Impacts of Commercial LPG Price Hike : फ़रवरी से शुरू हुए ईरान युद्ध के बाद दुनियाभर में ईंधन की कमी देखी गई है. स्ट्रेट ऑफ़ हार्मुज पर बढ़े तनाव ने आग में घी डालने का काम किया है. इसका सबसे पहला असर एलपीजी गैस पर पड़ा है. भारत में तमाम अटकलों के बीच माना जा रहा था कि चुनाव बाद पेट्रोल डीजल समेत एलपीजी में महंगाई देखने को मिल सकती है. इसका पहला असर आज 1 मई से दिखने शुरू हो गए हैं. सरकार ने एलपीजी सिलेंडर को ले कर नई रेट लिस्ट जारी की है.
Impacts of Commercial LPG Price Hike: बढ़ी सिलेंडरों की कीमतें

बता दें, आज 1 मई को जहां भारत के प्रमुख शहरों में 14.2 किलो वाले घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत में कोई बदलाव नहीं किया गया, वहीं, 19 किलो वाले कमर्शियल गैस सिलेंडर के रेट में काफी इजाफा किया गया है. आज से कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत 993 रुपये बढ़ा दी गई है. इस बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में 19 किलोग्राम के सिलेंडर की कीमत 3,071.50 रुपये हो जाएगी.
5 किलो का FTL (फ्री ट्रेड LPG) सिलेंडर 261 रुपए की बढ़ोतरी के साथ 1754.5 रुपये का हो गया है. यह कीमत तुरंत प्रभाव से लागू हो गई है. यानी अब नए रिवाइज रेट इसी प्रकार दिखाई देने वाले हैं.
यह बढ़ोतरी अब इनडायरेक्टली आम आदमी की जेब पर पड़ने वाली है. सीधी सी बात है अगर कमर्शियल गैस के दाम बढ़े हैं तो होटलों, रेस्टोरेंटों और इससे जुड़े व्यापार पर सीधा असर पड़ने वाला है. इससे राहत पाने के लिए या तो रेस्टोरेंट को अपने खाने के दाम बढ़ाने पड़ेंगे या अपनी चैन बंद करनी पड़ेगी. मगर रुकिए, यहां हम वो तरीके आपको बताने जा रहे हैं जिससे इस समस्या से निजात पाया जा सकता है-
Commercial LPG Price Hike: अपनाएं यह तरीके

मेन्यु में करें बदलाव – कमर्शियल गैस महंगा हुआ है तो सीधी बात है इसका असर तुरंत पड़ने वाला है. तुरंत दामों को महंगा करेंगे तो हो सकता है ग्राहकों पर असर पड़े और वे आए न, अगर वे नहीं आएंगे तो फ़ूड चैन चलाना मुश्किल हो ही जाएगा. ऐसे में बीच का रास्ता निकाला जा सकता है. मेन्यु में ऐसे खाने को चुना जा सकता है जिस पर ज्यादा गैस के खपत की जरूरत न हो.
वैकल्पिक ईंधन – कुछ रेस्टोरेंट हैं जहां के आइटम की कुछ स्पेशलिटी होती है. वह रेस्टोरेंट उसी पर चलता है. अगर उसे चेंज कर देंगे तो ग्राहक आएंगे क्यों? ऐसे में वैकल्पिक ईंधन का इस्तेमाल इससे राहत दे सकता है. जैसे – PNG. इससे अधिक नुक्सान से बचा जा सकता है.
प्रेशर कुकर का इस्तेमाल – यह विकल्प छोटे मोटे ढाबों के लिए है. खाने के मेन्यु को तो बदले हीं, साथ में खाना पकाने के लिए बड़े प्रेशर कुकर का इस्तेमाल करें. इससे खाना जल्दी बनेगा और गैस खपत कम लगेगी.
मेन्यु में कटोती – कुछ रेस्टोरेंट या ढाबे वेराइटी देते हैं. यह ग्राहकों के नजरिए से अच्छा तो होता है मगर इसे बनाने में ढाबों या रेस्टोरेंट को अधिक समय अधिक गैस लगाने पड़ती है. ऐसे में कोशिश करें जहां अगर 10 तरह की सब्जियां परोसी जा रही हैं, उन्हें 5 के आप्शन तक सीमित कर सकते हैं. इससे तुरंत राहत मिलेगी और गैस खपत लगभग आधी हो जाएगी.
चूल्हे का इस्तेमाल – यह थोड़ा विवादित विकल्प है, इसे सावधानी के साथ अपना सकते हैं. देखें की सरकारी गाइडलाइन इस मामले में क्या कहती हैं. अगर इसकी अनुमति है तो जब तक चीजें सामान्य नहीं हो जाती चल्हे का इस्तेमाल कर सकते हैं.
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