

आगे कहा कि समूह परियोजना स्थलों पर स्थानीय भर्ती को प्राथमिकता देगा, पहले आस-पास के समुदायों को, फिर राज्य के भीतर के उम्मीदवारों को और अंत में आवश्यकता पड़ने पर राज्य के बाहर के उम्मीदवारों को भी अवसर प्रदान करेगा।

संगठन के लिए श्रमिकों का कल्याण रणनीति का एक प्रमुख स्तंभ बना हुआ है। कंपनी मुंद्रा और खावड़ा में 50,000 कर्मचारियों के लिए वातानुकूलित आवास का निर्माण कर रही है, साथ ही गुजरात के मुंद्रा में एक केंद्रीकृत क्लाउड किचन भी स्थापित कर रही है, जो प्रतिदिन 1,00,000 पौष्टिक भोजन परोसेगी, जिसका उद्देश्य दूरस्थ स्थानों पर जीवन स्तर में सुधार करना है।

गौतम अदाणी ने कहा,“यह कोई विशेषाधिकार नहीं है। यह एक आवश्यकता है। प्रत्येक कर्मचारी को गरिमापूर्ण जीवन जीने और काम करने का अधिकार है।”

यह रणनीति तीन स्तंभों पर आधारित है और मजबूत तरलता और पूंजी तक पहुंच द्वारा समर्थित है, जिससे पूंजीगत व्यय में तेजी लाने और परियोजनाओं को शीघ्रता से पूरा करने में मदद मिलेगी।

निर्णय लेने की प्रक्रिया को तेज करने, जवाबदेही बढ़ाने और निष्पादन दक्षता में सुधार करने के लिए एक त्रिस्तरीय संगठनात्मक संरचना लागू की जा रही है, जिससे साइट स्तर के निर्णयों में लगने वाला समय दिनों से घटकर घंटों में होने की उम्मीद है।

गौतम अदाणी ने कहा कि संगठनों के बड़े होने के साथ-साथ निर्णय लेने की प्रक्रिया अकसर धीमी और अधिक जटिल हो जाती है, और तीन-स्तरीय मॉडल संरचनाओं को सरल बनाकर, अनुमोदन स्तरों को कम करके और साइट स्तर पर गति और स्वामित्व में सुधार करके इस समस्या का समाधान करने के लिए बनाया गया है।

एक मजबूत साझेदारी मॉडल के तहत समूह कम, लेकिन बड़े ठेकेदारों के साथ काम करेगा ताकि समन्वय और निष्पादन गति में सुधार हो सके, साथ ही उन्हें पूंजी, सुनिश्चित प्रतिफल और दीर्घकालिक जुड़ाव तक पहुंच मिल सके।

ठेकेदारों के साथ काम करने के प्रति समूह के बदलते दृष्टिकोण पर गौतम अदाणी ने कहा, “हम चुनिंदा, मजबूत और विश्वसनीय साझेदारों के साथ काम करने का प्रयास करते हैं जो शुरू से अंत तक जिम्मेदारी ले सकें और अधिक गति और दक्षता के साथ काम पूरा कर सकें। हम सिर्फ अनुबंध पर हस्ताक्षर नहीं करना चाहते; हम दीर्घकालिक साझेदारी बनाना चाहते हैं।”

उन्होंने कहा कि यह दृष्टिकोण जमीनी स्तर पर उद्यमिता को बढ़ावा दे रहा है, और गुजरात के कच्छ में हधुभाई रबारी का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे उन्होंने एक पानी के टैंकर के संचालन से शुरुआत करके एक बहु-उपकरण उद्यम का रूप धारण किया, जो प्रमुख परियोजनाओं को सहयोग प्रदान करता है और स्थानीय रोजगार सृजित करता है।

तीसरा स्तंभ सीखने और विकास पर केंद्रित है। आगामी अदाणी कौशल केंद्र के माध्यम से, श्रमिक अकुशल भूमिकाओं से कुशल, पर्यवेक्षी और नेतृत्व पदों तक प्रगति करेंगे। गौतम अदाणी ने सुब्बू की यात्रा पर प्रकाश डाला, जिन्होंने एक श्रमिक के रूप में शुरुआत की और निरंतर सीखने और कौशल विकास के माध्यम से एक कॉर्पोरेट भूमिका तक पहुंचे, जो समूह के आंतरिक कैरियर विकास और क्षमता निर्माण पर केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाता है।

मुंद्रा बंदरगाह, खावड़ा नवीकरणीय ऊर्जा पार्क, नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा और गंगा एक्सप्रेसवे (जिसका उद्घाटन इसी सप्ताह हुआ) जैसी प्रमुख परियोजनाओं को राष्ट्रीय विकास से जोड़ते हुए, गौतम अदाणी ने कहा कि ये पहल भारत की रसद, ऊर्जा और बुनियादी ढांचे को मजबूत कर रही हैं।

उन्होंने कहा, “ये परियोजनाएं केवल संपत्ति नहीं हैं। ये राष्ट्रीय प्रगति के साधन हैं।”

इन अभूतपूर्व उपायों का उद्देश्य भारत की दीर्घकालिक विकास महत्वाकांक्षाओं के अनुरूप एक अधिक चुस्त, समावेशी और क्रियान्वयन-केंद्रित संगठन का निर्माण करना है।

–आईएएनएस

एबीएस/

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