सुप्रीम कोर्ट से पूर्व PM मनमोहन सिंह को बड़ी राहत, कोयला ब्लॉक आवंटन मामले पर हमेशा के लिए लगा विराम

Summary :

Manmohan Singh Coal Block Case: सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को तालाबीरा-II कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में बड़ी राहत देते हुए केस पूरी तरह बंद कर दिया। अदालत ने स्पेशल कोर्ट का समन आदेश रद्द किया और सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार कर ली। कोर्ट ने कहा कि मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद नहीं था।

Manmohan Singh Coal Block Case: सुप्रीम कोर्ट ने आज यानी  बुधवार को पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह से जुड़े फेमस कोयला ब्लॉक आवंटन केस  पर बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कहा कि इस मामले में उनके खिलाफ आगे कोई कानूनी कार्रवाई नहीं होगी। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने स्पेशल कोर्ट के उस आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसमें डॉ. मनमोहन सिंह और अन्य लोगों को कोर्ट में पेश होने के लिए समन जारी किया गया था। साथ ही, कोर्ट  ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की क्लोजर रिपोर्ट को भी मंजूरी दे दी। इस रिपोर्ट में जांच एजेंसी ने कहा था कि जांच के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री के खिलाफ किसी भी तरह का आपराधिक सबूत नहीं मिले।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस  सूर्यकांत, जस्टिस  जॉयमाल्या बागची और जस्टिस  वी. मोहना की पीठ ने की। सुनवाई के दौरान कोर्ट  ने कहा कि CBI ने जांच पूरी करने के बाद जो क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी, वह कानून के अनुसार सही थी। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी माना कि ट्रायल कोर्ट के पास ऐसा कोई ठोस कारण नहीं था, जिसके आधार पर वह CBIकी क्लोजर रिपोर्ट को खारिज कर देता और डॉ. मनमोहन सिंह सहित अन्य लोगों को आरोपी बनाकर समन जारी करता। कोर्ट  ने कहा कि जब जांच एजेंसी को किसी प्रकार की आपराधिक साजिश का सबूत नहीं मिला, तो मामले को आगे बढ़ाने का कोई मतलब नहीं था।

2005 का है मामला ?

बता दें कि यह पूरा मामला साल 2005 में ओडिशा के तालाबीरा-II कोयला ब्लॉक के आवंटन से जुड़ा हुआ है। उस समय डॉ. मनमोहन सिंह देश के प्रधानमंत्री होने के साथ-साथ कोयला मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी संभाल रहे थे। कोयला ब्लॉक के आवंटन को लेकर बाद में सवाल उठे और CBI ने इसकी जांच शुरू की। लंबी जांच के बाद एजेंसी इस निष्कर्ष पर पहुंची कि इस आवंटन में किसी भी तरह की आपराधिक साजिश या गलत साजिश के सबूत  नहीं मिले। इसी आधार पर CBI ने कोर्ट  में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी थी।

लेकिन, CBI की रिपोर्ट से सहमत न होते हुए स्पेशल कोर्ट ने मार्च 2015 में बड़ा फैसला सुनाया था। कोर्ट  ने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह, उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला, पूर्व कोयला सचिव पी.सी. पारख और तीन अन्य लोगों को आरोपी के रूप में तलब किया था। स्पेशल कोर्ट के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। इसके बाद  कोर्ट ने समन पर रोक लगा दी थी और मामले की सुनवाई शुरू की थी। अब आखिरी फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पेशल कोर्ट के आदेश को पूरी तरह रद्द कर दिया है।

शुरू से ही आरोपों से किया था इनकार

डॉ. मनमोहन सिंह ने शुरुआत से ही अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को गलत बताया था। उनका कहना था कि कोयला ब्लॉक आवंटन का फैसला सरकार की तय प्रक्रिया और उस समय लागू नीतियों के अनुसार लिया गया था। उन्होंने यह भी कहा था कि उनके खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए जरूरी कानूनी अनुमति भी नहीं ली गई थी।

उनका पक्ष था कि उन्होंने अपने पद का कभी गलत इस्तेमाल नहीं किया और पूरे मामले में किसी भी तरह की आपराधिक मंशा नहीं थी।सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के साथ वर्षों से चल रहे इस मामले का अंत हो गया है। अदालत ने CBI की जांच पर भरोसा जताते हुए साफ कर दिया कि डॉ. मनमोहन सिंह के खिलाफ मुकदमा चलाने का कोई मतलब  नहीं बनता।

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Amit Kumar

अमित कुमार पिछले 3 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। उन्हें विदेश, बिजनेस, ऑटो, टेक और गैजेट्स से जुड़ी खबरें लिखने का अच्छा अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्युनिकेशन, आईआईएमसी से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन विश्वविद्यालय से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है। पत्रकारिता की शुरुआत उन्होंने वेबसाइट पर लिखने से की। इसके बाद इंडिया डेली न्यूज़ चैनल और न्यूज़ इंडिया 24x7 में हिंदी सब-एडिटर के तौर पर काम किया। वर्तमान में वह पंजाब केसरी, दिल्ली में हिंदी सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं।